• बारूद के ढेर पर हैं उल्हासनगर, कल्याण और डोंबिवली ? सरकारी बाबू की जेब गरम कारखाने में सुरक्षा के नियमों उठाई जा रही है धज्जियाँ !

    Reporter: fast headline india
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    बारूद के ढेर पर हैं उल्हासनगर, कल्याण और डोंबिवली ? 

    सरकारी बाबू की जेब गरम  कारखाने में सुरक्षा के नियमों उठाई जा रही है धज्जियाँ !

    अन्य कारणों के चलते अभी तक 35 से 40 हुए हादसे !

    फैक्ट्री निरीक्षक की कमी की वजह से सभी कारखानों का निरिक्षण किया जाना मुश्किल !
     
     फाईल फोटो
    उल्हासनगर- जिस तरह से एक बाद एक हादसों लगता है उल्हासनगर, कल्याण और डोंबिवली ये ईलाके बारूद के ढेर पर हैं ? ऐसा ये घटनाओं से लगता है ! शहाण की सेंचुरी रेयॉन कंपनी में जहरीली गैस के रिसाव की घटना ने एक बार फिर कंपनियों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर बरती जाने वाली लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर किया है। इस घटना में एक मजदूर की दम घुटने से मौत हो गई और 11 मजदूरों को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।  रासायनिक जोन है इलाका  ऐसा नहीं है कि यह इस तरह की पहली घटना है। 
    उल्हासनगर,कल्याण, डोंबिवली, बदलापुर, मुरबाड, अंबरनाथ परिसर में बड़े पैमाने पर रासायनिक कंपनियां हैं। इनमें से कई कंपनियों में इस तरह गैस रिसाव के चलते मजदूरों के हताहत होने के हादसे हुए हैं। इसके बावजूद, आज भी इनमें सुरक्षा व्यवस्था लचर बनी हुई है। कई स्थानों पर कंपनियां रिहायशी इलाके के करीब हैं। ऐसे स्थानों पर खतरा हमेशा बना रहता है।  हफ्ते भर में बंद होनी थीं कंपनियां  मई 2016 में डोंबिवली स्थित प्रोबेस कंपनी में हुए हादसे के बाद राज्य के उद्योगमंत्री सुभाष देसाई ने घटनास्थल का दौरा किया था। उन्होंने घोषणा की थी कि डोंबिवली के अंदर और बाहर स्थित सभी रासायनिक औद्योगिक इकाइयों को किसी अन्य जगह पर भेजा जाएगा। देसाई ने बताया था कि बढ़ते रिहाइशी इलाके को देखते हुए केमिकल कंपनियों को अन्यत्र हिलाया जाना जरूरी हो गया है। उन्होंने यह भी घोषणा की थी कि शहर में इस तरह के सभी रासायनिक उद्योगों को एक हफ्ते के लिए बंद कर दिया जाएगा। विभिन्न सुरक्षा उपायों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण व जांच अभियान चलाया जाएगा। देसाई ने मामले की जांच कर दोषी के खिलाफ कार्यवाई करने का आदेश भी दिया था।  मुख्यमंत्री ने कही थी समीक्षा की बात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी दुर्घटना पर संवेदना जताई थी और विभिन्न अस्पतालों में भर्ती लोगों से मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री ने डोंबिवली एमआईडीसी स्थित 900 औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा समीक्षा की बात कही थी। मुख्यमंत्री और उद्योगमंत्री का आदेश उस समय महज मीडिया और अखबारों की सुर्खियां बनकर रहा गया और आज तक आगे कुछ नहीं हुआ है।  50 लोगों की हो चुकी मौत  डोंबिवली एमआईडीसी के करीब बड़ा रिहायशी इलाका है। पिछले कुछ सालों में बड़ी संख्या में इमारतों के बनने से लोगों की संख्या में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी हुई है। जानकारी के मुताबिक, डोंबिवली, कल्याण और आसपास स्थित कंपनियों में गैस रिसाव, धमाका होने, आग लगने और अन्य कारणों के चलते करीब 35 से 40 हादसे हुए हैं। इनमें करीब 50 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है और 250 से अधिक लोग गंभीर तौर पर जख्मी हुए हैं।  