• अपने मंसूबो में असफल नेता ने रचा राजनीतिक षणयंत्र !

    Reporter: fast headline india
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    अपने मंसूबो में असफल नेता ने रचा राजनीतिक षणयंत्र !

    पहले सुलह. फिर करोड़ो फंड.अधिकारी का तबादला. जब नही मिली सफलता ? तब चली अपनी चाल !

    उल्हासनगर - उल्हासनगर मनपा आयुक्त राजेंद्र निम्बालकर पर दर्ज हुआ अक्ट्रोसिटी मामले में कुछ रोचक जानकारियां सामने आ रही है ! अपने मंसूबे को पूरा करने में जब कामयाबी नही मिला तब राजनीतिक षणयंत्र के तहत आयुक्त को सबक सिखाने के लिए पुराने दबे मुद्दे को फिर से ऊपर लाया गया फिर कोर्ट ले जाया गया जहाँ कोर्ट में सुनवाई होने के बाद कोर्ट ने आयुक्त, डी.सी.पी, ए.सी.पी व पी.आई पर मामला दर्ज करने का आदेश दिया था।परंतु इस मामले में पुलिस विभाग के आलाधिकारियों के आदेश पर शिकायत कर्ता ने सिर्फ मनपा आयुक्त पर मामला दर्ज करवाया इस पर अब सवाल उठने लगा है।
    सूत्रों के मुताबिक ठाणे पुलिस आयुक्त और जिले के एक कद्दावर मंत्री के जरिये पुलिस विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों पर मामला दर्ज करने से बचा लिए है।जिसके चलते पुलिस के तीन आलाधिकारियों पर कोर्ट के आदेश के बावजूद अक्ट्रोसिटी का मामला अब तक दर्ज नही किया गया है। इसके पीछे की राजनीतिक मंसा क्या है वह समझ में आ रहा है ! गौरतलब हो कि यह पूरा मामला मनपा में गट नेताओं केबिन को लेकर शुरू हुआ था ! केबिन न मिलने से नाराज रिपाई नगरसेवक भगवान भालेराव जब आयुक्त से मिलने उनके केबिन में गये थे तभी केबिन की मांग को लेकर आयुक्त व भालेराव के बीज नोकझोक हो गई उसी दरम्यान मनपा आयुक्त ने भालेराव को कहा था कि हमें मनपा को ,,,,,,,,, नही बना है , जिस समय यह पूरा मामला हुआ उस समय आयुक्त के केबिन में भगवान भालेराव मनपा आयुक्त राजेंद्र निम्बालकर, उपायुक्त मुख्यालय सन्तोष देहरकर, मालमत्ता ब्यवस्थापक विशाखा सावंत, आयुक्त के पीए प्रकाश तरे यही चार लोगों की मौजदूगी में यह पूरी घटना हुई है ऐसा विश्वसनीय सूत्रों द्वारा जानकारी मिली है, इसके कुछ देर बाद भालेराव ने अपने साध हुए घटना की जानकारी देने पत्रकार कक्ष में आये और पत्रकारो को पूरी जानकारी दी फिर पत्रकार कक्ष में मौजूद सभी पत्रकारों के साथ मनपा आयुक्त से मिलने वापस आयुक्त के केबिन में गये जब तभी पत्रकारो ने आयुक्त पूछा कि आप ने भालेराव को जाती को लेकर कुछ बोला है क्या तो आयुक्त ने कहा कि मै कोनवाड़ा बोलने जा रहा गलती से जाति वाचक शब्द निकल गया अगर मेरे शब्द से भालेराव को तकलीफ हुआ है तो उसके लिए हम माफी मांगते है ! इसके बाद भालेराव ने पुलिस को लिखित पत्र देकर मनपा आयुक्त पर अक्ट्रोसिटी के तहत मामला दर्ज करने की मांग किया, परंतु पता नही किन्ही येनकेन कारणों से मामला धीरे - धीरे ठंडे बस्ते में चला गया था परंतु जब अपना मंसूबा पूरा करने में अपने आप को असफल होते देखा तो दबे हुए मामले को स्थानीय कोर्ट में ले जाया गया जहाँ इस मामले की सुनवाई करने के बाद कोर्ट ने आदेश दिया कि आयुक्त समेत चार लोगो के विरुद्ध अक्ट्रोसिटी के तहत मामला दर्ज करें ! कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने मनपा आयुक्त के विरुद्ध अक्ट्रोसिटी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया परंतु बाकी तीन पुलिस विभाग के लोगो पर मामला दर्ज नही हुआ ? सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ठाणे पुलिस आयुक्त और जिले के एक कद्दावर मंत्री के जरिये पुलिस विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों पर मामला दर्ज होने से बचा गया है । जिसके चलते पुलिस के तीन आलाधिकारियों पर कोर्ट के आदेश के बावजूद अक्ट्रोसिटी का मामला अब तक दर्ज नही किया गया है। बहर हाल इस मामले में वो कौन सी मंसा थी जो पूरी नही हुई और ये दबा हुआ मामला कोर्ट तक पहुँचने की नोबत आई ! दूसरा जब पुलिस को अर्जी दी गई थी तब पुलिस के बुलाने के बाद भी शिकायत दर्ज कराने क्यो नही गए ! मनपा के विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक अपने वार्ड के विकाश के लिए करोड़ो की निधी न मिलने और मनपा के पीआरओ को दिए गए अतिक्रमण विभाग के विशेष उपायुक्त पद से न हटाना भी एक बड़ा कारण बताया जा रहा है ! बहर हाल पूरे मामले की जांच अम्बरनाथ के एसीपी सुनील पाटिल कर रहे है ! कुल मिलाकर इस रानीतिक षणयंत्र में किसका दांव किसके ऊपर भारी पड़ेगा वो तो आने वाला समय ही बताएगा !
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