• गोवा में कब-कब बनी त्रिशंकु सरकार

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    यह पहली दफा नहीं है जब गोवा में सरकार बनाने को लेकर उठापटक मची हो। इससे पहले भी यहां पर सरकार बनाने को लेकर बीजेपी कांग्रेस और स्थानीय दलों के बीच उठापटक चलती रही है। कभी कांग्रेस ने अपने दम पर सरकार बनाई तो कभी किसी अन्य दल ने एक दूसरे दल से विधायकों को तोड़कर सरकारें बनाई।

    आइए डालते ही यहां के राजनीतिक उठापटक पर एक नजर-
    एमजीपी के दयानंद बंदोल्कर के निधन के बाद उनकी बेटी शशिकला काकोडकर यहां की सीएम बनी थीं लेकिन प्रताप सिंह राणे समेत तीन एमजीपी विधायकों के समर्थन वापस लेने के कारण अप्रैल 1979 में काकोडकर सरकार अल्पमत में आ गई और एक वोट से सरकार गिर गई। जिसके बाद 264 दिनों तक राष्ट्रपति शासन लगा रहा उसके बाद 1980 में हुए चुनाव में कांग्रेस को 20 सीटें, एमजीपी को 7 सीटें मिलीं। जिसके बाद कांग्रेस ने सरकार बनाई।
    साल 1984 में 30 सीटों में से कांग्रेस को 18 सीटों पर जीत मिलीं वहीं एमजीपी को 8 सीटें मिलीं। इस तरह एक बार फिर कांग्रेस की सरकार बनी। इसी बीच गोवा 1987 में देश का 25 वां राज्य बन गया।
    1989 में गोवा की 40 में से 20 सीटें कांग्रेस को मिली। वहीं एमजीपी को 18 सीटें मिलीं दो सीटें अन्य के खाते में गई। इस तरह कांग्रेस ने प्रताप सिंह राणे की अगुवाई में सरकार बनाई।
    1990 में प्रताप सिंह राणे सरकार से कांग्रेस के 6 विधायको ने अलग होकर गोवा पीपुल्स पार्टी बना ली और एमजीपी के साथ मिलकर नई सरकार का गठन कर लिया और चर्चिल अलेमावो सीएम बने। लेकिन महज 19 दिनों बाद ही राष्ट्रपति शासन लग गया।
    1991 में कांग्रेस ने गोवा पीपुल्स पार्टी के रवि नाइक को अपने दल में शामिल कर लिया लेकिन हाई कोर्ट के निर्णय के कारण उन्हें हटाना पड़ा बाद में कांग्रेस ने 1993 में विलफ्रेड डिसूज़ा को एक साल के लिए सीएम बनाया। इसके बाद मार्च 1994 में नाइक एक सप्ताह के लिए सीएम बने।
    1994 के चुनावो में बीजेपी-गोवा पीपुल्स पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ा लेकिन गठबंधन को महज 4 सीटें ही मिलीं। वहीं कांग्रेस ने 18, एमजीपी को 12 यूजीडीपी को तीन सीटें ही मिलीं। एक बार फिर त्रिशंकु सरकार की स्थिति बनी और कांग्रेस ने प्रताप सिंह राणे की अगुवाई में सरकार बनाई। लेकिन यह सरकार 3 साल 7 महीने ही चल पाई।
    कांग्रेस के विलफ्रेड डिसूज़ा ने 9 विधायको के साथ कांग्रेस छोड़कर गोवा राजीव कांग्रेस पार्टी बना ली। इसके बाद उन्होंने बीजेपी, गोवा पीपुल्स पार्टी एमजीपी के सहयोग से जुलाई 1998 में नई सरकार बना ली और खुद मुख्यमंत्री बन गए लेकिन इसके कुछ दिनों बाद ही गोवा राजीव कांग्रेस पार्टी के चार विधायक फिर से कांग्रेस में चले गए जिसके बाद राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा।
    मई 1999 में हुए चुनाव में कांग्रेस को 21 सीटें मिलीं वहीं बीजेपी को 10 सीटें मिलीं और एमजीपी को सिर्फ 4 सीटें और यूजीडीपी को दो सीटें मिलीं। ल्यूजिन्हो फलेरियो की सरकार बनी लेकिन 5 महीने के बाद ही फ्रांसिस्को सरदिन्हा ने कांग्रेस छोड़ कर नई पार्टी बना ली और बीजेपी के सहयोग से नई सरकार का गठन कर लिया और सीएम बन गए। इसी बीच बीजेपी ने सरकार से समर्थन वापस खींच लिया और कांग्रेस के 8 विधायकों के समर्थन से नई सरकार बना ली मनोहर पर्रिकर सीएम बनें। यह सरकार एक साल छह महीने चली।
    साल 2002 के चुनाव में बीजेपी को 17 सीटें और कांग्रेस 16 सीटें मिलीं। वहीं यूनाइटेड गोवा डेमोक्रेटिक पार्टी (यूजीडीपी) को तीन सीटें और एमजीपी को एक सीटें मिलीं। जिसके बाद बीजेपी ने फिर एमजीपी और यूजीडीपी के साथ मिलकर सरकार बना ली। जिसके बाद विवाद उठने पर गवर्नर ने पार्रिकर सरकार को बर्खास्त कर दिया। कांग्रेस के प्रताप सिंह राणे ने 21 दिन में बहुमत सिद्ध करने को लेकर सवाल उठाए। जिसके बाद गोवा में फिर से पांचवी बार राष्ट्रपति शासन लग गया।
    जून 2005 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने एमजीपी यूजीडीपी और एनसीपी के सहयोग से सरकार बनाई और प्रताप सिंह राणे चौथी बार राज्य के सीएम बने।
    जून 2007 में कांग्रेस और एनसीपी गठबंधन ने 19 सीटें जीती और एमजीपी तथा दो निर्दलियों के समर्थन से सरकार बना ली। दिगंबर कामथ गोवा के नए मुख्यमंत्री बनें। वहीं बीजेपी को इस चुनाव में 14 सीटें ही मिलीं।
    मार्च 2012 के चुनाव में बीजेपी को 21 सीटें मिलीं वहीं इस बार कांग्रेस सिर्फ 9 सीटें ही जीत पाई। बीजेपी के साथ गठबंधन करने वाली एमजीपी को तीन सीटें और गोवा विकास पार्टी को तीन सीटें तथा अन्य को 5 सीटें मिलीं। बीजेपी की सरकार बनी। इसके बाद नवंबर 2014 में मनोहर पार्रिकर के केंद्र सरकार के कैबिनेट में शामिल कर लिया गया जिसके बाद यहां पर लक्ष्मीकांत पारसेकर को सीएम बनाया गया।

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