• अक्ट्रोसिटी मामले में उमपा आयुक्त को मुम्बई उच्चन्यायालय से मिली राहत !

    Reporter: fast headline india
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    एफ.आय.आर.स्क्वॉयश की याचिका पर सुनवाई के बाद...... 

    अक्ट्रोसिटी मामले में उमपा आयुक्त को मुम्बई उच्चन्यायालय से मिली राहत !

    नगरसेवक के मंसूबे पर फिरा पानी !


     उल्हासनगर-उल्हासनगर महानगर पालिका के आयुक्त राजेन्द्र निम्बालकर पर कल्याण सत्र न्यायालय के आदेश पर जब से सेंट्रल पुलिस ने एट्रारासिटी का मामला दर्ज किया है,तब से आयुक्त छुट्टी पर है।आयुक्त की तरफ से मुम्बई उच्चन्यायालय में एफआईआर स्क्वॉयश करने के लिए याचिका दायर की गई थी,जिसकी सुनवाई करते हुए जस्टिस रंजीत मोरे की बेंच ने उमनपा आयुक्त को 6 सप्ताह का रिलीफ देते हुए ऐसा आदेश दिया है कि यदि पुलिस किसी परिस्थिति में उमनपा आयुक्त को अरेस्ट करती है तो निचली अदालत उन्हें तुरंत जमानत पर रिहा करे। 
    उच्चन्यायालय से आयुक्त को मिले इस रिलीफ से राजनीतिक द्वेष भावना का कोप भाजन बनाने वाले नेताओं के मंसूबे पर पानी फिर गया। गौर तलब हो कि आरपीआय नगरसेवक भगवान भालेराव ने उमनपा आयुक्त राजेन्द्र निम्बाल्कर पर जातिवाचक शब्द का उच्चारण करने का आरोप लगाया था और आयुक्त पर अटरासिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करने की मांग मध्यवर्ती पुलिस से की थी।भगवान भालेराव की शिकायत पर मामले की तफ्तीश सहायक पुलिस आयुक्त विकास टोटावार ने किया था और जांचोपरांत पुलिस ने उमनपा आयुक्त को क्लीनचिट दिया था।पुलिस की तरफ से आयुक्त को मिले क्लीनचिट  से नाराज भालेराव ने कल्याण सत्र न्यायालय के प्रथम वर्गीय न्यायाधीश डी. एस. हथरोटे की कोर्ट में एडवोकेट चरण पंथालिया के जरिये 156 (3) के तहत याचिका दायर की थी,याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश हथरोटे ने उमनपा आयुक्त सहित डीसीपी अंकित गोयल,एसीपी विकास टोटावार,तथा जाच अधिकारी अभिनाश कालदाते पर गुन्हा दर्ज करने का आदेश दिया था।कोर्ट के आदेश पर सेंट्रल पुलिस ने 17 तारीख को सिर्फ उमनपा आयुक्त राजेन्द्र निम्बाल्कर पर अटरासिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था तब से आयुक्त छुट्टी पर है।                  इस बीच आयुक्त निम्बाल्कर ने कल्याण सत्र न्यायलय के आदेश पर दर्ज एफआईआर को स्क्वॉयश करने के लिए मुंबई उच्चन्यायालय में याचिका दायर की थी,गुरुवार को न्यायाधीश रंजीत मोरे की बेंच में इस मामले की सुनवाई थी।आयुक्त की तरफ से सीनियर काउंसिल अशोक मुंदरगी ने न्यायधीश के समक्ष पक्ष रखा,दोनो पक्षो की जिरह सुनने के बाद न्यायाधीश रंजीत मोरे ने उमनपा आयुक्त को 6 सप्ताह का रिलीफ देते हुए ऐसा आदेश दिया कि यदि मामला की जांच चल रही है और ऐसी परिस्थिति में यदि आयुक्त को अरेस्ट करने की नौबत पुलिस पर आन पड़ी तो इस स्थिति में आयुक्त को तुरन्त स्थानीय न्यायालय के समक्ष हाजिर करना होगा और स्थानीय न्यायालय के न्यायाधीश बिना शर्त उनकी  जमानत को तुरन्त मंजूर करेगे।उच्चन्यायालय के सीनियर बेंच के इस आदेश से आयुक्त को अरेस्ट करवाने का मंसूबा कई नेताओं का धरे का धरा रह गया।
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