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  • नया ITR फॉर्म:नोटबंदी के दौरान 2 लाख कराए है जमा तो देनी होगी जानकारी

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    सरकार ने व्यक्तियों के लिए आयकर विवरण दाखिल करने का एक नया और ज्यादा आसान फार्म आईटीआर 1 शुक्रवार को जारी किया है। यह फार्म एसेसमेंट ईयर 2017—18 के लिये शनिवार से उपलब्ध होगा। अब तीन की जगह एक पेज का हो गया है आईटीआर फॉर्म। ये फॉर्म वो टेक्सपेयर्स भर सकेंगे जिनकी सालाना आय 50 लाख रुपये से अधिक होगी।

    वहीं इस फॉर्म को भरते वक्त लोगों को जानकारी देनी होगी कि उन्होंने नोटबंदी के 50 दिनों के दौरान दो लाख रुपये या उससे ज्यादा की रकम जमा कराई है या नहीं। फिलहाल सहज (आईटीआर 1) फार्म वेतनभोगी कर्मचारी और आईटीआर-2 ऐसे व्यक्ति और हिंदू विभाजित परिवार (एचयूएफ) भरते हैं जिनकी आय में व्यापार से प्राप्त आय शामिल नहीं होती है। सरकार ने आईटीआर 2ए फॉर्म खत्म कर दिया है जिसका प्रयोग वे व्यक्ति तथा एचयूएफ करते थे जिनकी व्यवसाय या पेशे और पूंजी लाभ से कोई आय नहीं थी और न ही कोई विदेश में संपत्ति थी। फिलहाल देश में 29 करोड़ लोगों के पास स्थायी खाता संख्या (पैन) है लेकिन फिलहाल केवल छह करोड़ पैनधारक आयकर रिटर्न भरते हैं। आईटीआर-1 के लिये ई-फाइलिंग की सुविधा एक अप्रैल से चालू होगी और आईटीआर निर्धारित समय सीमा 31 जुलाई तक तक भरा जा सकता है।

    फॉर्म फाइल करते समय करदाता को पैन, आधार संख्या, व्यक्तिगत सूचना और कर भुगतान के संदर्भ में सूचना भरना पड़ेगा। टीडीएस के बारे में फार्म में स्वयं जानकारी आ जाएगी। संसद में वित्त विधेयक में संशोधन के तहत एक जुलाई के बाद करदाता के लिये आधार संख्या रसीद उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। अगर उसके पास आधार नहीं है तो उसे आईटीआर में प्राप्ति रसीद की संख्या देनी होगी जिससे यह लगे उसने आधार के लिये आवेदन किया है। साथ ही आईटीआर 4 को अब सुगम के नाम से जाना जाएगा और आईटीआर-4एस का स्थान लेगा।

    ईटीआर-4ए का उपयाग आईटीआर भरने में वे लोग : एचयूएफ या भागीदारी फर्म करती हैं जिनकी आय अनुमान आधारित होती हैं।
  • पाकिस्तान में शिया मस्जिद के बाहर विस्फोट, 22 मरे

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    पेशावर। पाकिस्तान में शुक्रवार को शिया मस्जिद के बाहर हुए कार बम विस्फोट में 22 लोग मारे गए जबकि 95 घायल हुए हैं। उत्तर-पूर्वी आदिवासी इलाके के पाराचीनार कस्बे की मस्जिद के बाहर यह धमाका हुआ।

    मस्जिद भीड़भरे बाजार में स्थित है, इसलिए जान-माल का नुकसान ज्यादा हुआ। पाकिस्तान तालिबान से अलग हुए गुट जमात-उल-अहरार ने घटना की जिम्मेदारी ली है।

    अस्पताल में भर्ती कराए गए ज्यादातर घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है। 27 घायलों को हेलीकॉप्टर से पेशावर के अस्पताल में भेजा गया है। सुरक्षा बलों ने घटनास्थल को घेर लिया है। प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने घटना पर दुख व्यक्त किया है।

    कहा, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को जारी रखना हमारी जिम्मेदारी बन गई है। आतंकियों को हर कीमत पर उखाड़ फेंका जाएगा। उन्होंने पीड़ित लोगों की हर संभव का निर्देश अधिकारियों को दिया है। पाकिस्तान के गृह मंत्री चौधरी निसार घटना की जांच के आदेश दिये हैं।

    पाकिस्तान में पिछले महीने भी कई बड़े आतंकी हमले हुए थे। इनमें से एक सिंध प्रांत में स्थित लाल शाहबाज कलंदर की दरगाह पर आत्मघाती हमले में 125 लोग मारे गए थे जबकि 300 से ज्यादा घायल हुए थे। इसके बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई करके सौ से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया था।
  • शिवसेना सांसद ने तीन बार की विमान में टिकट बुक कराने की कोशिश

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    नई दिल्ली। घरेलू एयर लाइंस में यात्रा करने से प्रतिबंधित किए गए शिवसेना सांसद रविंद्र गायकवाड़ ने इस राष्ट्रीय एयरलाइन में तीन बार सीट बुक कराने की कोशिश की। हर बार उन्होंने नए नाम से सीट बुक कराने का प्रयास किया।
    पिछले गुरुवार को एयर इंडिया कर्मचारी पर हमला करने के लिए रविंद्र गायकवाड़ के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज भी कराया गया था। सूत्रों ने बताया कि इस हफ्ते की शुरुआत में सांसद के एक कर्मचारी ने एयर इंडिया कॉल सेंटर में फोन करके मुंबई से दिल्ली की फ्लाइट (एआइ 806) में बुधवार का टिकट बुक करने को कहा। उस कर्मचारी ने यात्री का नाम रविंद्र गायकवाड़ बताया, जिसके बाद टिकट तत्काल रद हो गया। इसके बाद हैदराबाद से दिल्ली की फ्लाइट (AI 551) में प्रोफेसर वी. रविंद्र गायकवाड़ के नाम से टिकट बुक कराया गया। यह टिकट भी रद हो गया। सांसद के कर्मचारी ने अगले दिन फिर कोशिश की और एक ट्रैवल एजेंट को नागपुर से दिल्ली वाया मुंबई की फ्लाइट में प्रोफेसर रविंद्र गायकवाड़ के नाम से टिकट बुक कराने को कहा। एजेंट ने तुरंत स्थानीय स्टेशन मैनेजर से संपर्क किया और यह सूचना तुरंत एयर इंडिया मुख्यालय को दे दी गई।







  • बॉलीवुड स्टार 26 साल से जिसे समझ रहे थे पत्नी, वो बीवी नहीं बल्कि...

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    बॉलीवुड अभिनेता दीपक तिजोरी के साथ एक अजीब घटना हुई। उनकी पत्नी ने जब उन्हें घर से निकाल दिया तब उन्हें पता चला कि वो उनकी पत्नी ही नहीं है। जी हां, आप भी सोच रहे होंगे कि ऐसा भला कैसा हो सकता है, लेकिन यही सच है।

    'जो जीता वही सिकंदर' और 'आशिकी' जैसी फिल्मों से फेमस हुए दीपक को उनकी बीवी शिवानी जोशी ने घर से बाहर निकाल दिया। इसके बाद शिवानी ने उनसे तलाक और गुजारा भत्ते के लिए भी आवेदन किया है।

    पत्नी के इस कानूनी कदम के बाद जब दीपक ने अपने वकील से इस बारे में बात की तो उन्हें पता चला कि जिसे वो इतने दिनों से अपनी पत्नी समझ रहे थे वो दरअसल, उनकी पत्नी है ही नहीं।


    दीपक से शिवानी की दूसरी शादी है। अपने वकील से बात करने पर दीपक को पता चला कि उनकी पत्नी शिवानी ने अपने पहले पति से बिना तलाक लिए ही उनसे शादी कर ली थी। कानून के अनुसार, पहले पति से तलाक लिए बिना की गई यह शादी मान्य नहीं है।

    खबरों की मानें तो शिवानी को शक है कि दीपक का किसी योग इंस्ट्रक्टर से अफेयर चल रहा है। इसी वजह से उन्होंने दीपक को घर से बाहर निकाल दिया। बता दें कि दीपक और शिवानी की 20 साल की एक बेटी भी है।
  • 1 अप्रैल से कहीं होगी राहत तो कहीं होगी आफत

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    नई दिल्लीः 1 अप्रैल 2017 से आपके जीवन में कई बदलाव होने वाले हैं. क्योंकि इस दिन से आपके जीवन से जुड़े कई नियमों बदल जाएंगे. इन नियमों के बदलने से आपके जीवन में कहीं राहत तो कहीं आफत का आना संभव है. एक अप्रैल से देश के सबसे बड़ा बैंक एसबीआई में महीने में 3 से ज्यादा फ्री ट्रांजैक्शन का चार्ज लगेगा। वहीं, एसबीआई में 6 बैंकों का विलय भी हो जाएगा। कैश ट्रांजैक्शन लिमिट 3 लाख से घटकर 2 लाख हो सकती है। शनिवार से ही कार-बाइक और हेल्थ इन्श्योरेंस भी महंगा हो जाएगा। इसके अलावा मेल-एक्सप्रेस के किराए में राजधानी-शताब्दी में सफर किया जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के मुताबिक, एक अप्रैल से ही बीएस-III नॉर्म वाली गाड़ियां नहीं बिक सकेंगी।
    बदल जाएंगे बैंकों के नियम, जानिए नई व्यवस्था 
    भारतीय स्टेट बैंक के खाताधारक महीने में सिर्फ 3 बार ही अपने अकाउंट में मुफ्त में पैसे जमा कर सकेंगे। इसके बाद हर डिपॉजिट पर 50 रुपए और सर्विस चार्ज देना होगा। एसबीआई डेबिट कार्डधारकों से SMS अलर्ट भेजने के लिए 15 रुपए का चार्ज वसूलेगा। तीन बार से अधिक किसी भी दूसरे बैंक के एटीएम से पैसे निकालने पर आपको प्रति ट्रांजेक्शन 20 रुपए देना होगा। एसबीआई के एटीएम से पांच से ज्यादा ट्रांजेक्शन करने पर प्रति ट्रांजेक्शन आपको 10 रुपए देना होगा।
    हर खाताधारक को मिनिमम अकाउंट बैलेंस रखना जरूरी होगा। यह बैलेंस मेट्रो शहरों के लिए अलग है, जबकि अन्य शहरों और ग्रामीण इलाकों के लिए अलग होगा। मिनिमम बैलेंस न रखने की स्थिति में अलग-अलग शहरों के हिसाब से अलग-अलग चार्ज लगेगा।
    1 अप्रैल से देश में 5 बड़े बैंक बंद हो जाएंगे। 1 अप्रैल से स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर और स्टेट बैंक ऑफ पटियाला एसबीआई में शामिल हो जाएंगे।
    कैश लिमिट होगी निर्धारित
    बजट 2017 के दौरान जेटली ने कैश ट्रांजैक्शन लिमिट 2 लाख तक करने की बात कही थी फिलहाल ये 3 लाख है। अगर बदलावों को संसद की मंजूरी मिल जाती है तो पेनल्टी की रकम उतनी ही होगी, जितनी एक्‍स्‍ट्रा रकम कैश में ली गई है। इसका मतलब है कि यदि कोई 5 लाख रुपए कैश लेता है तो उसे 3 लाख रुपए की पेनल्टी देनी पड़ सकती है।
    मिलेगी रेलवे की 'विकल्प' योजना
    रेल मंत्रालय ने 'विकल्प' नामक एक नया रिजर्वेशन सिस्टम बनाया है, इसे वैकल्पिक ट्रेन आवास योजना (एटीएएस) भी नाम दिया गया है, जो कि 1 अप्रैल 2017 से लागू होगी। इस योजना के जरिए वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को राजधानी, शताब्दी या अन्य प्रीमियम/विशेष ट्रेनों में यात्रा करने का मौका मिल सकता है।
    भले ही उन्होंने अन्य मेल/एक्सप्रेस गाड़ियों में एक ही गंतव्य के लिए टिकट बुक कराए हों। इसके लिए यात्रियों से कोई भी शुल्क नहीं वसूला जाएगा।
    इस योजना का उद्देश्य मेजर रुट्स पर प्रीमियम ट्रेनों में काफी सारी खाली बर्थ को भरना है। वर्तमान समय में इस योजना को चुनिंदा रुट्स पर पायलट आधार पर पेश किया जा रहा है। इसमें शुरुआती तौर पर विकल्प योजना केवल ई-टिकट के लिए ही उपलब्ध होगी। इस योजना के जरिए वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को विकल्प स्कीम के चयन का मौका मिलेगा। विकल्प योजना में उन यात्रियों का चयन किया जाएगा जिनका नाम चार्ट तैयार होने के बाद भी कन्फर्म नहीं होता है, केवल ऐसे ही यात्रियों के लिए वैकल्पिक ट्रेन में आवंटन पर विचार किया जाएगा। विकल्प के जरिए टिकट कन्फर्म होने पर किसी यात्री से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला जाएगा और न ही इसमें किराए में अंतर होने पर रिफंड की सुविधा दी जाएगी। रेल यात्री को अल्टरनेट ट्रेन में सीट आबंटित कर दिए जाने के बाद उसे सामान्य यात्री ही माना जाएगा और वो अपग्रेडेशन के पात्र होंगे। आपको ये भी बता दें कि विकल्प योजना के तहत हर ट्रेन में बर्थ के उपयोग की सुविधा मिल सकेगी। वेटिंग लिस्ट वाले यात्री जो विकल्प योजना का विकल्प चुनेंगे उन्हें चार्ट तैयार होने के बाद पीएनआर स्टेटस चेक करना होगा ताकि वे ये जान सकें कि उन्हें किस ट्रेन में सीट दी गई है।
    दो लाख रुपये से अधिक की ज्वैलरी पर लगेगा एक प्रतिशत TCS
    1 अप्रैल से टीसीएस के नियम भी बदलने जा रहे हैं। नए नियमों के अनुसार दो लाख रुपये से अधिक के आभूषणों की खरीद पर एक प्रतिशत का स्रोत पर कर यानी टीसीएस देना होगा। पुराने नियम के हिसाब से इसकी सीमा 5 लाख रुपये है। आपको बता दें कि वित्त विधेयक 2017 पारित होने के बाद आभूषण भी सामान्य वस्तुओं की श्रेणी में आ जाएंगे, जिनपर दो लाख रुपये से अधिक की खरीद पर एक प्रतिशत टीसीएस देना होगा। वित्त विधेयक 2017 में टीसीएस के लिए 5 लाख रुपये से अधिक के आभूषणों की खरीद की सीमा को समाप्त करने का प्रस्ताव है। इसकी वजह यह है कि 2017-18 के बजट में तीन लाख रुपये से अधिक के नकद सौदों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके उल्लंघन में नकदी स्वीकार करने वाले व्यक्ति पर उतनी ही राशि का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। चूंकि आभूषणों की खरीद के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है ऐसे में अब इसे सामान्य उत्पादों के साथ मिला दिया गया है।
    इन्कम टैक्स से जुडे़ इन नियमों में होगा बदलाव
    ढाई लाख से 10 लाख रुपये के बीच की आय वालों का टैक्स 10 फीसद से 5 फीसदी कर दिया जाएगा। सेक्शन 87ए के तहत छूट 5000 रुपये से घटाकर 2500 रुपये कर दी गई है। साथ ही जिन की आय 3.5 लाख रुपये से ऊपर है उनके लिए कोई छूट नहीं है। जिन लोगों की आय 50 लाख से 1 करोड़ है, उनपर 10 फीसदी सरचार्ज लगेगा। जिन लोगों की आय एक करोड़ रुपये के ऊपर है उनपर 15 फीसद तक का सरचार्ज लगेगा। जिन लोगों की टैक्सेबल इनकम यानि कर योग्य आय 5 लाख रुपये तक की है (बिजनेस इनकम के अलावा) उनके लिए टैक्स फाइल करने के लिए एक पेज का सरल फॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा। एसेसमेंट ईयर यानि आंकलन वर्ष 2018-19 के लिए राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम में निवेश करने वालों के लिए कोई भी डिडक्शन नहीं दी जाएगी। आयकर विभाग अधिकारी बीते 10 वर्षों के उन सभी मामलों की फिर से जांच कर सकता है, जिनकी आय और संपत्ति 50 लाख रुपये से अधिक है। लंबे समय के लाभ के लिए प्रॉपर्टी से पैसे कमाने वालों के लिए अवधि तीन वर्ष से घटाकर दो वर्ष कर दी गई है। सरकार ने उन संपत्तिधारकों के लिए कर लाभ कम कर दिए हैं, जो उधारकर्ता (बॉरोअर्स) बन कर किराए का फायदा उठाते हैं। जिन लोगों को 50,000 रुपये से अधिक का किराया मिलता है, उन्हें 5 फीसद अतिरिक्त टीडीएस (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स) देना होगा। नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) से की जाने वाली आंशिक निकासी पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। अब पैन कार्ड के आवेदन के लिए भी आधार कार्ड का होना अनिवार्य होगा। साथ ही जुलाई से टैक्स रिटर्न भरते वक्त आधार का होना जरूरी होगा।
    बीमा कंपनियों को देना होगा सर्टिफिकेट
    - IRDAI कहना है कि बीमा कंपनियों को यह भी सर्टिफिकेट देना होगा कि जो पॉलिसी पहले सोल्ड हो चुकी हैं, उनमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया जाएगा। सर्टिफिकेट में यह भी साफ बताना होगा कि प्रीमियम रेट में इस तरह का कोई बदलाव नहीं होगा, जिससे पॉलिसी होल्डर को नुकसान हो।
     1 अप्रैल से BS-III नॉर्म वाली गाड़ियां नहीं बिकेंगी
    सुप्रीम कोर्ट ने लोगों की सेहत का हवाला देकर देशभर में बीएस-3 गाड़ियां बेचने और उनके रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी। एक अप्रैल के बाद सिर्फ बीएस-4 इमिशन स्टैंडर्ड वाली गाड़ियां ही बेची और रजिस्टर्ड हो सकेंगी।कंपनियों के स्टॉक में बीएस-3 की करीब 8.24 लाख गाड़ियां हैं। करीब 12 हजार करोड़ रुपए के नुकसान की दुहाई देते हुए उन्होंने यह स्टॉक बेचने की मंजूरी मांगी थी। लेकिन जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने मांग खारिज कर दी।

