• उल्हासनगर शहर के विकाश का डीपी प्लान या विनाशकारी डीपी प्लान ! राजनेताओं में जनता के मसीहा बनने की होड़ में शहर के डीपी प्लान की दी जा रही है बलि ?

    Reporter: fast headline india
    Published:
    A- A+
     उल्हासनगर शहर के विकाश का डीपी प्लान या विनाशकारी डीपी प्लान !

    राजनेताओं में जनता के मसीहा बनने की होड़ में शहर के डीपी प्लान की दी जा रही है बलि ?

    उल्हासनगर-उल्हासनगर शहर का डेवलपमेंट प्लान को लेकर राजनीतिक श्रेय लेने में बीते दिनों से शहर के दो विधायकों में होड़ लगी है अपने हितों के लिए ये लोग विनाशकारी डीपी बोलने में जुटे है , सवाल यह है कि जब ये डीपी प्लान सरकार के पास गया था तो यही लोग स्थानीय बिल्डरों से सांठगांठ करके मनमानी तरीके से बदलाव कराने का रोल में भी इन्ही नेताओं का ही योगदान को नकारा नही जा सकता है ? परंतु आज जनता की नजरों में अपनी साख बचाने के लिए इनका नाटकीय ड्रामा चालू है ! परंतु जनता इनके झांसे में इसबार आने वाली नही है,कुलमिलाकर देखा जाय तो ये डीपी प्लान की कुछ कमियों को छोड़ दे तो शहर के लोगो की फायदे का ये डेवलपमेंट प्लान साबित होगा ! गौरतलब हो कि उल्हासनगर शहर के विकास के दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण विकास प्रारूप अर्थात उल्हासनगर के डेवलपमेंट प्लान को मंजुरी मिलने जा रही है, अंतिम प्रक्रिया के तौर पर नागरिकों की जानकारी के लिए मनपा मुख्यालय में नए डीपी की प्रिंट सार्वजनिक की गई है. भले ही शहर का विकास डीपी से निश्चित होता है लेकिन प्रस्तावित डीपी को लेकर अनेक राजनीतिक दल असमंजस की स्थिति में कुछ इसमें फेरबदल चाहते है, तो किसी का कहना है विकास चाहिए पर किसी बेघर बेरोजगार नहीं. सबसे ज्यादा परेशानी शहर के रिंगरुट से होने जा रही है. नए डीपी में रिंगरूट 120 फूट का दर्शाया गया है, इससे कुछ लोगो के मकान व दुकाने टूटेगी जिसमें कुछ लोग बेघर व बेरोजगार हो जायेगे, मैदानों की जगह को रिहायशी करने आदि भी विरोध आम जनता के द्वारा किया जा रहा है. बता दे कि 43 साल के लंबे अंतराल के बाद शहर के विकास प्रारूप को मिली मान्यता मिलने जा रही है, उल्हासनगर मनपा का कार्यक्षेत्र 13 वर्ग किलोमीटर में फैला है तथा इस शहर की जनसंख्या लगभग 10 लाख के करीब है. इससे पहले 1974 में शहर का डीपी बना था, तब यह नगरपालिका थीं, उसके बाद एमएमआरडीए के माध्यम से शहर विकास प्रारूप बनाया लेकिन तकनीकी कारणों के चलते वह कार्यान्वित नहीं हो पाया. राज्य सरकार ने डेढ़ साल पहले नया डीपी बनाया था एवं इसी साल अप्रैल में राज्य सरकार ने इस डीपी का अध्यादेश निकाला है. कुछ महीने पहले हुए मनपा के आम चुनाव में लगभग सभी राजनीतिक दलों ने इस विषय को चुनावी मुद्दा बनाया था, भाजपा ने लोगों को तब आश्वासन भी दिया था कि मनपा में सत्ता बनाकर दीजिये डीपी एक महीने में मंजूर होगा, नए डीपी में 322 आरक्षण दर्शाए गए है, उल्हासनगर 1, 2 तथा 3 में एक भी खेल के मैदान का प्रावधान नहीं किया गया है.जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है इसमें राजनेताओं का कितना बड़ा रोल होगा परंतु अब जनता के समक्ष नायक बनने के लिए नाटकीय राजनीतिक ड्रामा चालू है ! विनाशकारी डीपी को बनाने वाले अब जनता के हितैसी बनने का रोल मॉडल बनने की नायाब कोशिस में जुटे हुए है !
  • No Comment to " उल्हासनगर शहर के विकाश का डीपी प्लान या विनाशकारी डीपी प्लान ! राजनेताओं में जनता के मसीहा बनने की होड़ में शहर के डीपी प्लान की दी जा रही है बलि ? "