• राज्य सरकार व बिल्डरों की मिलीभगत से नए डीपी प्लान से कब्ररिस्तान हुआ गायब ?

    Reporter: fast headline india
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    राज्य सरकार व बिल्डरों की मिलीभगत से नए डीपी प्लान से कब्ररिस्तान हुआ गायब ?

    उल्हासनगर के मुसलमान हुए संतप्त 

     राज्यपाल के अध्यादेश से मिले कब्रस्तान का आरक्षण बदली कर' नए डीपी से किया गायब !      

     उल्हासनगर - उल्हासनगर का मुश्लिम समाज  पिछले 30 सालो से दफन भूमि के लिए संघर्ष करते रहे,इसी संघर्ष के बाद महारल गाव के समीप बिल्डर महेश अग्रवाल ने दो एकड़ जमीन दफन भूमि के लिए आवंटित की थी,जहां  पिछले वर्ष दो लोगो को दफनाने के बाद वहां हिन्दू और मुश्लिमो क बीच संघर्ष की स्थिति निर्माण हो गयी थी। और दफन भूमि का पेचीदा मामला न्यायालय के ऊपर छोड़ दिया गया था।  परंतु महाराष्ट्र सरकार द्वारा भेजा मंजूर डीपी प्लान में दफनभूमी का आरक्षण हटा कर उसकी जगह पर पब्लिक युटिलिटी का आरक्षण प्रस्तावित किया गया।इसी वजह से मुस्लिम समाज के लोगो रोष ब्याप्त हो गया है
    दफन भूमि को लेकर आने वाले समय में मुस्लिम समाज द्वारा आक्रमक भूूमिका अपनााने की सम्भवना है। बता दे कि पिछले तीन दशक से उल्हासनगर के मुसलमानो की हक की दफनभुमी नही होने की वजह मुस्लिम बंधुओ का खुद की शव दफन करने के लिए अंबरनाथ और कल्याण दफनभुमी में लेकर जाना पड़ता था, इस समस्या से निजात पाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख इनके पास मुस्लिम कब्रस्तान ट्रस्ट के अध्यक्ष अब्दुल रशिद पटेल इन्होंने दफनभुमी की मांग किया था । इस मांग को मानते हुए 2006 में मौजा म्हारळ के सर्व्हे नं. 58 की 2 एकड़ जगह नगरविकास मंत्रालय ने अधिसुचना देते हुए मनपा को दफनभुमी का आरक्षण दिया था । यह जगह मोहना बांध से लगकर थी जिसके वजह से 2008 में मेरी हया सरकारी संस्था ने प्रस्तुत करते हुुुए यह अहवाल दिया कि ये जगह बाढ़ प्रभावित रेखा के अंदर है इसलिये यहाँ दफनभुमी नही हो सकती है, ऐसी जानकारी नारायण अडवाणी इन्होंने अपनी याचिका दरम्यान प्रस्तुत किया था । जिसकी वजह से मुस्लिम समाज को तत्कालीन कॉग्रेस सरकार कृपा होने के बादजूद कब्रस्तान मिलते मिलते रह गया था।पिछले आठ सालो में ये लड़ाई को मुस्लिम संघटनाओ ने अधिक तेज किया हुआ है। दो साल पहले मनपा की महासभा में कॅम्प 1 से 3 के मुसलमानों के लिए म्हारळ में तो 4 व 5 के मुसलमानों के लिए कैलाश कॉलनी में दफनभुमी देने का प्रस्ताव पास किया था ।म्हारळ गाव की जमीन को दफनभुमी के लिए आरक्षित भुखंड को मालिकाना हक के लिए ठाणे जिल्हाधिकारी ने रिजेन्सी के बिल्डर को बिल्डिंग बनाने के लिए था । उसकी वजह से आरक्षित दफनभुमी की जगह के बदले टि.डी.आर. देने की मांग रिजेन्सी निर्माण कंपनी के सर्वेसर्वा महेश अग्रवाल इन्होंने मनपा प्रशासन से किया था । आखिरकार मनपा आयुक्त बालाजी खतगांवकर और विधायक ज्योती कालानी की मध्यस्थता में महेश अग्रवाल ने कब्रस्तान के लिए दो एकड़ आठ गुंठा और विद्युत केंद्र के लिए एक एकड़ जगह मनपा को एग्रीमेंट के जरिये देेंने का वादा किया था। पिछले साल ही दफनभूमी में दो शव दफन भी किये गए ।परंतु इस दफनभूमी को लेकर म्हारळ गाव के ग्रामवासियो और मुुसलिम समाज मे संघर्ष की स्थिति पैदा हो गयी थी,पुलिस ने माहौल को संभाल लिया था।तब ग्रामीणों ने विरोध करते हुए न्यायालय चले गए जिसकी वजह ये मुद्दा फिर से अधर में लटक गया था। परंतु दफनभूमी का आरक्षण विकास आराखाड़ा में होने की वजह से आज नही तो कल ये जगह मुस्लिम समाज को मिलेगा इसी आश में मुस्लिम समाज न्यायालय में अपनी लड़ाई लड़ रहे थे।परन्तु शुक्रवार को प्रसिद्ध हुए विकास आराखाड़ा इ. पी. भाग में कब्रस्तान आरक्षण को बदल कर पब्लिक युटिलिटी का आरक्षण डालने का प्रस्ताव किया गया है .।इस प्रस्ताव का मुस्लिम कब्रस्तान ट्रस्ट के 70 वर्षीय अध्यक्ष अब्दुल रशीद पटेल इन्होंने देखा तो उनके पैरों तलो की जमीन ही खिसक गई ।मनपा की महासभा ने सरकार के पास भेजे प्रस्ताव में आराखाड़ा ऐसा कुछ नमूद था ही नही , तो क्या भाजपा प्रेरित सरकार में किसी ब्यक्ति ने किया ,या मुश्लिमो के साथ भेदभाव किया जा रहा है इस बात पर चर्चा सुरु हो गयी है ।सूत्रों के मुताबिक महारल गाव में बिल्डर महेश अग्रवाल द्वारा बनाए जा रहे एटलांटिया नामक इमारत जिसमे एक-एक फ्लैट करोड़ो रूपये के है,ऐसे में यदि दफनभूमी वहां आया तो बिल्डर को करोडो का नुकशान उठाना पड़ सकता था, इसी के चलते दफन भूमि के आरक्षण में बदलाव किया गया।! बहरहाल मुस्लिम समाज का दफन भूमि हटाये जाने से मुश्लिम समाज आक्रमक भूमिका अपना सकता है।
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