    महंगी होंगी ये चीजें 
    1- कार, मोटरसाइकिल और कमर्शियल वाहनों का बीमा महंगा हो जाएगी, जिसकी वजह से आपकी जेब से अधिक पैसे खर्च होंगे। 2- तंबाकू वाले पान-मसाले व गुटखे पर उत्पाद शुल्क 10 फीसदी से बढ़कर 12 फीसदी हो जाएगी, जिससे इसकी कीमत बढ़ेगी। 3- सिगरेट पर उत्पाद शुल्क 215 रुपए प्रति हजार से बढ़कर 311 रुपए प्रति हजार हो रहा है। अब सिगरेट से सिर्फ स्वास्थ्य ही नहीं, आपका बजट भी बिगड़ेगा। 4- LED बल्ब बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री पर भी मूल सीमा शुल्क और 6 प्रतिशत प्रतिपूर्ति शुल्क लगेगा। इसकी वजह से एलईडी बल्ब की कीमतों में बढ़ोत्तरी होगी। 5- चांदी के बर्तन और चांदी से बनने वाले सामान भी 1 अप्रैल से महंगे हो जाएंगे। 6- मोबाइल फोन बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रिंटेड सर्किट बोर्ड पर सीमा शुल्क लगा दिया गया है, इसकी वजह से मोबाइल फोन भी महंगे हो सकते हैं। 7- अगर आप स्टील के बर्तन खरीदना चाहते हैं तो 1 अप्रैल से पहले ही खरीद लें, क्योंकि कई नियमों में बदलाव होने की वजह से स्टील के सामान पर भी असर पड़ सकता है। 8- सरकार ने एल्यूमीनियम पर 30 फीसदी का आयात शुल्क लगा दिया गया है, जिसके चलते इससे जुड़े तमाम पदार्थ महंगे हो जाएंगे। 9- रिलायंस जियो की तरफ से दी जा रही मुफ्त सेवा 31 मार्च को खत्म हो जाएगी, जिसके बाद रिलायंस जियो की सेवाओं के लिए आपको भुगतान करना पड़ेगा।

    ये चीजें होंगी सस्ती 
    1- बजट में रेल टिकट करवाते वक्त लगने वाले सर्विस चार्ज को कम करने की घोषणा की गई थी, जिससे रेल टिकट बुक करना सस्ता हो जाएगा। 2- बजट में सरकार ने घोषणा की थी कि वह होम लोन ब्याज पर छूट देंगे, जिसके चलते आपको 1 अप्रैल से शुरू हो रहे वित्त वर्ष में घर बनवाने में फायदा होगा।  3- बजट की घोषणाओं को ध्यान में रखते हुए आरओ, पवन चक्की, आरओ, पीओएस, पार्सल, सोलर पैनल, प्राकृतिक गैस, निकेल, बायोगैस, नायलॉन के दाम भी कम होंगे। 4- लैदर का सामान खरीदने का मन बना रहे हैं तो जा लें कि अब लेदर का सामान भी सस्ता होगा। 5- पार्सल यानी डाक की सुविधा सस्ती पड़ेगी।



















  • रामसेतु प्राकृतिक या मानव निर्मित: ICHR करेगा रिसर्च, सुलझेगा रहस्य

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    रामसेतु प्राकृतिक है या इसे किसी इंसान ने बनाया है इस रहस्य को सुलझाने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च (ICHR) शोध करेगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत आने वाला ICHR रामसेतुकी वास्तविकता जानने के लिए पायलट प्रॉजेक्ट शुरू करेगा।
    ICHR के चेयरमैन वाई सुदर्शन राव ने बताया कि रामसेतु पर पायलट प्रॉजेक्ट अक्टूबर में शुरू किया जाएगा और यह दो महीने तक चलेगा। इसके बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे उसका पेपर पब्लिश किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'अभी तक किसी ने रामसेतु को लेकर सबूत एकत्र नहीं किए हैं। इस पायलट प्रॉजेक्ट में मरीन आर्कियॉलजिस्ट की मदद से मटीरियल एविडंस सामने लाने की कोशिश की जाएगी।'

    दो महीने का शोध असम स्थित सिल्चर यूनिवर्सिटी के आर्कियॉलजी के प्रोफेसर व भारतीय पुरातत्व विभाग के पूर्व निदेशक आलोक त्रिपाठी की अध्यक्षता में शुरू होगा। रिसर्च स्कॉलर्स के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन निकाला जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत यूनेस्को से गोताखोरी का लाइसेंस लेने के बाद पुद्दुचेरी में पानी के नीचे कोर्स भी करवाया जाएगा।

    उन्होंने बताया, 'यह पूरा प्रॉजेक्ट असम की सिल्चर यूनिवर्सिटी में आर्कियॉलजी के प्रफेसर आलोक त्रिपाठी की देखरेख में होगा। प्रफेसर त्रिपाठी ASI के डायरेक्टर रह चुके हैं। इस पायलट प्रॉजेक्ट के लिए रिसर्च स्कॉलर का चयन राष्ट्रीय स्तर पर सिलेक्शन प्रकिया के जरिए होगा, जिन्हें जून में दो हफ्ते की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।'

    ICHR के मेंबर सेक्रटरी आनंद शंकर सिंह ने बताया, 'ICHR दिल्ली में 27 से 29 मार्च तक तीन दिन का सेमिनार भी करने जा रहा है जिसमें डार्क पीरियड की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जाएगी। इसमें ईसा पूर्व 10 लाख साल पहले भारत में सिविलाइजेशन और कल्चर के विकास की बात होगी।' इस सेमिनार में अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक स्टडीज के डायरेक्टर डेविड फ्रॉली सहित ASI के पूर्व डीजी बीबी लाल सहित 26 स्कॉलर अपने रिसर्च पेपर पेश करेंगे।

    आपको बता दें कि रामसेतु दक्षिण भारत के रामेश्वरम के निकट पंबन द्वीप से श्रीलंका के उत्तरी तट से दूर मन्नार तक के बीच चूनापत्थर से बना हुआ है।
  • महिलाओं को सशक्त बनाने को जल्द आएगी नई राष्ट्रीय महिला नीति

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     नई दिल्ली। बदले जमाने में महिलाओं के सशक्तीकरण और देश व समाज के विकास में उनकी भूमिका को और मजबूत बनाना सरकार की नई राष्ट्रीय महिला नीति का मूल उद्देश्य होगा। नीति में उन विषयों और बिंदुओं पर खासा जोर रहेगा जिससे महिलाएं मौजूदा और भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना कर सकें। नीति के मसौदे पर फिलहाल मंत्रियों का समूह विचार कर रहा है और इसे जल्द ही कैबिनेट में रखे जाने की संभावना है।

    नई राष्ट्रीय महिला नीति के मसौदे में महिलाओं से संबंधित सात क्षेत्रों की पहचान की गई है जिन पर फोकस किया जाना है। महिलाओं के सर्वागीण विकास और विकास में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए इन विषयों को ही ध्यान में रखकर नियम कायदे तय किये जाएंगे। इनमें स्वास्थ्य जिसमें खाद्य सुरक्षा और पोषण शामिल हैं, शिक्षा, आर्थिक विकास (कृषि, उद्योग, श्रम, रोजगार, सेवा क्षेत्र विज्ञान व प्रौद्योगिकी), गवर्नेस व फैसले लेने में महिलाओं की भूमिका, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा, महिलाओं के पक्ष में माहौल (आवास, इन्फ्रास्ट्रक्चर, पेयजल व सेनिटेशन, मीडिया, स्पो‌र्ट्स, सामाजिक सुरक्षा) और पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन शामिल हैं।

    इससे पहले देश में राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण नीति साल 2001 में बनी थी। लेकिन उसके बाद देश में हुए सामाजिक आर्थिक बदलावों के मद्देनजर बीते एक दशक से नई महिला नीति बनाने की जरूरत महसूस की जा रही थी। महिलाओं के सशक्तीकरण और देश के विकास में उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच के अनुरूप एक नई राष्ट्रीय महिला नीति बनाने का फैसला हुआ।

    इस पर आगे बढ़ते हुए केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्रालय की तरफ से साल 2013 में बनी एक उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर राष्ट्रीय महिला नीति का मसौदा तैयार किया गया। सरकार के लिए राष्ट्रीय महिला नीति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, बेहतर शिक्षा और काम के बेहतर माहौल तैयार करने की दिशा में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों में अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर चुकी है।
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    राष्ट्रीय महिला नीति के मसौदे पर शुक्रवार को केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के समूह ने विचार किया। समूह की तरफ से मसौदे को मंजूरी मिल जाने के बाद इसे कैबिनेट में भेजा जाएगा। यदि मसौदे में बहुत अधिक बदलाव की जरूरत नहीं हुई तो अगले महीने के अंत तक इसे कैबिनेट से मंजूरी मिल जाने की उम्मीद है। इस मंजूरी के मिलने के बाद ही एक अंतर मंत्रालयी कार्ययोजना तैयार की जाएगी। दरअसल इस नीति पर अमल की सफलता इसी बात पर निर्भर करेगी कि कैसे सरकार के सभी विभाग इसे लागू करते हैं।

    अमल की कार्ययोजना बनाने के लिए राज्य सरकारों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी ताकि पूरे देश में एक समान तरीके से इसे कार्यान्वित कराया जा सके। नीति के मसौदे के मुताबिक कार्य योजना में अल्पकालिक (शुरुआती पांच साल) और दीर्घकालिक (पांच साल से अधिक) की अवधि के लक्ष्य, समय सीमा आदि निर्धारित किये जाएंगे। नीति की सफलता और प्रगति की समीक्षा के लिए महिला व बाल विकास मंत्रालय की अध्यक्षता में एक अंतर मंत्रालयी निगरानी समिति भी गठित करने का प्रस्ताव मसौदे में किया गया है।
  • 1 अप्रैल से लागू हो जाएंगे ये 10 नियम

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    नई दिल्ली। नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही कुछ नए नियम लागू होने वाले हैं। नियमों ये ये बदलाव सरकार के साथ साथ आम आदमी पर भी सीधे-सीधे असर डालने वाले हैं। आइए आपको बताते हैं वे कौन से नए नियम हैं, जो नए वित्त वर्ष यानी 1 अप्रैल से प्रभावित कर सकते हैं।

    - 2.5 लाख से 10 लाख रुपये के बीच की आय वालों का टैक्स 10 फीसद से 5 फीसदी कर दिया जाएगा। सेक्शन 87ए के तहत छूट 5000 रुपये से घटाकर 2500 रुपये कर दी गई है। साथ ही जिन की आय 3.5 लाख रुपये से ऊपर है उनके लिए कोई छूट नहीं है।

    - जिन लोगों की आय 50 लाख से 1 करोड़ है, उनपर 10 फीसदी सरचार्ज लगेगा। साथ ही जिन लोगों की आय एक करोड़ रुपये के ऊपर है उनपर 15 फीसद तक का सरचार्ज लगेगा।

    - जिन लोगों की कर योग्य आय 5 लाख रुपये तक की है (बिजनेस इनकम के अलावा) उनके लिए टैक्स फाइल करने के लिए एक पेज का सरल फॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा।

    - आंकलन वर्ष 2018-19 के लिए राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम में निवेश करने वालों के लिए कोई भी डिडक्शन नहीं दी जाएगी।

    - आयकर विभाग अधिकारी बीते 10 वर्षों के उन सभी मामलों की फिर से जांच कर सकता है, जिनकी आय और संपत्ति 50 लाख रुपये से अधिक है। मौजूदा समय में आयकर अधिकार अधिकतम 6 वर्षों के केस की खोल सकता है।

    - लंबे समय के लाभ के लिए प्रॉपर्टी से पैसे कमाने वालों के लिए अवधि तीन वर्ष से घटाकर दो वर्ष कर दी गई है।

    - सरकार ने उन संपत्तिधारकों के लिए कर लाभ कम कर दिए हैं, जो उधारकर्ता (बॉरोअर्स) बन कर किराए का फायदा उठाते हैं।

    - जिन लोगों को 50,000 रुपये से अधिक का किराया मिलता है, उन्हें 5 फीसद अतिरिक्त टीडीएस (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स) देना होगा।

    - नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) से की जाने वाली आंशिक निकासी पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।

    - अब पैन कार्ड के आवेदन के लिए भी आधार कार्ड का होना अनिवार्य होगा। साथ ही जुलाई से टैक्स रिटर्न भरते वक्त आधार का होना जरूरी होगा।
  • गरमागरम मुंबई

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    माया नगरी मुंबई अपने सदाबहार मौसम के लिए जानी जाती है। वैसे मौसम विशेषज्ञों ने यहां के 82 दिनों को बेहद खुशगवार बताया है। पर आलम ऐसा ही रहा तो इन खुशगवार दिनों की संख्या कम हो जाएगी। इस तरह की चेतावनी एक नये शोध में दी गई है। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि ऐसा नहीं कि असर सिर्फ मुंबई पर ही पड़ेगा, मगर यह नगर ज्यादा प्रभावित होगा। वर्तमान में मुंबई में प्रतिवर्ष 82 दिन खुशगवार मौसम होता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक 2035 तक महानगर में 16 खुशनुमा दिनों की संख्या कम हो जाएगी और 2100 तक यह घटकर 44 रह जाएगी। चक्रवात, सूखा, बाढ़, बर्फीले तूफान और मौसम के अन्य प्रारूपों पर काफी अध्ययन हुआ है, लेकिन अभी तक खुशनुमा मौसम की अनदेखी की गई है। अमेरिका के राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान और वायुमंडल प्रशासन (एनओएए) तथा प्रिंसटन विश्वविद्यालय ने पहला वैश्विक विश्लेषण पेश किया कि किस तरह जलवायु परिवर्तन का खुशनुमा मौसम पर असर होता है। हालांकि एक ओर इससे संबंधित अध्ययन में कहा गया कि जिस तरह जलवायु बचाने की पहल पूरी दुनिया में चल रही है, उसी तरह मुंबई के मौसम पर विपरीत प्रभाव डालने पर प्रदूषण को रोकने की पहल भी होनी चाहिए। ताकि मुंबई के खुशनुमा एहसास को कम न किया जा सके।
  • कुछ कहती है दिल की धड़कन

