• एक ऐसा विद्यालय जहाँ गुरू छूता है अपने शिष्यों के पैर !

    Reporter: fast headline india
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    एक ऐसा विद्यालय जहाँ गुरू छूता है अपने शिष्यों के पैर !

    शिक्षक दिवस सभी देशवाशियो हार्दिक शुभकामनाएं


    मुंबई-आज शिक्षक दिवस है, हम सब जानते है हर एक इंसान के जीवन में शिक्षक का क्या महत्व होता है। यह भी जानते है कि आज अगर हम किसी बड़े ओहदे पर है और अपने जीवन मे अच्छा पैसा कमा रहे तो उसमें गुरु का कितना बड़ा योगदान होता है। शिक्षक नही होते तो ना कोई डॉक्टर,इंजीनियर,और ना ही सीए बन पाता। अगर हम अपने जीवन में तरक्की करते है तो उस तरक्की में हम अपने गुरु शिक्षकों के योगदान को नही भूल सकते। 
    5 सेप्टेंबर की तारीख को हम शिक्षक दिवस के रूप में मनाते है। शिक्षक दिवस के दिन सभी छात्र छात्राएं अपने गुरु का सम्मान करते है और उनके कामों की सराहना भी करते है। और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना करते है। जब हम परीक्षा में अच्छे मार्क्स से उतीर्ण होते है तो हम सबसे पहले अपने शिक्षकों का पैर छूकर आशीर्वाद लेते है। लेकिन क्या कभी आपने शिक्षकों को देखा है कि बच्चों का पैर छूकर आशीर्वाद लेते हुए। शिक्षक दिवस के मौके पर हम आपको बताने जा रहे है एक ऐसे स्कूल के बारे में जहां हर रोज स्कूल के शिक्षक बच्चों के चरण में अपना सिर झुकाते है। वो स्कूल जहां शिक्षक छात्रों का पैर छूकर आशीर्वाद लेते है वो कही और नही बल्कि मुंबई में है। यह स्कूल मुंबई के घाटकोपर में संचालित है। और स्कूल का नाम है ऋषिकुल गुरुकुल विद्यालय। इस स्कूल में एक परंपरा के चलते शिक्षक छात्रों का पैर छूते है। यहां स्कूल में हर सुबह यही नज़ारा देखने को मिलता है। आपके मन मे तो यही सवाल बार बार आता होगा कि आखिर ये कोन सी परंपरा है जहाँ शिक्षक हर सुबह छात्रों का पैर छूकर आशीर्वाद लेते है और क्यों लेते है। तो बताते है कि इस स्कूल के शिक्षकों का मानना है कि भारत मे बच्चे भगवान के रूप होते है। इसलिए उनके पैर छूना भगवान के समक्ष झुकने के समान माना जाता है। गुरुकुल में चल रहे इस क्रम से शिक्षकों के प्रति भी सम्‍मान की भावना बढ़ गई है। शिक्षक भी यहां बच्‍चों से आर्शीवाद मांगते हैं। उनका मानना है कि ऐसा करने से अन्‍य छात्रों को भी प्रेरणा मिलेगी कि हम उम्रों का सम्‍मान करना चाहिए। कबसे मनाए जाने लगा शिक्षक दिवस भारत में 5 सितंबर 1962 से शिक्षक दिवस मनाए जाने लगा.इस दिन महान शिक्षाविद् और भारत के पूर्व उप-राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्‍णन का जन्म हुआ था। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्‍णन ने भारत के शिक्षा में बहुत बड़ा योगदान दिया। सर्वपल्ली राधाकृष्‍णन का मानना था की एक शिक्षक का दिमाग देश में सबसे बेहतर दिमाग होता है। एक दिन डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्‍णन से उनके कुछ छात्र और मित्रों ने उनका जन्मदिन मनाने की बात कही। तभी इस के जवाब में राधाकृष्णन ने कहा कि मेरा जन्मदिन अलग से मनाने की बजाए इसे टीचर्स डे के रूप में मनाया जाएगा तो मुझे गर्व महसूस होगा। इसके बाद से पूरे भारत में इस दिन 5 सितंबर को टीचर्स डे मनाया जाने लगा।
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