• चाणक्य नीति: इन चार कामों को करने के बाद जरूरी है स्नान करना

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    चाणक्य जाने-मानें अर्थशास्त्र, राजनीति और कूटनीति थे। ब्राहम्ण परिवार में जन्में चाणक्य ने एक श्लोक कहा है: तैलाभ्यङ्गे चिताधूमे मैथुने क्षौरकर्मणि। तावद् भवति चाण्डालो यावत् स्नानं न चाचरेत्। इस श्लोक में नहाने के बारे में बताया गया है। चाणक्य ने बताया है कि मनुष्य को इन 4 कामों को करने के बाद नहाना चाहिए। चाणक्य के इस श्लोक की मानें तो इन चार परिस्थितियों में जरूर नहाना चाहिए। यहां पढ़ें कौन सी है वो बातें:

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