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    क्या आप अपनी सेहत को लेकर बेहद सजग हैं। हो सकता है कि आप अपनी घड़ी या मोबाइल पर इस तरह का कोई एप डाउनलोड कर चलते हों कि आपकी सेहत में थोड़ी भी गड़बड़ हुई नहीं कि आपके जानकारों को सूचना मिल जाएगी। लेकिन अमेरिका में इससे एक कदम और आगे काम किया जा रहा है। वहां की सरकार का मानना है कि हेल्थ रिकार्ड की मोटी-मोटी फाइलों को संभाल कर रखना अपने आप में बड़ी सिरदर्दी है। इसलिए एक इलेक्ट्रानिक पासवर्ड पर काम किया जा रहा है जो सीधे दिल की धड़कनों से जुड़ा होगा। दिल की धड़कन ही उसके इलेक्ट्रानिक हेल्थ रिकार्ड का पासवर्ड होगी। अमेरिका में बिंगहैम्प्टन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के मुताबिक, ‘पुरानी व्यवस्थाओं के स्थान पर धीरे-धीरे नई व्यवस्था आ रही है और हम चाहते थे कि बीमार व्यक्ति के स्वास्थ्य रिकार्ड को सुरक्षित रखने के लिए कोई अनूठा समाधान मिल सके जो सरल, सहज उपलब्ध और सस्ता हो।’ वैज्ञानिकों ने किसी व्यक्ति के विशिष्ट ईसीजी डाटा का इस्तेमाल करते हुए उसकी हेल्थ फाइल को लॉक या अनलॉक करने के लिए उसकी दिल की धड़कनों को चाबी के रूप में इस्तेमाल करने का तरीका ढूंढ निकाला है। ईसीजी संकेतों को क्लीनिकल डायगनोसिस के लिए एकत्र करते हुए इन्हें इलेक्ट्रानिक हेल्थ रिकार्ड तक एक नेटवर्क के जरिए भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में मरीज के हेल्थ रिकार्ड तक पहुंचने के लिए उसके दिल की धड़कन ही पासवर्ड होगी। फिलहाल इस पर काम चल रहा है। हो सकता है कि जल्दी ही यह काम पूरा हो जाये।
  • महंगी हो सकती है हज यात्रा, जानिए क्यों

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    हैदराबाद। मुस्लिम धर्मावलंबियों के लिए हज यात्रा करना अब महंगा हो सकता है क्योंकि देश की हज समिति के अधिकारियों ने विमान किरायों में 20 फीसदी की बढ़ोतरी की संभावना जताई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हज समिति ने सीईओ अता-उर-रहमान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हज यात्रा के लिए दी जाने सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके लागू किया जाएगा। हमें उम्मीद है कि हज यात्रा के लिए विमान किराए में 15000 रुपए की बढ़ोतरी हो सकती है।

    हालांकि हज कमेटी ने अभी अंतिम आकंड़ा नहीं बताया है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले सप्ताह तक हज कमेटी नए किराए की घोषणा कर दे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक किराए का निर्धारण आने वाले दिनों में सऊदी रियाल की कीमत के आधार पर किया जाएगा, लेकिन यह तय है कि मक्का-मदीना में रिहाईश के स्थानों का किराया अधिक होने के कारण शुल्क इस बार पहले से अधिक ज्यादा हो सकता है।

    तेलंगाना हज कमेटी के मुताबिक इस साल हज यात्रा के लिए विमान किराया 56000 रुपए हो सकता था, जो अब 71000 हजार रुपए हो सकता है। गौरतलब है कि बीते साल ग्रीन कार्डधारी के लिए हज यात्रा का कुल पैकेज 220550 रुपए था, जबकि अजीजिया श्रेणी के लिए यह 186850 रुपए था। इस बार इन दोनों श्रेणी में किराए की बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
  • गैंगरेप पीड़िता पर एसिड अटैक: CM योगी अस्पताल पहुंचे, 1 लाख की मदद की

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    लखनऊ: रायबरेली से लखनऊ आ रही गैंगरेप पीड़िता पर ट्रेन में एसिड अटैक किया गया, जिसके बाद उसे लखनऊ के केजीएमयू अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार सुबह अस्पताल का दौरा किया और पीड़िता से मुलाकात की।
    सीएम आदित्यनाथ और कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी केजीएमयू के गांधी वार्ड पहुंचे। गैंगरेप पीड़िता का हाल पूछने के बाद सीएम ने एक लाख रुपये की आर्थिक मदद भी की। आदित्यनाथ ने पीड़िता का मुफ्त में इलाज कराने के साथ-साथ पूरे परिवार को सुरक्षा दिए जाने का आदेश दिया। सीएम तकरीबन दस मिनट तक गांधी वार्ड में रुके।
    गैंगरेप पीडि़ता पर हुए एसिड अटैक मामले में पुलिस जांच के आदेश दे दिए गए हैं। एसएसपी लखनऊ ने जानकारी देते हुए बताया कि इस मामले में दो आरोपियों को रायबरेली के ऊंचाहार से गिरफ्तार भी किया गया है। बता दें कि मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ पूरे एक्शन में हैं। वे आज लखनऊ के केजीएमयू अस्पताल में सुविधाओं का जायजा लेने पहुंचे थे। वहीं, इससे पहले वे गुरुवार को हजरतगंज थाने भी गए थे।
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 26 मार्च को गोरखपुर में योगिराज बाबा गंभीरनाथ की शताब्दी पुण्यतिथि समारोह में शामिल होने जाएंगे। यह समारोह गोरखनाथ मंदिर में सुबह 11 बजे होगा। मुख्यमंत्री लखनऊ से 25 मार्च की दोपहर में ही गोरखपुर के लिए रवाना हो जाएंगे। बता दें कि मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर की यह पहली यात्रा है।
  • किसानों का कर्ज माफ नहीं करेगी केंद्र सरकारः अरुण जेटली

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    नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि केंद्र सरकार किसानों का कर्ज माफ नहीं करेगी। जेटली का कहना है कि अगर राज्य के पास पैसा है तो वो ऐस कर सकती है लेकिन केंद्र इसके लिए पैसे नहीं देगा।

    वित्त मंत्री ने गुरुवार को अपने एक बयान में कहा कि यह मुद्दा कई राज्यों में उठ रहा है। केंद्र सरकार की खेती के लिए अपनी नीतियां हैं और सरकार ब्याज में सब्सिडी के अलावा अन्य तरीकों से किसानों की मदद करती है। केंद्र सरकार ऐसा नहीं कर सकती कि एक राज्य के किसानों को कर्ज माफी दे और दूसरे को नहीं।

    बता दें कि पीएम मोदी ने भी चुनावी रैलियों के दौरान वादा किया था कि यूपी कैबिनेट की पहली बैठक में ही वो किसानो के कर्ज माफी का प्रस्ताव लाएंगे। इस पर विपक्ष नें हंगामा करते हुए कहा था कि सरकार सिर्फ एक राज्य के लिए ऐसा कैसे कर सकती है। कर्ज माफी की बात को लेकर रिजर्व बैंक ने भी कहा है कि इससे अनुशासन बिगड़ेगा।
  • शशांक मनोहर ने लिया यू टर्न, बने रहेंगे ICC के चेयरमैन

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    नई दिल्ली। शशांक मनोहर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के चेयरमैन पद से अचानक इस्तीफा देकर विश्व क्रिकेट में सनसनी मचा दी थी। अब अपने इस फैसले से यू टर्न लेते हुए उन्होंने अपने इस्तीफे को फिलहाल अप्रैल तक टाल दिया है।

    शशांक मनोहर अप्रैल में अगले राउंड की बैठक तक अपने पद पर बने रहेंगे। अगली बैठक में नए प्रशासन और वित्तीय मॉडल ढांचे पर वोट दिया जाना है। मनोहर ने आईसीसी की शुक्रवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा, मैं निदेशकों की भावनाओं और मुझ पर उनके विश्वास का सम्मान करता हूं।

    हालांकि निजी कारणों से इस पद से हटने का मेरा फैसला बदला नहीं है। लेकिन मैं तब तक चेयरमैन के तौर पर अपनी जिम्मेदारी को निभाऊंगा जब तक अगला काम पूरा नहीं हो जाता।

    मनोहर ने कहा कि यह मेरा कर्तव्य है कि मैं अपने सहयोगियों के साथ काम करूं और उन बदलावों को पूरा करूं जो आईसीसी अपने प्रशासन में लाना चाहता है।
  • इंडिगो ने भी रद्द किया सांसद का टिकट

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    मुंबई। एयर इंडिया के अधिकारी को सैंडल से पीटना शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड़ को महंगा पड़ता जा रहा है। खबर है कि एयर इंडिया के बाद अब इंडिगो ने भी उनका रिटर्न टिकट भी रद्द कर दिया है। साथ ही उनके विरोध में और भी कई कंपनियां उतर आई हैं। जबकि इंडियन पायलट एसोसिएशन ने केंद्रीय मंत्री ए गजपति राजू को पत्र लिखकर कहा है कि रवींद्र गायकवाड़ की हरकत भयावह और अस्वीकार्य है औ हम इसकी निंदा करते हैं।

    इससे पहले एयर इंडिया ने सांसद को ब्लैक लिस्ट किए जाने के साथ ही उनका पुणे का रिटर्न टिकट कैंसल कर दिया था। वहीं फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने भी उन पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब वो संघ से जुड़ी किसी भी विमानन कंपनी की फ्लाइट में सफर नहीं कर पाएंगे। बता दें कि इस संघ देश की कई बड़ी विमानन कंपनियां शामिल हैं।

    इस मामले में संघ ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि हम सभी एयर लाइन कंपनियों से बात कर रहे हैं कि वो भी शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड़ पर प्रतिबंध लगाए।

    इस बीच जब गायकवाड़ से पत्रकारों ने बात की तो उन्होंने कहा कि मैं माफी नहीं मांगूगा। केस हुआ है तो जमानत ले लूंगा, मेरी पार्टी देखेगी मामलो को। ब्लैक लिस्ट किए जाने को लेकर उन्होंने कहा कि कैसे नहीं बैठने देंगे विमान में, मैं पैसे दूंगा।

    मारपीट को लेकर शिवसेना ने भी अपने सांसद से सफाई मांगी है। शिवसेना ने इस घटना पर अपने सांसद से जवाब तलब कर लिया है। पार्टी ने कहा कि वह अपने सांसद की इस हरकत की कतई अनदेखी नहीं करेगी, लेकिन साथ ही यह जानना भी जरूरी है कि किस बात ने उन्हें अपना आपा खोने पर मजबूर किया।

    वहीं एयर इंडिया ने गायकवाड़ के खिलाफ दो एफआरआई भी दर्ज करवाई हैं जिनमें से एक फ्लाइट को 40 मिनट से भी ज्यादा समय तक विलंबित कराने की है वहीं दूसरी मारपीट की है। इसका बाद कंपनी ने गायकवाड़ को ब्लैकलिस्टेड कर दिया जिसके बाद वो अब कभी एयर इंडिया के किसी विमान में सफर नहीं कर पाएंगे।

    बता दें कि ओपन बिजनेस क्लास का टिकट होने के बावजूद इकॉनमी क्लास में बिठाए जाने से नाराज शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड़ ने गुरुवार को एयर इंडिया के एक 60 वर्षीय अधिकारी को अपने सैंडल से जमकर पीटा और उसकी शर्ट भी फाड़ दी। इतना ही नहीं गायकवाड़ ने बाद में इसे मानते हुए कहा कि उसने कहा कि यह सांसद कौन है और कहा कि वह मोदी से शिकायत करेगा।

    इसलिए मैंने उसे थप्पड़ मारा। मैंने अपने सैंडल से उसे 25 बार मारा। मैं शिवसेना का सदस्य हूं, भाजपा का नहीं जो इस तरह की बदतमीजी बर्दाश्त कर लूंगा। मैं माफी भी नहीं मांगूंगा। गायकवाड़ ने यह भी कहा कि उन्होंने इस घटना की शिकायत लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के पास दर्ज करा दी है।

    वहीं महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ गठबंधन सरकार चली रही भाजपा की ओर से भी कोई बयान नहीं आया है। साफतौर पर गायकवाड़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदा का नाम लिए जाने पर भड़क गए थे।








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  • रेलवे अब हर दो घंटे में देगा ट्रेन में ताजा भोजन

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    नई दिल्ली। ट्रेन में भोजन की गुणवत्ता और ज्यादा कीमत से जुड़ी शिकायतें आम हैं। रेलवे ने इस समस्या का समाधान ढूंढ़ लिया है। रेल मंत्री सुरेश प्रभु की मौजूदगी में हुई बैठक में यात्रियों को हर दो घंटे बाद ताजा बना भोजन मुहैया कराने का फैसला लिया गया है। इसके लिए देश भर के चयनित रेलवे स्टेशनों पर मुख्य रसोईघर (बेस किचन) बनाए जाएंगे।
    रेलवे प्रतिदिन तकरीबन 11 लाख यात्रियों को भोजन मुहैया कराता है। हाल में शुरू नई खानपान नीति के तहत भोजन पकाने और वितरण को अलग-अलग कर दिया गया है। सुरेश प्रभु ने कहा, "रेलवे ने यात्रियों को बेहतर गुणवत्ता वाला भोजन देने का फैसला किया है।
    इसके लिए कई जगहों पर बेस किचन बनाए जाएंगे, ताकि हर दो घंटे की यात्रा के बाद वहां से ताजा भोजन लिया जा सके। व्यापक विचार-विमर्श के बाद नई नीति तैयार की गई है। अब इसे बिना किसी बाधा के लागू करने के तौर-तरीकों पर चर्चा की गई है।"
    उन्होंने बताया कि खानपान से जुड़ी शिकायतों पर रेलवे तुरंत कार्रवाई करता है। उच्चस्तरीय बैठक में खाद्य उद्योग, स्वयं-सहायता समूहों, आइआरसीटीसी और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसमें शिरकत की। रेल मंत्री ने बताया कि बैठक में खाने की ज्यादा कीमत लेने पर भी चर्चा हुई।
    प्रभु ने रेलवे खानपान सेवा में निजी क्षेत्र को शामिल करने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न स्थानों पर पीपीपी मॉडल (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) के तहत बेस किचन स्थापित किए जाएंगे।
    इसमें अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि कम से कम लोगों कीजरूरत हो। उन्होंने बताया कि हवाई सेवा में भी अभी तक हर दो घंटे के बाद ताजा भोजन मुहैया कराने की व्यवस्था नहीं है।
  • PAK में हिंदू विवाह बिल बना कानून, नवाज शरीफ बोले- हिंदू भी हैं देशभक्त

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    इस्लामाबाद : पाकिस्तान में हिंदुओं की शादी से जुड़ा कानून पास हो गया है। राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने इसे मंजूरी दे दी है। इससे अब पाकिस्तान में रहने वाले मायनॉरिटी हिंदुओं की शादियों को कानूनी मंजूरी मिल सकेगी। सिंध प्रांत को छोड़कर पूरी पाकिस्तान पर लागू होने वाला पहला कानून है। सिंध का अलग मैरिज एक्ट है।
    प्रधानमंत्री दफ्तर की ओर से जारी बयान में बताया गया कि नवाज शरीफ की सलाह पर "हिंदू मैरिज एक्ट 2017" को प्रेसिडेंट ममनून हुसैन ने मंजूरी दी है। इस कानून का मकसद हिंदुओं की शादियों, उनके परिवारों, मांओं और बच्चों के हकों की हिफाजत करना है। बयान में यह भी कहा गया है कि ये कानून पाकिस्तान में रह रहे हिंदूओं की शादियों की रस्मों-रिवाजों को पूरा करने में मददगार होगा।
    प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा कि उनकी सरकार ने हमेशा ध्यान रखा है कि पाकिस्तान में रहने वाली मायनॉरिटी कम्युनिटीज को बराबरी का हक मिले। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदायों के लिए समान अधिकारों के प्रावधान पर हमेशा ध्यान दिया है। नवाज शरीफ ने कहा कि हिंदू उतने ही देशभक्त हैं, जितने अन्य हैं और उन्हें समान संरक्षण प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है।
  • इस बार आठ दिन का वासंतिक नवरात्र

