• उमपा के अधिकारियों में गुटबाजी चरम पर !

    Reporter: fast headline india
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    उमपा के अधिकारियों में गुटबाजी चरम पर !

    दो गुटों में बटा पूरा अधिकारियों का महकमा !

     एक जो किसी कानूनी पचड़े में फंसे है,दूसरा जिनका प्रमोशन किन्ही कारणों से लड़का हुआ है !


    उल्हासनगर-उल्हासनगर मनपा में मागासवर्गीय भर्ती घोटाला प्रकरण शीतकालीन अधिवेशन में गूंज रहा है।इस प्रकरण में सहायक आयुक्त अलका पवार पर आक्षेप लगाया जा रहा है।मुझे बिना वजह तकलीफ दिया जा रहा है,इस भर्ती घोटाले में लगभग दर्जनों अधिकारी दोषी है,उनपर कार्रवाई क्यों नहीं कि जा रही हैं, ऐसा प्रश्न अलका पवार ने उपस्थित किया है।इस प्रकरण के कारण अधिकारियों में गुटबाजी पुनः चरम पर है।
    सन २००३ में मागासवर्गीय भर्ती घोटाला प्रकरण की अभी भी जांच प्रक्रिया शुरू है।स्व. पत्रकार विश्वास शेंडे द्वारा इस घोटाले का खुलासा करने के बाद असीम गुप्ता की एक सदस्यीय जांच में अनेक कर्मचारी व अधिकारी दोषी पाए गए हैं।लोकायुक्त द्वारा भी इस प्रकरण की जांच की गई थी मिस प्रकरण में सहायक आयुक्त अलका पवार द्वारा फर्जी कागजात प्रस्तुत करने का उल्लेख है।पिछले सर्वसाधारण सभा मे नगरसेविका शुभांगी निकम और नगरसेवक अरुण आशान ने इसी मुद्दे पर अलका पवार को तत्काल बर्खास्त करने की मांग आयुक्त राजेंद्र निंबालकर से किया था,इस बार के शीतकालीन अधिवेशन में भी अलका पवार का मुद्दा उठाया गया।सोशल मीडिया में भी इस विषय की चर्चा जोरों में शुरू है। इस संदर्भ में अबतक मौन अलका पवार आक्रामक हो गई हैं, उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति हो रही हैं, मेरे अनुभव के दाखिले पर आक्षेप किया जा रहा है।लेकिन केवल अनुभव इस पद के लिए शर्त न होने के कारण इस आक्षेप का कोई मतलब नहीं है।इस प्रकरण में ऐसे१२ अधिकारी है,जिनकी नियम के बाहर और गैर मार्ग से पदोन्नति की गई हैं, उनपर कोई कार्रवाई क्यों नहीं कि जा रही है,ऐसा प्रश्न उन्होंने महापौर और आयुक्त को पत्र लिखकर पूछा है।सोशल मीडिया पर भी अलका पवार ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।इस प्रकरण से अधिकारियों की नियुक्ति के संदर्भ में राजनीति और प्रशासकीय अधिकारियों की गुटबाजी बढ़ गई है।मनपा की प्रभारी सचिव प्राजक्ता कुलकर्णी के पास योग्यता और अनुभव होने के बावजूद उन्हें सचिव पद पर स्थाई नहीं किया गया है।उन्हें इस पद से हटाने के लिए अधिकारियों की एक लॉबी सक्रिय है।अग्निशमन विभाग में भी पूर्व विभाग और पश्चिम विभाग ऐसे दो स्वतंत्र अधिकारी नियुक्त करने के कारण यहां भी गुटबाजी दिखाई दे रही है।आरोग्य विभाग में भी सीनियारिटी को नजरअंदाज करके विनोद केणि की नियुक्ति की गई है।मनपा के जनसंपर्क अधिकारी पद पर युवराज भदाने ने जो अतिक्रमण, कर विभाग का अतिरिक्त भर संभाल रहे थे,उन्होंने कुछ समय तक कड़ी कार्रवाई की लेकिन बाद में वे भी विवादों के घेरे में आ गए।उनकी उपायुक्त पैड पर नियुक्ति की चर्चा होने के बाद अनेक नगरसेवकों ने अपना विरोध जताया है, इसके बाद आयुक्त राजेंद्र निंबालकर ने कार्यकारी अधिकारी के पद पर भदाने की नियुक्ति की।मनपा के अनेक विभागों पर भदाने का कंट्रोल रहे,ऐसा उद्देश्य था,इसकारण अधिकारियों का एक गुट नाराज हो गया है।अधिकारियों के इस विवाद के कारण प्रशासकीय कार्य में समरसता आना कठिन हो गया है।इसी में आयुक्त राजेंद्र निंबालकर एट्रोसिटी मामले में पुलिस और न्यायालय प्रक्रिया में अटके है।और अतिरिक्त आयुक्त विजया कंठे कथित तौर पर घूस मांगने के प्रकरण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।अब प्रशासन की विकट परिस्थितियों को ठीक करने का एक बड़ा संकट निर्माण हो गया है।
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