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    भारतीय नववर्ष के प्रथम दिन से प्रारंभ होने वाला वासंतिक नवरात्र इस बार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा अर्थात 29 मार्च से प्रारंभ हो रहा है, जो पांच अप्रैल रामनवमी तक चलेगा। वासंतिक नवरात्र आठ दिन का होगा तथा द्वितीया तिथि की क्षय होगी।

    नवरात्र व्रत का पारन दशमी तिथि अर्थात उदया तिथि के अनुसार छह अप्रैल को किया जाएगा। नवरात्र नवमी तिथि पांच अप्रैल को दोपहर 12.51 बजे तक है। अतः हवन इसके पूर्व ही कर लेना चाहिए।

    श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर कार्यपालक समिति के सदस्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार इस बार बुधवार को मां जगदंबा का आगमन नौका पर हो रहा है जिसका फल सर्वकल्याण व मंगलकारी है।

    वहीं गमन भी बुधवार को हाथी पर हो रहा है। यह भी बड़ा ही शुभ है। अर्थात इस बार बारिश के अच्छे संकेत हैं। सब मिलाकर माता का आगमन व गमन दोनों बुधवार को हो रहा है, जो अतिशुभ योग है।

    ऐसा कम ही देखने को मिलता है। नवरात्र में घट स्थापन का मुहूर्त 29 मार्च को सुबह 5.30 बजे से 6.30 के मध्य श्रेयस्कर है। चूंकि इस बार के नवरात्र में प्रतिपदा तिथि सुबह 6.33 बजे तक ही है। इसके बाद अनुदया द्वितीया तिथि लग जाएगी। शास्त्रों के अनुसार घट स्थापना प्रतिपदा तिथि में ही होना चाहिए।
  • जाकिर नाइक पर शिकंजा: ED ने जब्त की संपत्ति, NIA ने जारी किया सम्मन

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    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विवादित इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक पर बड़ी कार्रवाई करते हुए धन शोधन (हवाला कारोबार) मामले में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) की संपत्ति जब्त कर ली है।
    ईडी ने जाकिर नाइक के संगठन आईआरएफ की करीब 18.37 करोड रुपये की संपत्ति जब्त की है। वहीं राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आज जाकिर नाइक को दूसरा नोटिस जारी कर आतंक रोधी कानून के तहत उनके खिलाफ दर्ज एक मामले में 30 मार्च को पेश होने को कहा।
    एजेंसी ने इससे पहले इसी महीने पहला सम्मन जारी करके उनसे 14 मार्च को पेश होने को कहा था। अधिकारियों ने कहा कि नाइक को यहां एनआईए के मुख्यालय में तलब किया गया है।
    नोटिस 51 वर्षीय नाइक के मुंबई स्थित आवास में भेजा गया। माना जाता है कि वह उनके क्रियाकलापों के जांच के दायरे में आने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए सउदी अरब में रह रहे हैं। आरोप है कि उन्होंने पिछले साल ढाका के एक कैफे में हुए हमले में कुछ आतंकवादियों को इस घटना के लिए प्रेरित किया था।
    पिछले साल नवंबर में एनआईए ने नाइक तथा उनके सहयोगियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। नाइक पर धर्म के आधार पर विभिन्न समुदायों के बीच कथित रूप से वैमनस्य बढ़ाने तथा सौहार्द का माहौल बिगाड़ने के आरोप में मामला दर्ज हुआ है। उन पर गैरकानूनी क्रियाकलाप रोकथाम कानून की धाराओं के तहत भी आरोप लगे हैं। प्राथमिकी में एनआईए ने आरोप लगाया है कि नाइक ने मुस्लिम युवकों को गैरकानूनी एवं आतंकवादी कत्य करने के लिए प्रेरित किया।
  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए संजीवनी से कम नहीं मेक इन इंडिया

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    ज्यादातर लोगों को ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महत्वाकांक्षी कैंपेन 'मेक इन इंडिया' बड़े भारतीय उद्यमों और वैश्विक कंपनियों के लिए ही मददगार साबित हो रहा है। हालांकि ऐसा बिल्कु़ल नहीं है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए भी 'मेक इन इंडिया' कैंपेन काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। पिछले दो सालों में ‘मेक इन इंडिया’ ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का कायाकल्प करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    हम भारत को आकार, प्रोद्यौगिकी के स्तर, उत्पादों की विभिन्नता और सेवा के लिहाज से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों में विभाजित करते हैं। ये जमीनी ग्रामोद्योग से शुरू होकर ऑटो कल-पुर्जे के उत्पाद, माइक्रो-प्रोसेसर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और विद्युत चिकित्सा उपकरणों तक फैला हुआ है। आमतौर पर बड़े उद्योग बड़े पैमाने पर निवेश लाते हैं, लेकिन वे अक्सर कल-पुर्जों और सहायक कामों के लिए लघु और मध्यम उद्योगों पर निर्भर होते हैं। इस तरह से बड़े उद्यमों की रीढ़ माने जाने वाले इन उद्यमों में विकेन्द्रित निवेश उतना ही महत्वपूर्ण है। इसीलिए 'मेक इन इंडिया' कैंपेन के तहत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को आगे बढ़ाने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं।

    हर उद्यम के लिए वित्त किसी शरीर में दौड़ने वाले खून की तरह होता है। अगर इसकी कमी होती है, तो उद्यम की सेहत खराब हो जाती है। सरकार ने इस बात को समझा है। इसलिए ‘मेक इन इंडिया’ कैंपेन के तहत इन उद्योग के लिए आसान कर्ज उपलब्ध कराने के लिए इंडिया एस्पायरेशन फंड (आईएएफ), साफ्ट लोन फंड फॉर माइक्रो, स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेस (एसएमआईएलई) आदि की शुरुआत की गई। प्रौद्योगिकी अधिग्रहण एवं विकास कोष का आरंभ नंवबर 2016 में किया गया, पारम्परिक उद्योगों के पुनर्सृजन के लिए निधि की योजना (एसएफयूआरटीआई) शुरू की गई। इनका मकसद आसान शर्तों पर कर्ज उपलब्ध कराना है। इनके अलावा माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट बैंक एंड रिफाइनेंस एजेंसी (एमयूडीआरए) की पहल भी इन उद्यमों के लिए काफी लाभकारी साबित हुई है।

    मेक इन इंडिया कैंपेन भारतीय कंपनियों के साथ-साथ वैश्विक कंपनियों को विनिर्माण क्षेत्र में निवेश और साझेदारी के लिए प्रोत्साहित करता है। यह एक अच्छी अवधारणा है जो भारत के लघु उद्योगों के लिए सबसे अधिक प्रासंगिक है। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान बहुराष्ट्रीय कंपनियों को निवेश और अपने उपक्रम स्थापित करने तथा कोष बनाने के लिए आकर्षित करता है। इससे उत्पादों और सेवाओं की विभिन्नता, विपणन नेटवर्क और तेजी से विकसित करने की क्षमता के लिहाज से सूक्ष्म, लघु और मध्यम आकार के उद्यमों को काफी फायदा होगा।

    सूक्ष्म, लघु और मध्यम आकार के उद्यमों के कारोबार को आसान बनाने के लिए आसान कर प्रणाली बनाई गई। 22 इनपुट या कच्चे माल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी ने विभिन्न क्षेत्रों में विनिर्माण लागत में कमी आई। इससे उद्यमों को अपना दायरा बढ़ाने में मदद मिल रही है। वस्तुओं के निर्यात और आयात के लिए जरूरी दस्तावेजों को घटाकर तीन कर दिया गया। भारत सरकार की 14 सेवाएं ई-बिज़ के ऑनलाइन सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से मिलने लगीं। औद्योगिक लाइसेंस की वैधता बढ़ाकर तीन वर्ष की गई। रक्षा उत्पादों के प्रमुख कंपोनेंट्स की सूची को औद्योगिक लाइसेंस से अलग किया गया। नए बिजली कनेक्शन के लिए एनओसी/सहमति की जरूरत को खत्म कर दिया गया। 50 करोड़ रुपये तक का वार्षिक कारोबार करने वाली छोटी कंपनियों के लिए इनकम टैक्स घटाकर 25% किया गया है, ताकि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम कंपनियों को अधिक व्यवहार्य बनाने तथा फर्मों को कंपनी प्रारूप में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

    आंकड़े बताते हैं कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम आकार के उद्यमों का पिछले कुछ वर्षों में काफी विकास हुआ है, जिसका असर देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर भी देखने को मिला है। छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान 10 प्रतिशत से ज्यादा विकास दर दर्ज कराई है। इस क्षेत्र ने देश की जीडीपी में 38 फीसदी का योगदान दिया है। इसमें विनिर्मित उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 45 फीसदी है, जबकि इसका निर्यात 40 फीसदी रहा है। इस क्षेत्र ने 11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मुहैया कराएं हैं। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम 8,000 हजार से ज्यादा उत्पाद का उत्पादन करते हैं।

    सीआईआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 तक भारत की जीडीपी में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का योगदान लगभग 50 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है। यह सूक्ष्म, लघु और मध्यम आकार के उद्यमों के लिए मेक इन इंडिया कैंपेन के तहत दी जा रही सहूलियतों का ही परिणाम होगा।


  • वोडाफोन- आइडिया विलय 2 साल में होगा पूरा, कुमार मंगलम बिड़ला को नई कंपनी की कमान-

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    नई दिल्ली: सोमवार को ब्रिटेन के टेलिकॉम ऑपरेटर वोडाफोन ग्रुप और आदित्य बिड़ला ग्रुप के आइडिया सेल्युलर ने अपनी भारतीय इकाइयों के विलय की घोषणा कर दी. इसी के साथ यह देश का सबसे बड़ा टेलिकॉम ऑपरेटर बन गया. दरअसल, मुकेश अंबानी के जियो 4जी के तहत मुफ्त पेशकश और फिर अग्रेसिव टैरिफ प्लान के चलते टेलिकॉम क्षेत्र में पैदा हुई जबरदस्त प्रतिस्पर्धा के बीच यह मर्जर महत्वपूर्ण बन पड़ा है. अब देखना यह है कि नई कंपनी इस कॉम्पिटशन में किस पायदान पर रहती है.
    आइए इस विलय से जुड़ी 10 महत्वपूर्ण बातें एक नजर में जानें
    आदित्य बिड़ला समूह के अध्यक्ष कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि मर्जर के बाद कोई खास बड़े स्तर पर लोगों को हटाए जाने का फैसला लेने की कोई योजना फिलहाल नहीं है.
    न्यूज एजेंसी एएनआई के ट्वीट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि वह नई कंपनी के चेयरपर्सन बनकर खुश हैं और बेहद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं.
    वोडाफोन समूह के सीईओ विट्टोरियो कोलाओ ने कहा- वोडाफोन इंडिया और आइडिया के विलय से डिजिटल इंडिया का एक नया चैम्पियन तैयार होगा. यह विलय दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और पूरे भारत के गांवों, शहरों और कस्बों में विश्वस्तरीय 4जी नेटवर्क लाने के ध्येय से किया गया है.
    कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा- हमें अब तक समर्थन देने वाले आइडिया के शेयरहोल्डर्स और कर्जदाताओं के लिए यह विलय बेहद फायदे का सौदा साबित होगा. आइडिया और वोडाफोन साथ मिलकर एक बेहद महत्वपूर्ण कंपनी बनाएंगे.
    आइडिया ने एक बयान में कहा कि वोडाफोन के पास संयुक्त कंपनी की 45.1 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी. जबकि, आइडिया के पास 54.9 फीसदी हिस्सेदारी रहेगी. बयान के मुताबिक- आदित्य बिड़ला समूह के पास इस विलय के बाद 26 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी और उसे समय के साथ हिस्सेदारी बराबर करने के लिए वोडाफोन से और अधिक शेयर लेने का अधिकार होगा.
    दोनों कंपनियों के विलय की प्रक्रिया पूरी होने में दो साल का वक्त लगेगा. विलय के इस अग्रीमेंट में वोडाफोन का इंडस टावर्स में 42 फीसदी की हिस्सेदारी शामिल नहीं है.
    एक संयुक्त बयान में कहा गया कि मर्जर के बाद 4 करोड़ यूजर बेस और टेलिकॉम मार्केट का 35 फीसदी तथा 41 फीसदी रेवेन्यू शेयर इनके हिस्से में आएगा.
    आइडिया के प्रमोटर्स के पास एकाधिकार होगा कि वह किसे चेयरपर्सन नियुक्त करते हैं. हालांकि सीईओ और सीओओ की नियुक्ति को लेकर दोनों प्रमोटर मिल कर फैसला लेंगे और दोनों की ही सहमति इसके लिए आवश्यक होगी.
    आइडिया सेल्युलर ने सोमवार को बयान में कहा कि उसके निदेशक मंडल ने 'वोडाफोन इंडिया लिमिटेड और उसके पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी वोडाफोन मोबाइल सर्विस लिमिटेड के कंपनी (आइडिया) के साथ विलय को मंजूरी दे दी है. विलय के ऐलान के बाद आइडिया के शेयरों में जोरदार उछाल देखा गया. इसके बाद इसके शेयरों में 5 फीसदी तेजी देखी गई.
    सितंबर में अंबानी के 4जी जियो सिम के आने के बाद रिलायंस द्वारा दी गईं तमाम मुफ्त सुविधाओं के चलते जहां जियो का यूजर बेस करोड़ का आंकड़ा पार गया वहीं दूसरी टेलिकॉम कंपनियों में हलचल मच गई. जियो के दबाव में आकर वोडाफोन, एयरटेल ही नहीं बल्कि सार्वजनिक उपक्रम बीएसएनएल को भी कम कीमत वाले टैरिफ प्लान्स पेश करने पड़े.
  • शक्ति परीक्षण में बीरेन सिंह पास, विधानसभा ने ध्वनिमत से दी विश्वास प्रस्ताव को मंजूरी

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    इंफाल। मणिपुर में मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह सरकार ने सोमवार को विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर दिया। विश्वास प्रस्ताव पर मत विभाजन की नौबत नहीं आई और इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
    60 सदस्यों वाली विधानसभा में भाजपा के 21 और कांग्रेस के 28 विधायक हैं। लेकिन, नगा पीपुल्स फ्रंट, नेशनल पीपुल्स पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी और तृणमूल कांग्रेस से हाथ मिलाकर भाजपा सरकार बनाने में कामयाब हो गई।
    बीरेन सिंह सरकार को एक निर्दलीय और एक कांग्रेस विधायक का भी समर्थन हासिल है। कांग्रेस से बगावत कर बीरेन सिंह का समर्थन करने वाले टी श्यामकुमार को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। भाजपा के सूत्रों ने बताया कि शक्ति परीक्षण में पास होने के बाद जल्द ही मंत्रियों को विभागों का बंटवारा कर दिया जाएगा।

    इस बीच, सरकार को समर्थन के सवाल पर तृणमूल कांग्रेस का मतभेद उजागर हो गया है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का कहना है कि विधायक टी रोबींद्रो सिंह ने उससे परामर्श किए बगैर ही सरकार को समर्थन दे दिया है।

    दूसरी तरफ, रोबींद्रो सिंह का कहना है कि उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व से सलाह करने के बाद ही सरकार को समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि यदि उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश का उल्लंघन किया होता, तो उसके खिलाफ अनुशासन की कार्रवाई की जाती।
    राजनाथ सिंह ने दी बधाईगृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बीरेन सिंह को विधानसभा में सरकार का बहुमत साबित करने पर बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट किया, "मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह को विधानसभा में बहुमत साबित करने पर बधाई। मुझे उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में मणिपुर विकास के पथ पर अग्रसर होगा।"
    खेमचंद चुने गए विस अध्यक्षभाजपा के युमनाम खेमचंद को सोमवार को मणिपुर विधानसभा का नया अध्यक्ष चुना गया। खेमचंद (54) जाने-माने ताइक्वांडो विशेषज्ञ हैं और वह पहली बार सींगजामेई विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए हैं। बीरेन सिंह सरकार द्वारा सदन में शक्ति परीक्षण से पहले खेमचंद को ध्वनिमत से विधानसभा अध्यक्ष चुना गया।
  • How girls act when nobody is watching

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  • बढ़ाएं अपने 3जी कनेक्शन की स्पीड

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    कई कारणों के चलते हमें इंटरनेट पर मन मुताबिक स्पीड नहीं मिल पाती है। जबकि हम 3जी या 4जी डेटा यूज कर रहे होते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि आप कैसे अपने इंटरनेट की स्पीड बढ़ा सकते हैं।
    वैसे तो हम सर्च के लिए कई ब्राउजर का इस्तेमाल करते हैं लेकिन गूगल का क्रोम एंड्रॉएड के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। सभी के फोन में अब ये ब्राउजर इनबिलट होता है और यह डिफॉल्ट ब्राउजर भी माना जाता है। अगर आप इसकी सेटिंग में जाकर कुछ बदलाव करे तो आप बहुत सारे डाटा के साथ साथ इंटरनेट की ब्राउजिंग स्पीड भी बढा सकते हैं।
    लगातार अपने एप का cache क्लियर करते रहे। cache क्लियर न होने से इंटरनेट कि स्पीड स्लो हो जाती है, इसलिए इसे हमेशा क्लियर करते रहे। इसे डिलीट करने के लिए सेटिंग में जाए, ऐप को चुनकर क्लियर cache बटन को क्लिक करे।

    इंटरनेट कि स्पीड बढ़ाने के लिए आप थर्ड-पार्टी एप को अनइंस्टॉल करें। इन एप के चलते कई बार मोबाइल पर इंटरनेट की स्पीड स्लो हो जाती है। ये ज्यादातर कस्टम फीचर को हटा देते है इसलिए इसे अनइंस्टॉल कर दें।

    ब्राउजर को हमेशा टेक्स्ट सर्च मोड पर रखें। इससे अनावश्यक रुप से पेज में होने वाली इमेज नहीं खुलेंगी। गूगल प्ले स्टोर पर मिलने वाले एप सामान्य रूप से इस फीचर को सपोर्ट नहीं करते हैं। लेकिन आप इसको आसानी से सेटिंग्स मेन्यू में प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन जब आप ऐसा करते हैं इससे इमेज अनावश्यक रूप से लोड नहीं होगी। इससे आपकी इंटरनेट स्पी़ड में इजाफा हो जाएगा।
  • सरकारी महकमे बेकार के मुकदमे वापस लें या जल्द निपटाएं: केंद्र

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    नई दिल्ली। अदालतें मुकदमों के बोझ से कराह रही हैं। लंबित तीन करोड़ से ज्यादा मुकदमों में करीब आधे सरकारी हैं। लेकिन अब सरकार ने न्याय को रफ्तार देने और अदालतों से सरकारी मुकदमों का बोझ घटाने के लिए कमर कस ली है। कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने सभी मंत्रालयों और राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख कर कहा है कि वे सरकारी मुकदमों की समीक्षा करें और लंबित मुकदमों को निपटाने के लिए विशेष अभियान चलाएं। गैर जरूरी मुकदमों को चिन्हित कर या तो वापस लिया जाए या फिर उनका जल्दी निपटारा कराया जाए। इतना ही नहीं सभी राज्य और मंत्रालय इस बारे में कानून मंत्रालय को तिमाही रिपोर्ट भेजेंगे जिसमें बताया जाएगा कि कितने मुकदमें वापस लिए गये, कितने में सुलह हुई और कितने निपटाए गए।

    कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने अपने सभी कैबिनेट सहयोगियों और सभी राज्यों को मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख कर अदालतों में मुकदमों के बोझ और सरकार के सबसे बड़े मुकदमेंदार होने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सरकार को बेवजह की मुकदमेंबाजी से बचना चाहिए। क्योंकि देश भर की अदालतों में करीब 3.14 करोड़ मुकदमें लंबित हैं जिसमें से 46 फीसद सरकार के हैं।

    न्यायपालिका का ज्यादातर वक्त सरकार के मुकदमों में ही चला जाता है। न्यायपालिका का बोझ तभी घट सकता है जबकि मुकदमें सोच विचार कर दाखिल किये जायें। लंबित मुकदमों को निपटाने के लिए तत्काल उपाय करने की जरूरत है। प्रसाद ने मंत्रालयों और सरकारी विभागों से कहा है कि वे प्राथमिकता के आधार पर लंबित मुकदमों की समीक्षा करें और उनके जल्द निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाएं। मुकदमों की समीक्षा करते समय मुकदमा जारी रखने में आने वाले खर्च, लगने वाले समय और याचिकाकर्ता को मिलने वाली राहत के पहलू को भी ध्यान में रखा जाए।

    प्रसाद ने कहा कि वे जानते हैं कि हर मंत्रालय के पास विवाद और मुकदमों से निपटने का एक तंत्र होता है लेकिन अब इसे और प्रभावी बनाने की जरूरत है ताकि अदालतों से मुकदमों का बोझ घटे। प्रत्येक मामले में मुकदमा दाखिल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञों के साथ विचार विमर्श होना चाहिए। सरकार को बाध्यकारी मुकदमेंबाजी बंद करनी चाहिए। कोई भी मुकदमा दाखिल करने से पहले उसे सक्षम अथारिटी के सामने पेश किया जाना चाहिए। जो ये देखेगी कि क्या मुकदमें को टाला जा सकता है। अगर नहीं टाला जा सकता तो विवाद के वैकल्पिक निपटारे जैसे मध्यस्थता आदि पर विचार किया जायेगा। सरकारी विभागों के बीच मुकदमेंबाजी हतोत्साहित होनी चाहिए, बहुत जरूरी होने पर अंतिम उपाय के तौर पर ही मुकदमा किया जाये।

    सरकार के वकील द्वारा बार बार अदालती कार्यवाही में स्थगन लेना और बाधा डालने को गंभीरता से लिया जाये। पत्र में कहा गया है कि सभी मंत्रालय और विभाग मुकदमों की संख्या घटाने के लिए कार्य योजना बनाएंगे और लंबित मुकदमों को कम करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए विशेष अभियान चलाएंगे। प्रत्येक मंत्रालय और विभाग मुकदमों की संख्या घटने के बारे में तिमाही रिपोर्ट देखा। प्रसाद ने इस पर जल्दी से जल्दी अमल करने का आग्रह किया है। कानून मंत्री ने न्याय विभाग के सचिव को निर्देश दिया है कि वह मंत्रालयों के साथ नियमित बैठक कर इसकी समीक्षा करेंगे।
  • भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच योगी आदित्यनाथ लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ

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    लखनऊ (जेएनएन)। मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ का नाम तय होने के बाद भाजपा सरकार का शपथ ग्रहण समारोह रविवार को होगा। इसके लिए भारी सुरक्षा व्यवस्था के लिए सात एसपी और 24 एएसपी समेत 34 कंपनी फोर्स समेत पुलिस का जबरदस्त अमला तैनात रहेगा। नए मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ कांशीराम स्मृति उपवन में अपराह्न 2.15 बजे शपथ लेंगे। उनकी सुरक्षा योजना तय है। मुख्यमंत्री बुलेट प्रूफ कार में आएंगे। मंत्रियों के लिए स्कोर्ट वाहन, शैडो और गनर के लिए डीजीपी को हिदायत दी गयी है।
    अतिथियों के लिए श्रेणीवार दीर्घा बनाई गई है। हर निमंत्रण पत्र में शपथ ग्रहण स्थल के किस दीर्घा में स्थान ग्रहण किया जाना लिखा है। मुख्यमंत्री, मंत्री के लिए अलग दीर्घा और उनके परिवार और रिश्तेदारों के बैठने के लिए अलग श्रेणी की व्यवस्था होगी। शासन स्तर पर इस आयोजन को भव्य रूप देने के लिए तैयारी पूरी हो गई है। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, कई केंद्रीय मंत्री, दर्जन भर राज्यों के मुख्यमंत्री, उद्योगपतियों समेत अति विशिष्ट अतिथियों के आने के संकेत मिले हैं। राजभवन की ओर से मानक सूची के अनुसार विशिष्ट अतिथियों को निमंत्रण पत्र निर्गत होंगे। मनोनीत मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों के रिश्तेदारों, मित्रों एवं अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं के लिए भी आमंत्रण पत्र जाएंगे।
    भारी सुरक्षा व्यवस्था
    प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को देखते एसपीजी की टीम लखनऊ में है। एडीजी दलजीत सिंह चौधरी के मुताबिक सुरक्षा के लिए सात पुलिस अधीक्षक, 24 अपर पुलिस अधीक्षक, 50 उपाधीक्षक, 550 दारोगा-इंस्पेक्टर, 3370 सिपाही, 18 कंपनी केंद्रीय अद्र्धसैनिक बल, 16 कंपनी पीएसी और 500 यातायात पुलिसकर्मी लगाए गये हैं। शपथ ग्रहण समारोह स्थल पर भव्य मंच और पंडाल लगेगा। डीएम और एसएसपी को सोफे, कुर्सियों, माइक, पंखों के अलावा बैरीकेडिंग, वाटर प्रूफ शामियाने की व्यवस्था के निर्देश दिए गये हैं। समारोह स्थल पर वीवीआइपी श्रेणी के लिए निर्धारित दीर्घा के अलावा 70 हजार कुर्सियों की व्यवस्था के निर्देश दिए गये हैं। समारोह स्थल पर कई प्रवेश द्वार बनाये जाएंगे। शपथ ग्रहण समारोह स्थल पर राष्ट्रीय गान होगा। इसके लिए पीएसी बैंड को अधिकृत किया गया है। जिम्मेदारी एसएसपी को दी गयी है।
    सुरक्षा और यातायात
    सुबह डीजीपी जावीद अहमद, एडीजी सुरक्षा भवेश कुमार सिंह, एडीजी कानून-व्यवस्था दलजीत सिंह चौधरी और आइजी जोन लखनऊ ए. सतीश गणेश आदि ने सुरक्षा और यातायात की तैयारियां देखीं। इसके बाद मुख्य सचिव राहुल भटनागर, प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पंडा और डीजीपी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण स्थल और सुरक्षा इंतजाम को अंतिम रूप दिया । आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के कारण स्मृति उपवन का चयन किया गया है। पुलिस प्रवक्ता, आइजी एसटीएफ रामकुमार ने बताया कि अभी प्रधानमंत्री का मिनट टू मिनट कार्यक्रम नहीं आया है लेकिन, उनका आना तय है। एडीजी सुरक्षा और आइजी जोन को कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गयी है। हाल में आइएस खुरासान माड्यूल की गतिविधि को देखते हुए व्यापक तैयारी की गयी है। स्थल निरीक्षण लगातार होगा। वीवीआइ दीर्घा में जाने वाले हर व्यक्ति पर नजर रहेगी। खासतौर पर पूरे समारोह में संदिग्धों पर नजर रखी जाएगी।
  • कभी आजमगढ़ में योगी आदित्यनाथ पर हुआ था जानलेवा हमला

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    आजमगढ़. यूपी में सीएम के प्रबल दावेदार माने जा रहे योगी आदित्‍यनाथ का आजमगढ़ से गहरा नाता रहा है। यहीं नहीं यहां के छोटे-छोटे मामलों में इनका हस्‍तक्षेप रहा है। चाहे वह दो दशक पूर्व पुजारी हत्‍याकांड रहा हो या फिर 2003 में शिब्‍ली कालेज के छात्र नेता की हत्‍या योगी हमेशा ही न्‍याय की लड़ाई में अगली पंक्ति में खड़े नजर आये। वर्ष 2008 में योगी पर शहर में जानलेवा हमला भी हुआ लेकिन वे डटे रहे। उनके रेस में आगे निकलने से समर्थक जहां फूले नहीं समां रहे हैं वहीं एक तबका ऐसा भी है जो इनके सीएम की कुर्सी पर बैठने को लेकर चिंतित भी है।


    योगी पहली बार वर्ष 1989-90 में पहली बार योगी आदित्‍यनाथ आजमगढ़ के चितारा महमूदपुर पहुंचे थे। यहां एक पु‍जारी की हत्‍या के बाद योगी ने उनके लोगों को न्‍याय दिलाने के लिए प्रशासन से लोहा लिया। इसके बाद वर्ष 2003 में शिब्‍ली कालेज के छात्र संघ चुनाव के दौरान छात्र नेता अजीत की हत्‍या कर दी गयी थी। उस समय भी योगी आदित्‍यनाथ अजीत के परिजनों को न्‍याय दिलाने के लिए आजमगढ़ पहुंचे थे। यह अलग बात है कि उस समय तत्‍कालीन डीएम और एसपी ने उन्‍हें शहर में नहीं आने दिया था न्‍याय का भरोसा देकर बाईपास से ही लौटा दिए थे।


    इसके बाद 7 सितंबर 2008 को योगी आदित्‍यनाथ आजमगढ़ के डीएवी मैदान में एक सभा को संबोंधित करने आ रहे थे कि शहर कोतवाली क्षेत्र के तकिया मोहल्‍ले में उनपर जानलेवा हमला हुआ था। इस दौरान योगी समर्थकों द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में मनीउल्लाह नामक 18 वर्षीय युवक की मौत हो गयी थी। इस मामले में योगी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। इस घटना ने जिले में दंगे का रूप ले लिया था। जीयनपुर मठधीस सहित कई लोगों पर हमला हुआ तो कई स्‍थानों पर तोड़फोड भी हुई थी। लापरवाही में एसपी विजय गर्ग को निलंबित किया गया था।
  • सीओ आफिस में सुलह समझौते को पहुंचे प्रधानपति को पीटा, भूमि विवाद व चुनावी रंजिश का आरोप

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    दर्ज हुआ मुकदमा, पर सी.ओ. को नहीं जानकारी।
    मारपीट का असली कारण "चुनावी रंजिश - (प्रधानपति-सुबहान)
    कानून के अनुसार होगी कार्यवाही -कोतवाल
     आज़मगढ़। समाधान के लिए, सी.ओ. सगड़ी  सोहराब आलम के बुलावे पर, उन्ही के कार्यालय में आए प्रधान पति को विपक्षियों ने मारपीट कर घायल कर दिया। 
    जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के अंजान शहीद गांव के फकरे आलम व मौलाना फुरकान के बीच, एक जमीन को लेकर काफी दिनों से विवाद चल रहा था। उसी के चलते विगत14 मार्च को फकरे आलम को विपक्षियो के कुछ लोगो ने मारपीट कर घायल कर दिया था। उस सम्बंध में फकरे आलम ने जीयनपुर कोतवाली में एक तहरीर दी थी । विवाद के निस्तारण हेतु, वृहस्पति बार को सी.ओ. सगड़ी- सोहराब आलम ने गांव के प्रधान- श्रीमती सना खान के पति शुबहान s/o एहसान अहमद के मध्यस्थता में दोनों पक्षो को 17 मार्च को अपने कार्यालय में बुलाया, ताकि दोनों पक्षो को सुनने के बाद कोई समाधान निकल सकें। इसी निमित्व आज प्रधान पति शुबहान ने वादी फकरे आलम s/o यासीन के साथ सायं तीन बजे से सी.ओ. सगड़ी के कार्यालय में इंतजार करते रहे थे। लगभग सायं तीन बज कर बीस मिनट पर विपक्षी अपने समर्थकों के साथ सी.ओ. के कार्यालय मे पहुंचे और प्रधानपति सुबहान के साथ हाथा-पाई करने लगे। हाथा पाई-  मार-पीट में बदल गयी । जिस से प्रधान पति सुबहान व उन के साथियो को काफी चोटे आयी। यह देख कर- दफ्तर के पुलिसकर्मी पहले तो भाग खड़े हुए, बाद में आ कर किसी तरह बीच बचाव कर मामले को शांत कराया।
    मार-पीट के बाद दबंग भाग गए। और प्रधानपति काफी देर तक सीओ दफ्तर में बैठे रहे। लगभग सायं चार बज कर तीस मिनट पर- जीयनपुर कोतवाल संजय वर्मा घटना स्थल पर पहुंचे और प्रधानपति व उन के घायल साथियो को थाने पर ले गए। इस संदर्भ में प्रधानपति सुबहान ने आमिर उर्फ़ गुड्डू पुत्र अब्दुलहई, फुरकान पुत्र बदरुद्दीन, नवाजिश पुत्र आरिफ, अशरफ पुत्र इस्लाक,  नदीम पुत्र शमीम, इस्माइल पुत्र सुलेमान, नौशाद पुत्र सज्जाद, तालीब पुत्र इसरार के खिलाफ मारपीट करने और धमकी देने की तहरीर दिया । इस संदर्भ में पूछे जाने पर- प्रधानपति सुबहान ने कहा कि-- गांव के विपक्षी लोग चुनावी रंजिश को लेकर, हमारे साथ मारपीट किये हैं। सी.ओ. सगड़ी- सोहराब आलम से फोन पर संपर्क करने पर कहा कि- उनको घटना की जानकारी नहीं है। जीयनपुर कोतवाल संजय वर्मा ने कहा कि-- तहरीर मिल गई है, और दबंगों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। तहरीर के मुताविक, धारा- 147,148/ 308/ 395/ 504/506 आई.पी.सी. के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया हैं ।
  • एक्ट्रेस जैसी सुंदर इस लेडी अफसर के हाथों पर नाचती है एके-47

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    भोपाल। आंखों पर धूप का चश्मा और सामान्य कपड़ों में राजधानी की सड़कों पर इस महिला अफसर को देख एकबारगी आप धोखा खा सकते हैं। ब्यूटी किसी एक्ट्रेस से कम नहीं और चुस्ती-फुर्ती चीते जैसी। इरादे एकदम लोहे जैसा सख्त। इनकी अंगुलियां एके-47 पर वैसे ही थिरकती हैं, जैसे गिटार पर बजाने वाले के। किसी भी गफलत में फंसे तो निपटाने में टाइम बिल्कुल ही नहीं लगेगा। नाम है- संजुक्ता पारासोर।
    फिलहाल ये एनआइए की ऑफिसर हैं और भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन ब्लास्ट की जांच करने गुरवार को ही यहां आई हुई हैं। इस सिलसिले में उन्होंने कई बैठकें की और तथ्यों की जानकारी अफसरों से ली। साथ ही अपनी सूचनाओं पर भी चर्चा की। उनके यहां आने के पहले ही पुलिस महकमे में उनकी चर्चा चल रही थी।
    संजुक्ता पाराशर अभी एनआइए में पोस्टेड हैं और एसपी के पद पर हैं। वे असम की पहली महिला आइपीएस अफसर भी हैं, जिन्होंने असम के शोणितपुर में कमाल का काम किया है। आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में उन्होंने तब सीआरपीए के साथ एके-47 थामा था और कहर बन कर टूटी थीं।
    वर्ष 2015 में संजुक्ता ने बोडो आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाया था, जिसमें सीआरपीएफ के साथ मिलकर टीम को लीड किया था। महज 15 माह में ही 16 उग्रवादियों को मार गिराया था। लगभग 70 आतंकियों को जिंदा पकड़ा था, जिनसे बाद में अहम सूचनाएं मिली थीं। 2013 से लेकर 2015 तक इस लेडी अफसर ने सैकड़ों आतंकियों को पकड़ा था। उनकी उच्च शिक्षा दिल्ली के जेएनयू और इंडोनेशिया में हुई है। उनके पति भी आइएएस ऑफिसर हैं। 2008 में उनको पहली पोस्टिंग मिली थी।

  • भारत पर हमलों की तैयारी में थे आतंकी, तभी हमने LoC पार सर्जिकल स्ट्राइक की: सरकार

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    नई दिल्ली. PoK में टेररिस्ट भारत में हमले के लिए तैयार बैठे थे, इस बात के पुख्ता सबूत मिलने के बाद इंडियन आर्मी ने LoC पार सर्जिकल स्ट्राइक की। केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे ने शुक्रवार को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत के पास इन हमलों के बारे में स्पेसिफिक इंटेलिजेंस इनपुट था। उन्होंने कहा, "सर्जिकल स्ट्राइक को बखूबी अंजाम दिया गया। इस ऑपरेशन में सभी दुश्मन टारगेट खत्म कर दिए गए। हमारे जवानों को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचा।' बता दें कि 18 सितंबर 2016 को हुए उड़ी अटैक के 10 दिन बाद 28 और 29 सितंबर की दरमियानी रात इंडियन आर्मी ने LoC पारकर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। इसमें 40 से ज्यादा टेररिस्ट सेना ने मार गिराए थे।
     सुभाष भामरे ने कहा, "हम हमेशा ही अपने पड़ोिसयों के साथ शांति चाहते हैं। लेकिन, पिछले कई सालों से हमें जबरन क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म, प्रॉक्सी वार में घसीटा गया। हमारी सेनाएं बाहरी और अंदरूनी खतरों से देश की रक्षा करने के लिए तैयार हैं।"
     भामरे बोले, "इंडिया आर्मी दुनिया की शानदार सेनाओं में से एक है। हमारी आर्मी किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान भी आर्मी ने क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म का सामना किया।"
  • यूपी चुनाव जीतने के लिए बड़ी राजनीतिक पार्टियों ने खर्च किए 5500 करोड़

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    नई दिल्‍ली। यूपी चुनाव तो भाजपा ने जीत लिया है और अब सरकार बनाने जा रही है। नाक का सवाल बने राज्य के इस चुनाव में हर पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी और कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। पैसा भी पानी की तरह बहाया गया। दावा है कि विधानसभा चुनाव में अलग-अलग राजनीतिक दलों ने कुल 5500 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

    इस खर्च में नोट फॉर वोट के लिए करीब 1,000 करोड़ रुपये का खर्च शामिल है। इसके अलावा एक तिहाई मतदाताओं ने शराब के लिए कैश के ऑफर की बात भी स्‍वीकार की है।

    बता दें कि भारतीय चुनाव आयोग ने कैंपेन खर्च के लिए 25 लाख रुपये प्रति उम्‍मीदवार की अनुमति दी थी लेकिन सूत्रों से पता चला कि अधिकतर उम्‍मीदवारों ने इससे कहीं अधिक खर्च किया। कैंपेन के लिए पार्टियों ने पारंपरिक और गैर-पारंपरिक गतिविधियां का सहारा लिया।

    वाइड स्‍क्रीन प्रोजेक्‍शन समेत प्रिंट व इलेक्‍ट्रॉनिक मटीरियल, वीडियो वैन आदि पर ही 600 से 900 करोड़ का खर्च है। उत्‍तर प्रदेश में कुछ अभियानों के तहत डोर टू डोर, रैली, यात्रा, सोशल मीडिया, टेलीविजन के जरिए विज्ञानपन, अखबार, मोटर साइकिल रैली, लंगर, सेलिब्रिटी शोज और मल्‍टी स्‍क्रीन प्रोजेक्‍शन शामिल हैं।

    अध्‍ययन से पता चला कि नोटबंदी के बावजूद इसबार चुनाव का खर्च और बढ़ गया। दो तिहाई मतदाताओं के अनुसार इस बार उम्‍मीदवारों ने पहले से कहीं अधिक खर्च किया है।
  • यूपीः 19 मार्च को स्मृति उपवन में होगी शपथ, सिन्हा बोले-मैं सीएम की रेस में नहीं

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    नई दिल्ली। यूपी में रिकॉर्ड तोड़ जीत के बाद अब राज्य में भाजपा सरकार बनाने की तैयारी में है लेकिन अब तक राज्य के मुख्यमंत्री का नाम तय नहीं हुआ है। इस बीच सूत्रों के हवाले से खबर है कि इस रेस में केंद्रीय संचार मंत्री मनोज सिन्हा का नाम सबसे आगे निकल गया है। बता दें कि सिन्हा मोदी और शाह के करीबी हैं और उनका काम भी अच्छा है।

    वैसे इस मामले पर सवाल पूछे जाने पर मनोज सिन्हा ने कहा कि मैं किसी रेस में नहीं हूं और मुझे इस तरह की किसी रेस की जानकारी भी नहीं है।

    हालांकि इस रेस में केशव प्रसाद मौर्य और योगी आदित्यनाथ के अलावा गृह मंत्री राजनाथ सिंह का नाम भी है। इस बीच केशव प्रसाद मौर्य ने इसकी पुष्ट करते हुए कहा है कि राज्य के सीएम के लिए मैंने अपना भी नाम दिया है। अंतिम फैसला शनिवार को हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सीएम का नाम चुने जाने के बाद 19 तारीख को ही स्मृति उपवन में शपथ ग्रहण समारोह भी होगा।

    बाताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम के लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई है। इस शपथ ग्रहण समारोह में कई बड़े नेता शामिल होंगे।

    जानकारी के अनुसार शनिवार को लखनऊ में भाजपा विधायक दल की बैठक है और इसमें मौर्य सीएम के नाम का प्रस्ताव रखेंगे जिस पर पर्यवेक्षक बनकर यूपी गए वैंकेया नायडू और भूपेंद्र यादव विधायकों से इसकी सहमति लेंगे। सहमति के बाद नाम को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पास भेजेंगे और वो ही इसकी घोषणा करेंगे।
  • उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सिंह रावत होंगे नए मुख्यमंत्री

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    नई दिल्ली। त्रिवेंद्र सिंह रावत उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री होंगे। देहरादून के एक होटल में विधायक दल की बैठक के बाद भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक नरेंद्र तोमर ने बताया कि रावत के नाम का प्रस्ताव मुख्यमंत्री पद के दावेदार रहे प्रकाश पंत और सतपाल महाराज ने रखा था।

    इसका समर्थन अन्य विधायकों ने कर उनके नाम पर मुहर लगा दी। उत्तराखंड मामलों के पार्टी प्रभारी श्याम जाजू ने कहा कि त्रिवेंद्र सिंह के पास संगठन और मंत्रालय दोनों का अनुभव है। राज्य को जिस तरह के नेतृत्व की जरूरत है उसके लिए वे पूरी तरह काबिल हैं।

    आरएसएस के प्रचारक रह चुके त्रिवेंद्र सिंह शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, जेपी नड्डा और उत्तराखंड प्रभारी श्याम जाजू की मौजूदगी में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

    इससे पहले शुक्रवार को भाजपा विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री के लिए त्रिवेंद्र के नाम पर मुहर लगी। हालांकि मुख्यमंत्री पद की दौड़ में प्रकाश पंत और सतपाल महाराज भी थे लेकिन अंतिम रूप से विधायक दल की बैठक में त्रिवेंद्र सिंह रावत के नाम पर ही सहमति बनी।

    अपने नाम की घोषणा होने के बाद रावत ने प्रधानमंत्री मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के अलावा अपने पार्टी सहयोगियों और कार्यकर्ताओं का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश के विकास के लिये कार्य करेंगे। बता दें कि भाजपा ने प्रदेश में तीन चौथाई से ज्यादा बहुमत हासिल कर 70 में से 57 विधानसभा सीटें अपने नाम की थी। भाजपा की यह जीत प्रदेश के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी जीत है।

    मुख्यमंत्री चयन को लेकर देहरादून के होटल पैसेफिक में विधायक मंडल की बैठक चली। इसमें केंद्रीय पर्यवेक्षकों के साथ प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू, चुनाव प्रभारी व केंद्रीय मंत्री धमेर्द्र प्रधान, जेपी नड्डा, प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट समेत 57 विधायक और सांसद भी मौजूद रहे।

    उत्तराखंड के मंत्री रह चुके हैं त्रिवेंद्र

    56 वर्षीय त्रिवेंद्र सिंह रावत डोइवाला सीट से विधायक हैं। वर्तमान में वे पार्टी की झारखंड ईकाई के प्रभारी हैं। 1983 से 2002 तक आरएसएस के प्रचारक रहे त्रिवेंद्र पहली बार 2002 में डोइवाला से विधायक चुने गए। 2007-2012 के दौरान वे राज्य के कृषि मंत्री रह चुके हैं। 
  • गोवा में कब-कब बनी त्रिशंकु सरकार

    By Unknown →
    यह पहली दफा नहीं है जब गोवा में सरकार बनाने को लेकर उठापटक मची हो। इससे पहले भी यहां पर सरकार बनाने को लेकर बीजेपी कांग्रेस और स्थानीय दलों के बीच उठापटक चलती रही है। कभी कांग्रेस ने अपने दम पर सरकार बनाई तो कभी किसी अन्य दल ने एक दूसरे दल से विधायकों को तोड़कर सरकारें बनाई।

    आइए डालते ही यहां के राजनीतिक उठापटक पर एक नजर-
    एमजीपी के दयानंद बंदोल्कर के निधन के बाद उनकी बेटी शशिकला काकोडकर यहां की सीएम बनी थीं लेकिन प्रताप सिंह राणे समेत तीन एमजीपी विधायकों के समर्थन वापस लेने के कारण अप्रैल 1979 में काकोडकर सरकार अल्पमत में आ गई और एक वोट से सरकार गिर गई। जिसके बाद 264 दिनों तक राष्ट्रपति शासन लगा रहा उसके बाद 1980 में हुए चुनाव में कांग्रेस को 20 सीटें, एमजीपी को 7 सीटें मिलीं। जिसके बाद कांग्रेस ने सरकार बनाई।
    साल 1984 में 30 सीटों में से कांग्रेस को 18 सीटों पर जीत मिलीं वहीं एमजीपी को 8 सीटें मिलीं। इस तरह एक बार फिर कांग्रेस की सरकार बनी। इसी बीच गोवा 1987 में देश का 25 वां राज्य बन गया।
    1989 में गोवा की 40 में से 20 सीटें कांग्रेस को मिली। वहीं एमजीपी को 18 सीटें मिलीं दो सीटें अन्य के खाते में गई। इस तरह कांग्रेस ने प्रताप सिंह राणे की अगुवाई में सरकार बनाई।
    1990 में प्रताप सिंह राणे सरकार से कांग्रेस के 6 विधायको ने अलग होकर गोवा पीपुल्स पार्टी बना ली और एमजीपी के साथ मिलकर नई सरकार का गठन कर लिया और चर्चिल अलेमावो सीएम बने। लेकिन महज 19 दिनों बाद ही राष्ट्रपति शासन लग गया।
    1991 में कांग्रेस ने गोवा पीपुल्स पार्टी के रवि नाइक को अपने दल में शामिल कर लिया लेकिन हाई कोर्ट के निर्णय के कारण उन्हें हटाना पड़ा बाद में कांग्रेस ने 1993 में विलफ्रेड डिसूज़ा को एक साल के लिए सीएम बनाया। इसके बाद मार्च 1994 में नाइक एक सप्ताह के लिए सीएम बने।
    1994 के चुनावो में बीजेपी-गोवा पीपुल्स पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ा लेकिन गठबंधन को महज 4 सीटें ही मिलीं। वहीं कांग्रेस ने 18, एमजीपी को 12 यूजीडीपी को तीन सीटें ही मिलीं। एक बार फिर त्रिशंकु सरकार की स्थिति बनी और कांग्रेस ने प्रताप सिंह राणे की अगुवाई में सरकार बनाई। लेकिन यह सरकार 3 साल 7 महीने ही चल पाई।
    कांग्रेस के विलफ्रेड डिसूज़ा ने 9 विधायको के साथ कांग्रेस छोड़कर गोवा राजीव कांग्रेस पार्टी बना ली। इसके बाद उन्होंने बीजेपी, गोवा पीपुल्स पार्टी एमजीपी के सहयोग से जुलाई 1998 में नई सरकार बना ली और खुद मुख्यमंत्री बन गए लेकिन इसके कुछ दिनों बाद ही गोवा राजीव कांग्रेस पार्टी के चार विधायक फिर से कांग्रेस में चले गए जिसके बाद राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा।
    मई 1999 में हुए चुनाव में कांग्रेस को 21 सीटें मिलीं वहीं बीजेपी को 10 सीटें मिलीं और एमजीपी को सिर्फ 4 सीटें और यूजीडीपी को दो सीटें मिलीं। ल्यूजिन्हो फलेरियो की सरकार बनी लेकिन 5 महीने के बाद ही फ्रांसिस्को सरदिन्हा ने कांग्रेस छोड़ कर नई पार्टी बना ली और बीजेपी के सहयोग से नई सरकार का गठन कर लिया और सीएम बन गए। इसी बीच बीजेपी ने सरकार से समर्थन वापस खींच लिया और कांग्रेस के 8 विधायकों के समर्थन से नई सरकार बना ली मनोहर पर्रिकर सीएम बनें। यह सरकार एक साल छह महीने चली।
    साल 2002 के चुनाव में बीजेपी को 17 सीटें और कांग्रेस 16 सीटें मिलीं। वहीं यूनाइटेड गोवा डेमोक्रेटिक पार्टी (यूजीडीपी) को तीन सीटें और एमजीपी को एक सीटें मिलीं। जिसके बाद बीजेपी ने फिर एमजीपी और यूजीडीपी के साथ मिलकर सरकार बना ली। जिसके बाद विवाद उठने पर गवर्नर ने पार्रिकर सरकार को बर्खास्त कर दिया। कांग्रेस के प्रताप सिंह राणे ने 21 दिन में बहुमत सिद्ध करने को लेकर सवाल उठाए। जिसके बाद गोवा में फिर से पांचवी बार राष्ट्रपति शासन लग गया।
    जून 2005 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने एमजीपी यूजीडीपी और एनसीपी के सहयोग से सरकार बनाई और प्रताप सिंह राणे चौथी बार राज्य के सीएम बने।
    जून 2007 में कांग्रेस और एनसीपी गठबंधन ने 19 सीटें जीती और एमजीपी तथा दो निर्दलियों के समर्थन से सरकार बना ली। दिगंबर कामथ गोवा के नए मुख्यमंत्री बनें। वहीं बीजेपी को इस चुनाव में 14 सीटें ही मिलीं।
    मार्च 2012 के चुनाव में बीजेपी को 21 सीटें मिलीं वहीं इस बार कांग्रेस सिर्फ 9 सीटें ही जीत पाई। बीजेपी के साथ गठबंधन करने वाली एमजीपी को तीन सीटें और गोवा विकास पार्टी को तीन सीटें तथा अन्य को 5 सीटें मिलीं। बीजेपी की सरकार बनी। इसके बाद नवंबर 2014 में मनोहर पार्रिकर के केंद्र सरकार के कैबिनेट में शामिल कर लिया गया जिसके बाद यहां पर लक्ष्मीकांत पारसेकर को सीएम बनाया गया।
  • अब राज्यसभा में भी दोबारा एंट्री नहीं ले पाएंगी मायावती

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    नई दिल्ली। हार और जीत राजनीति का हिस्सा है, लेकिन उप्र के चुनाव परिणामों ने कई राजनेताओं के राजनीतिक करियर को ही डगमगा दिया है। इन्हीं में से एक हैं राज्यसभा सदस्य और बसपा प्रमुख मायावती। यूपी चुनाव परिणामों में बसपा की करारी हार का ऐसा असर होगा कि मायावती का अब फिर से राज्यसभा सांसद बनना मुश्किल हो गया है।
    बसपा को इस चुनाव में सिर्फ 19 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल हुई है, जबकि बीते विधानसभा चुनाव में उसे 87 सीटें मिली थीं। इस लिहाज से मायावती की 1991 के बाद से अब तक की ये सबसे करारी हार है क्योंकि तब बसपा को मात्र 12 सीटें मिली थी।
    गौरतलब है कि मायावती का राज्यसभा कार्यकाल अगले साल अप्रैल में खत्म हो रहा है। ऐसे में मायावती के पास इतने भी विधायक या सांसद नहीं हैं कि वह अपने दम पर खुद राज्यसभा की सदस्य बन पाएं। 2012 का विधानसभा चुनाव हारने के बाद मायावती अपने 87 विधायकों के दम पर राज्यसभा की सदस्य बन गई थीं।
  • 22 अप्रैल को दिल्ली MCD चुनाव, BJP मौजूदा पार्षदों को नहीं देगी टिकट

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    दिल्ली में होने वाले एमसीडी चुनाव अब 22 अप्रैल को होगें और इस चुनाव के नतीजे 25 अप्रैल को आएंगे। नगर निगम चुनावों में नई जान फूंकने के लिए दिल्ली भाजपा ने अपने सभी वर्तमान पार्षदों को उम्मीदवार नहीं बनाने का फैसला किया है। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने ये एक संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा की।
    मनोज तिवारी ने कहा कि हमने आम-सहमति से निगम चुनावों में नये चेहरे उतारने का फैसला किया है। पार्षदों और पार्टी नेताओं के परिजनों को भी टिकट नहीं दिए जाएंगे। साल 2007 से दिल्ली के नगर निगमों पर नियंत्रण रखने वाली भाजपा जुए की तरह यह दांव खेल रही है। वह नहीं चाहती कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस मौजूदा पार्षदों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगा पाएं।

    मनोज तिवारी ने कहा कि ये फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की युवा शक्ति से संचालित न्यू इंडिया की सोच को मूर्त रूप देने की दिशा में एक कदम है। संवाददाता सम्मेलन में दिल्ली से भाजपा के सांसद हर्षवर्धन, महेश गिरि, प्रवेश वर्मा और उदित राज मौजूद थे जिसे पार्टी में इस फैसले को लेकर एकता प्रदर्शित करने के रूप में देखा जा रहा है।

    जब तिवारी से पूछा गया तो उन्होंने इन अटकलों को खारिज कर दिया कि इससे अंतर्विरोध बढ़ सकता है और वर्तमान पार्षद पार्टी के खिलाफ विद्रोह कर सकते हैं। उन्होंने कहा, भाजपा में लोग पद के लिए काम नहीं करते। सभी मिलकर काम करेंगे और जनता भी इसे स्वीकार करेगी। तिवारी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब और गोवा के नतीजों ने आप को आइना दिखा दिया है और यही हालत उसकी दिल्ली में भी होगी।

    दिल्ली के तीन नगर निगमों एनडीएमसी, एसडीएमसी और ईडीएमसी की कुल 272 सीटों में से भाजपा के 153 पार्षद हैं। एनडीएमसी और एसडीएमसी में 104-104 सीटें और ईडीएमसी में 64 सीटें हैं।
  • Trailer out: 'बेगम जान' में देखें विद्या का अब तक का सबसे Bold अवतार

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    ============ नेशनल अवॉर्ड विनर विद्या बालन की अपकमिंग फिल्म 'बेगम जान' का ट्रेलर रिलज हो गया है। ट्रेलर में आपको विद्या का अब तक का सबसे बोल्ड अवतार नजर आएगा, जैसा आपने कभी नहीं देखा होगा। दरअसल, 'बेगम जान' में भारत-पाकिस्तान के बंटवारे की कहानी दिखाई गई है। इस बंटवारे की वजह से बेगम जान के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाती है। फिल्म में विद्या ने काफी बोल्ड डायलॉग्स बोले हैं, जिन्हें सुनकर आप खुद कहेंगे कि ये विद्या का अब तक का सबसे बोल्ड अवतार है। फिल्म की खास बात ये है कि इसमें हर किरदार ने अपनी बेहतरीन परफॉर्मेंस दी है। फिर चाहे वो पल्लवी शारदा हो, गौहर खान हो या चंकी पांडे, सबने अपने-अपने किरदार को बखूबी निभाया है। श्रीजीत मुखर्जी द्वारा निर्देशित फिल्म 17 मार्च को रिलीज होगी।
  • मनोहर पर्रिकर चौथी बार बने गोवा के CM, शपथ ग्रहण की

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    पणजी। मनोहर पर्रिकर ने गोवा में मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ले ली है। वे चौथी बार गोवा के मुख्‍यमंत्री बने हैं। इस बार जब वे मुख्‍यमंत्री बने हैं तब वे विधानसभा के सदस्‍य नहीं हैं। उनके शपथ ग्रहण कार्यक्रम में भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह सहित पार्टी के अन्‍य बड़े नेता शामिल हुए। कोंकणी मूल के पर्रिकर ने अपना शपथ ग्रहण का भाषण भी कोंकणी भाषा में ही पढ़ा।
  • सूर्यास्त के दो घंटे बाद तक किया जा सकेगा होलिका दहन

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    रायपुर। शनिवार की रात 8.30 बजे शुरू हुई पूर्णिमा तिथि रविवार की रात 8.30 बजे तक रहेगी। चूंकि पूर्णिमा तिथि पर सूर्यास्त के बाद ही होलिका दहन करने की मान्यता है, इसलिए रविवार को पूर्णिमा तिथि खत्म होने से पहले ही होलिका दहन करना शुभ फलदायी होगा। सूर्यास्त के बाद मात्र दो घंटे तक ही होलिका दहन किया जा सकेगा।
     पं.मुक्तिनारायण पांडेय के अनुसार देशभर में अलग-अलग समय पर सूर्यास्त होता है,  इसलिए हर जगह सूर्यास्त के बाद दो घंटा 24 मिनट और जोड़ लिया जाए। इस समय के बीच ही होलिका दहन किया जा सकेगा। होलिका दहन स्थल की पूजा करते समय मुंह पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।

    पूजा की थाली में एक लोटा जल, माला, रोली, चावल, पुष्प, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग बताशा, गुलाल, नारियल, पके चने की बालियां, गेहूं की बालियां, गोबर(कंडों) से बनी माला व चीनी (शक्कर) की माला से पूजा करें। पूजा करते समय मंत्र 'अहकूटा भयत्रस्तैः कृता त्वं होली बालिशैः। अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्‌ ' का उच्चारण करते हुए पूजा करें और कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर लपेटें।

    मान्यता है कि होलिका दहन के दौरान गेहूं की बाली सेंककर घर में रखने से धनधान्य में वृद्धि होती है। जली हुई होली की गर्म राख घर में समृद्धि लाती है। साथ ही परिवार में शांति व आपसी प्रेम बढ़ता है।

    होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

    शाम 6.25 से 8.25 बजे तक

    भद्रा पुंछ 4.10 से 5.25 बजे तक

    भद्रा मुख 5.25 से 7.25 बजे तक

    सदर में बजने लगे चंग-मृदंग

    सदरबाजार में होली का उल्लास छाने लगा है। तीन-चार दिनों से चंग, मृदंग व नगाड़ों की धुन पर फाग गीत गाने की परंपरा निभाई जा रही है। सदर पाटा ग्रुप नं.1 के नेतृत्व में एडवर्ड रोड पर युवा, बुजुर्ग, बच्चे होली का आनंद लेंगे।

    अंबा मंदिर में रेन विथ डांस संग सामाजिक होली

    शाकद्वीपीय ब्राह्मण समाज के सदस्य राकेश शर्मा ने बताया कि सत्ती बाजार अंबा देवी मंदिर परिसर में शाकद्वीपीय ब्राह्मण समाज के सदस्य 'रेन विथ डांस' होली का आनंद लेंगे।

    बूढ़ापारा गोकुल चंद्रमा मंदिर

    बूढ़ापारा स्थित गोकुल चंद्रमा मंदिर में दोपहर 12 बजे भगवान कृष्ण-राधा संग होली खेलने की परंपरा निभाई जाएगी।




  • मतगणना कल, मघा नक्षत्र का नतीजों पर यह होगा असर

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    मल्टीमीडिया डेस्क। पांच राज्यों उत्तर-प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर में विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। नतीजे 11 मार्च को सामने आ जाएंगे। मगर, इससे पहले ज्योतिषियों ने ग्रहों की चाल के आधार पर विश्लेषण किया कि कहां किस पार्टी को बहुमत मिलेगा। जानते हैं इसके बारे में...

    उज्जैन की ज्योतिषविद् रश्मि शर्मा का मानना है कि 11 मार्च को शनिवार के दिन जब परिणाम घोषित होंगे, तब केतु के स्वामित्व वाला मघा नक्षत्र होगा। इस दिन सिंह राशि में चंद्रमा होगा। यानी केतु जिन ग्रहों के साथ बैठेगा, उन्हीं के अनुसार फल देगा। मंगल, मेष राशि में एवं शनि, धनु राशि में स्थित होगा। यह परिणाम किसी एक पार्टी के पक्ष में जाए ऐसी संभावना नहीं दिखाई देती है।

    भारतीय जनता पार्टी को सबसे ज्यादा सीटें मिल सकती हैं। सरकार बनाने के लिए उसे कुछ जद्दोजहद करनी पड़ सकती है। हालांकि, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गोवा में भाजपा की सरकार बनती दिख रही है। पंजाब में भी बीजेपी का प्रदर्शन बेहतर रहेगा, लेकिन वहां भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने के आसार कम ही दिख रहे हैं। मणिपुर में भी भाजपा का असर दिखेगा।

    दिल्ली के ज्योतिषाचार्य पंडित जयगोविंद शास्त्री के अनुसार, जहां तक कांग्रेस का सवाल है, तो कांग्रेस-आई (इंदिरा) के हालात ठीक नहीं चल रहे हैं। इस राजनीतिक दल पर 24 मार्च तक मारकेश की प्रत्यंतर दशा चल रही है। लिहाजा, कांग्रेस की हालत कमजोर रहेगी और कई प्रत्याशियों की तो जमानत तक जब्त हो सकती है।

    वहीं, सपा में अपनी स्वच्छ छवि को लेकर चुनाव मैदान में उतरे अखिलेश यादव ने अपने साथ कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को ले लिया था। शास्त्री के अनुसार, कांग्रेस का साथ लेने का नुकसान सपा को उठाना पड़ेगा और अखिलेश यादव के दोबारा मुख्यमंत्री बनने के मंसूबे पर पानी फिर सकता है।

    वहीं, रश्मि शर्मा ने बताया कि उत्तराखंड में मुख्य मुकाबला कांग्रेस के हरीश रावत एवं भारतीय जनता पार्टी के मध्य होंगा। हरीश रावत की राशि वृश्चिक है, एवं राहु की महादशा चल रही है। आगे यह सरकार बना पाएं यह संभव दिखाई नही देता। यहां भी भारतीय जनता पार्टी का दबदबा बन सकता है। भारी बहुमत प्राप्त होगा।
  • उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के भविष्य का फैसला कल, बेहद पुख्ता इंतजा

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    नई दिल्ली। सबसे बड़े और ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के बेहद अहम विधानसभा चुनाव के नतीजों का पिटारा आज खुलेगा। इन राज्यों में देश की दोनों प्रमुख राष्ट्रीय पार्टी भाजपा और कांग्रेस सहित कई क्षेत्रीय पार्टियों का भविष्य भी दाव पर है। वोटिंग मशीन में पड़े मतों की गिनती सुबह आठ बजे से शुरू हो जाएगी और देर शाम तक पूरी हो जाएगी। चुनाव आयोग ने मतगणना के लिए बेहद पुख्ता और पारदर्शी इंतजाम किए हैं।

    मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि कानून व्यवस्था दुरुस्त करने व शांतिपूर्ण ढंग से मतगणना के लिए उत्तर प्रदेश में 188 कंपनी केंद्रीय पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती की गई है।

    चार फरवरी से आठ मार्च के बीच विभिन्न चरणों में हुए पंजाब, गोवा, उत्तराखंड, मणिपुर और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों के सभी नतीजे एक साथ शनिवार को सामने आएंगे। इसके लिए चुनाव आयोग ने इन राज्यों में 157 मतगणना केंद्र बनाए हैं। पंजाब में 53, गोवा में दो, उत्तर प्रदेश में 75, उत्तराखंड में 15 और मणिपुर में 12 जगहों पर वोटों की गिनती की जाएगी। चुनाव के लिए इस्तेमाल की जा रही आधुनिक वोटिंग मशीन की वजह से नतीजों का रुझान जहां 11 बजे से दिखाई देने लगेगा, दोपहर दो बजे तक अधिकांश नतीजे आ जाने की उम्मीद है। देर शाम तक नतीजे जारी करने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी हो जाने की उम्मीद है।

    शनिवार सुबह आठ बजे सबसे पहले डाक से मिले मतपत्रों की गिनती की जाएगी, जिसके जरिए अपने चुनाव क्षेत्र से दूर कार्यरत फौजी और अन्य सरकारी कर्मचारी अपना मतदान करते हैं। यह गिनती पूरी होने के आधे घंटे बाद ईवीएम खोले जाएंगे और फिर फटाफट नतीजों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। कुछ सीटों पर प्रयोग के आधार पर वोटर वैरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल व्यवस्था भी की गई है, जिसमें वोटिंग मशीन से एक पर्ची निकलती है जिसमें चुनी गई पार्टी के निशान पर मुहर लगी होती है। इसे मतपेटी में बंद कर दिया गया था। जहां यह प्रक्रिया अपनाई गई थी, उन सीटों पर मतदान मशीन की गिनती के बाद इन पर्चियों की भी गिनती की जाएगी।

    अपने राजनीतिक भविष्य को ले कर सबसे लंबा इंतजार पंजाब और गोवा की जनता को करना पड़ा है, जहां चार फरवरी को ही एक चरण में मतदान हो गया था। जबकि उत्तर प्रदेश की 403 सीटों के लिए 11 फरवरी से आठ मार्च के बीच सात चरणों में हुआ मतदान सबसे अंत में समाप्त हुआ है। विभिन्न एजेंसियों की ओर से किए गए एक्जिट पोल में इन चुनाव में पंजाब को छोड़ कर सभी चार राज्यों में केसरिया लहर का अंदाजा लगाया गया है। कई अनुमान में उत्तर प्रदेश में भाजपा को बहुमत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जबकि एक ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन को भी अच्छी स्थिति में बताया है। उत्तराखंड में अधिकांश एजेंसियों ने भाजपा को सत्ता में आता हुआ पाया है, वहीं कांग्रेस की भी उम्मीद बरकरार है। इसी तरह पंजाब में कांग्रेस व आम आदमी पार्टी (आप) के बीच बेहद कांटे की टक्कर है। गोवा में भाजपा को बढ़त दिख रही है, जबकि मणिपुर में भाजपा व कांग्रेस के बीच टक्कर है।

    चुनाव आयोग ने इस बार मतगणना प्रक्रिया को ना सिर्फ सुरक्षित बल्कि अधिक से अधिक पारदर्शी बनाने की भी कोशिश की है। इसके तहत सभी राज्यों को कहा गया है कि वे मतगणना के नियमों और प्रक्रिया को को ले कर पूरी जानकारी उम्मीदवारों के साथ साझा करें और मतगणना के दौरान प्रक्रिया का पूरा ध्यान रखा जाए और इस लिहाज से कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई जाए। किसी भी गड़बड़ी की आशंका को दूर करने के लिए स्ट्रांग रूम से ले कर मतगणना कक्ष तक और मतगणना की जगह पर अलग से बैरिकेडिंग करने को कहा गया है। साथ ही वोटिंग मशीनों को निकाले जाने से ले कर मतगणना की पूरी पूरी प्रक्रिया और उसके आस-पास की पूरी गतिविधियों की वीडियोग्राफी की जाएगी।
  • अजमेर दरगाह ब्लास्ट: असीमानंद बरी,RSS नेता इंद्रेश कुमार को क्लीन चिट

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    जयपुर में एनआईए की विशेष अदालत आज 2007 के अजमेर दरगाह बम विस्फोट मामले में अपना फैसला सुनाते हुए स्वामी असीमानंद को बरी कर दिया है। अदालत ने इस मामले में तीन को दोषी और पांच को बरी कर दिया है। अदालत दोषी की सजा पर फैसला 16 मार्च को सुनाएगी। अदालत ने इस मामले में आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार को क्लीन चिट दी है।

    राष्ट्रीय जांच एजेन्सी के मामलों की विशेष अदालत के न्यायाधीश दिनेश गुप्ता ने अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुददीन हसन चिश्ती की दरगाह परिसर में 11 अक्टूबर 2007 को आहता ए नूर पेड़ के पास हुए बम विस्फोट मामले में देवेन्द्र गुप्ता, भावेश पटेल और सुनील जोशी को दोषी करार दिया है।

    बचाव पक्ष के वकील जगदीश एस राणा ने संवाददाताओं को बताया कि अदालत ने स्वामी असीमानंद समेत सात लोगों को सन्देह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। दोषी पाये गये अभियुक्तों में से सुनील जोशी की मत्यु हो चुकी है। अदालत देवेन्द्र गुप्ता और भावेश पटेल को आगामी 16 मार्च को सजा सुनाएगी।

    उन्होंने बताया कि अदालत ने स्वामी असीमानंद, हर्षद सोलंकी, मुकेश वासाणी, लोकेश शमार्, मेहुल कुमार, भरत भाई को सन्देह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। उन्होंने बताया कि न्यायालय ने देवेन्द्र गुप्ता, भावेश पटेल और सुनील जोशी को भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी, 195 और धारा 295 के अलावा विस्फोटक सामग्री कानून की धारा 3:4 और गैर कानूनी गतिविधियों का दोषी पाया है।

    गौरतलब है कि 11 अक्टूबर 2007 को हुए इस धमाके में तीन लोगों की मौत हो गयी थी जबकि 17 से अधिक लोग घायल हो गए थे। इस मामले में एनआईए ने 13 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। इनमें से आठ आरोपी साल 2010 से न्यायिक हिरासत में बंद है। न्यायिक हिरासत में बंद आठ आरोपी स्वामी असीमानंद, हषर्द सोलंकी, मुकेश वासाणी, लोकेश शर्मा, भावेश पटेल, मेहुल कुमार ,भरत भाई, देवेन्द्र गुप्ता हैं। एक आरोपी चन्द्र शेखर लेवे जमानत पर है।

    एक आरोपी सुनील जोशी की हत्या हो चुकी है और तीन आरोपी संदीप डांगे, रामजी कलसांगरा और सुरेश नायर फरार चल रहे है। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 149 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए, लेकिन अदालत में गवाही के दौरान कई गवाह अपने बयान से मुकर गए।

    राज्य सरकार ने मई 2010 में मामले की जांच राजस्थान पुलिस की एटीएस शाखा को सौंपी थी। बाद में एक अप्रैल 2011 को भारत सरकार ने मामले की जांच एनआईए को सौप दी थी।
  • यूपी चुनाव: सातवें और आखिरी चरण का मतदान समाप्त, फैसला 11 मार्च को

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    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण का मतदान भी बुधवार को शांतिपूर्ण संपन्न हो गया. इस चरण में भी लोगों में मतदान को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. अब सभी प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला 11 मार्च को आने वाले रिजल्ट से होगा.

    अब सभी की निगाहें 11 मार्च पर टिकीं हैं जब चुनाव परिणाम आएंगे. हालांकि सभी दल अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं लेकिन सरकार उसी की बनेगी जिस पर जनता की मेहरबानी होगी.

    कुछ जगहों पर मतदान बहिष्कार और ईवीएम खराबी के अलावा मतदान शांतिपूर्ण रहा. इस चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी, केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा का जिला गाजीपुर और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह का गृह जनपद चंदौली भी शामिल है, जहां इन दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है.
    जौनपुर की नौ, गाजीपुर की सात, चंदौली की पांच, वाराणसी की सात, भदोही की तीन, मिर्जापुर की पांच और सोनभद्र की चार विधानसभा सीटों को मिलाकर सात जिलों की 40 सीटों के लिए मतदान हुआ. 
  • अब बारी हमारी

    By Unknown →
    कुछ समय पहले तक माना जाता था कि नायिका या महिला प्रधान फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहती हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से इस धारणा में बदलाव आया है। बीते कुछ वर्षों में प्रदर्शित हुई महिला प्रधान फिल्मों की कामयाबी ने इस धारणा को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। सीमित बजट में बनाई गई ‘क्वीन’, ‘कहानी’, ‘मैरीकॉम’, ‘मर्दानी’, ‘हाईवे’, ‘खूबसूरत’, ‘नीरजा’, तनु वेड्स मनु’, ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’, ‘पीकू’, ‘डियर जिंदगी’, ‘नील बट्टे सन्नाटा’ और ‘एन एच 10’ जैसी फिल्में लागत से ज्यादा वसूलने में कामयाब रहीं। इसी सफलता के कारण महिला प्रधान फिल्मों के प्रति हिंदी फिल्मों के गलियारे में सकारात्मक माहौल बना है। महिला प्रधान फिल्मों की ओर बढ़ती दर्शकों की रुचि ने इस संदर्भ में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। दर्शकों की इसी रुचि को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष भी बॉक्स ऑफिस पर महिला प्रधान फिल्मों के प्रदर्शन का सिलसिला जारी रहेगा। इसकी शुरुआत ‘नाम शबाना’ और ‘अनारकली ऑफ़ आरा’ से होने वाली है। एक नजर इस वर्ष प्रदर्शित होने वाली नायिका प्रधान फिल्मों की बानगी पर…..
    अनारकली ऑफ़ आरा
    ‘नील बटे सन्नाटा’ के बाद स्वरा भास्कर एक बार फिर ‘अनारकली ऑफ़ आरा’ में केंद्रीय भूमिका निभा रही हैं। अविनाश दास लिखित और निर्देशित ‘अनारकली ऑफ आरा’ की नायिका बिहार की राजधानी पटना से चालीस किलोमीटर दूर आरा शहर की एक देसी गायिका है, जो मेलो-ठेलों, शादी-ब्‍याह और स्‍थानीय आयोजनों में गाती है। फ़िल्म में अनारकली की केंद्रीय भूमिका निभा रहीं स्वरा बताती हैं, ‘अनारकली ऑफ आरा’ मेरे लिए बेहद खास फिल्म है। ना केवल इसलिए कि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर आधारित प्रासंगिक एवं सामयिक फिल्म है। जब अविनाश जी ने मुझे फिल्म के बारे में बताया, मैं काफी प्रभावित हुई। मुझे लगता है कि हमने काफी साहसी फिल्म बनायी है जो व्यापक स्तर पर देखे जाने के लायक है। ‘अनारकली ऑफ आरा’ बिहार के आरा जिले की एक गायिका है जो द्विअर्थी गाने गाती है। चीजें तब बिगड़ जाती हैं, जब एक दिन अनारकली एक ताकतवर व्यक्ति के हाथों यौन प्रताड़ना का शिकार बनती है। लेकिन वह घुटने टेकने की बजाय उसके खिलाफ लड़ाई शुरू कर देती है।’
    रिलीज की तारीख-24 मार्च
    नाम शबाना
    ‘पिंक’ में अपने उम्दा अभिनय की बानगी से दर्शकों को प्रभावित करने के बाद तापसी पन्नू ‘नाम शबाना’ में एक्शन अवतार में नजर आएंगी। दो वर्ष पूर्व प्रदर्शित हुई ‘बेबी’ के सीक्वल ‘नाम शबाना’ में तापसी अंडर कवर एजेंट की भूमिका में नजर आएंगी। नीरज पांडे निर्मित इस फ़िल्म में तापसी कई हैरतअंगेज स्टंट करती दिखेंगी। तापसी बताती हैं, ‘फिल्म में मेरा किरदार बहुत मजबूत है और मैं बहुत से एक्शन सीन करते हुए दिखूंगी।…लेकिन निजी जिंदगी में मैंने कभी किसी को थप्पड़ भी नहीं मारा है। यह किरदार मेरे कंफर्ट जोन से बिल्कुल
    अलग था।
    रिलीज की तारीख-31 मार्च
    बेग़म जान
    नायिका प्रधान फिल्मों के नए दौर की शुरुआत करने वाली विद्या बालन एक बार फिर ‘बेग़म जान’ में केंद्रीय भूमिका में दिखेंगी। ‘बेग़म जान’ बंगाली फिल्म ‘राजकाहिनी’ की हिन्दी रीमेक है। फिल्म की कहानी आजादी से पहले हुए बंटवारे के वक्त की है। फिल्म का निर्देशन नेशनल अवॉर्ड विजेता श्रीजीत मुखर्जी कर रहे हैं। फिल्म में विद्या के साथ-साथ गौहर खान, नसीरुद्दीन शाह और पल्लवी शारदा भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।
    रिलीज की तारीख-14 अप्रैल
    नूर
    अकीरा’ की केंद्रीय भूमिका में एक्शन और अदायगी का दम दिखाने के बाद सोनाक्षी सिन्हा सबा इम्तियाज के उपन्यास ‘कराची, आई लव यू’ पर आधारित ‘नूर’ में शीर्ष भूमिका निभाती हुई नजर आएंगी। सुनील सिप्पी निर्देशित इस फ़िल्म में पत्रकार की भूमिका निभा रही सोनाक्षी बताती हैं, ‘हर लड़की और यहां तक कि लड़के भी इस चरित्र से खुद को जोड़कर देख पाएंगे। फिल्म की कहानी सुनते ही मुझे पसंद आ गई थी और मुझे इसके लिए ज्यादा तैयारी नहीं करनी पड़ी क्योंकि मुझे लगता है कि यह किरदार मुझ जैसी ही है।’
    रिलीज की तारीख-21 अप्रैल
    हसीना
    समकालीन अभिनेत्रियों से प्रेरित होते हुए श्रद्धा कपूर ने भी ‘हसीना’ में केंद्रीय भूमिका निभाने की चुनौती स्वीकारी है। फ़िल्म में श्रद्धा अंडर वर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर की भूमिका में नजर आएंगी। पिछले दिनों इस फ़िल्म का फर्स्ट लुक जारी किया गया, जिसमें श्रद्धा के अवतार को बेहद सराहना मिली। उल्लेखनीय है कि श्रद्धा हसीना की भूमिका को बेहद चुनौतीपूर्ण मानती हैं। श्रद्धा कहती हैं, ‘मैं बहुत ज्यादा उत्साहित हूं लेकिन साथ ही नर्वस भी हूं। मुझे इस फिल्म में 17 साल से 43 तक की महिला का किरदार निभाना है। यह किरदार थोड़ा कठिन होने वाला है। मैं उम्मीद करती हूं कि मैं इस रोल में अच्छी लगूं।’
    रिलीज की तारीख-14 जुलाई
    सिमरन
    अभिनेत्रियों के लिए सुनहरे दौर की नींव रखने वाली कंगना रनोट इस वर्ष भी हंसल मेहता निर्देशित ‘सिमरन’ में दमदार भूमिका में नजर आएंगी। ‘सिमरन’ अमेरिका में रहने वाली संदीप कौर नाम की एक नर्स की कहानी है, जिसे कुछ साल पहले एक बैंक डकैती के जुर्म में जेल भेजा गया था क्योंकि उसने अपने जुए के कर्ज़ को चुकाने के लिए ये डकैती की थी। ‘सिमरन’ के निर्देशक हंसल मेहता कहते हैं, ‘कंगना रनोट एक बेहतरीन अभिनेत्री हैं और ‘सिमरन’ की शूटिंग के दौरान उनके साथ बिताया समय शानदार था। मेरे लिए वह ‘सोने पर सुहागा’ जैसी हैं, क्योंकि एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री होने के साथ-साथ कंगना रनोट एक स्टार भी हैं।’
    रिलीज की तारीख-15 सितंबर