कंपनियां हजार, इंस्पेक्टर एक  कल्याण औद्योगिक सुरक्षा और स्वास्थ्य संचालनालय के अंतर्गत डोंबिवली, अंबरनाथ, बदलापुर, शहापुर, भिवंडी, मुरबाड, वाडा, मोखाडा तक की कंपनियां आती हैं। इस परिसर में एक हजार से अधिक कंपनियां हैं। बताया गया है कि इतनी कंपनियों पर संचालनालय के महज 4 अधिकारी नजर रखते हैं। अधिकारियों की कमी के चलते साफ है कि काम किस तरह से होता होगा। कई पद रिक्त पड़े हैं। फैक्ट्री निरीक्षक की कमी है। डोंबिवली के करीब 450 कारखानों के लिए सिर्फ एक फैक्ट्री निरीक्षक है। सभी कारखानों का निरिक्षण किया जाना उसके लिए मुश्किल काम है।  खुद कर लेते हैं ‘सेफ्टी ऑडिट’  इंस्पेक्शन विभाग में कई पद सालों से खाली हैं। कई कंपनियों में सेफ्टी ऑडिट नहीं किए जाने की भी बात बताई गई है। पता हो कि प्रति वर्ष कंपनी का सेफ्टी ऑडिट किया जाना जरूरी है लेकिन कंपनी की तरफ से उसमें भी अधिकारियों की मिलीभगत से कोताही बरती जाती है। इसके चलते नियमों की अनदेखी होती है। स्टाफ की कमी के चलते न तो सरकारी विभाग की तरफ से ‘सेफ्टी ऑडिट’ हो पाता है और न ही ‘थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन’ होता है। ऐसे में कई कारखानों में कारखाना धारक द्वारा खुद सेफ्टी ऑडिट किया जाता है।  सरकारी बाबू की जेब गरम  कारखाने में सुरक्षा को देखते हुए बॉइलर और रिऐक्टर को उचित जगह लगाना चाहिए। केमिकल को ठीक तरह से स्टोर किया जाना चाहिए। बॉइलर, रिऐक्टर और स्टोरेज की जगह खुली होनी चाहिए। कंपनी से निकलने वाले ‘केमिकल वेस्ट’ को नष्ट करने की उचित व्यवस्था की जानी चाहिए। कंपनी में फिल्ट्रेशन प्लांट होना चाहिए। प्रदूषण न हो, इस पर कंपनी मालिक की तरफ से उचित ध्यान दिया जाना चाहिए। ज्वलनशील केमिकल को अलग और उचित जगह रखा जाना चाहिए। आग से बचने और आपात स्थिति की सुरक्षा व्यवस्था ठीक होनी चाहिए। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, डोंबिवली के कई कारखानों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी की गई है। सरकारी अधिकारियों और फैक्ट्री निरीक्षक की जेब गरम कर कंपनी में नियमों को अनदेखा किया गया है। यह सब कुछ सालों से इसी तरह चलता आ रहा है।  परिवार का इकलौता कमाने वाला शख्स नहीं रहा  गुरुवार की सुबह जब संजय शर्मा अपने घर से निकले तो किसी को क्या पता था कि यह परिवार के साथ उनकी आखिरी सुबह होगी और सेंचुरी कंपनी में पाइप से हुए गैस रिसाव में उनकी मौत हो जाएगी। संजय परिवार में अकेले में कमाने वाले थे। वह तीन बच्चों- सूरज (1), सोनाली (2) और शिवा (6) तथा पत्नी नीरजा के साथ भाड़े के रूम में सेंचुरी कंपनी से 2 मिनट की दूरी पर रहते थे।  पत्नी नीरजा गृहिणी है और संजय के न रहने पर भविष्य को लेकर चिंतित है। शोक भरे स्वर में कहती हैं, ‘अब हमारा कौन है, जो हमें संभालेगा।’ संजय उत्तर प्रदेश के जिला आंबेडकर नगर के रहने वाले थे। इनके भाई तो हैं लेकिन सब अलग-अलग रहते हैं।  शुक्रवार देर शाम संजय का शव उनके घर वालों को सौंप दिया गया। संजय सेंचुरी कंपनी में ठेकेदार के यहां काम करते थे। लगभग 12 सालों से पगार भी 10 हजार के लगभग थी। सेंचुरी के अधिकारी ब्रिगेडियर मनोहर थामस ने बताया कि संजय की पत्नी को तुरंत 5 लाख की मदद दी गई है। पत्नी को ‘केजुअल लेबर’ के तौर पर कंपनी में काम पर रखा जाएगा और कंपनी की तरफ से परिवार को क्वार्टर दिया जाएगा। जबतक बच्चे दसवीं पास नहीं हो जाते, सेंचुरी के स्कूल में उन्हें नि:शुल्क शिक्षा दी जाएगी।  थामस ने बताया कि संजय के वेतन से भविष्यनिधि का जो पैसा कटता था, वह लगभग 4 से 5 लाख होगा। वह राशि भी उनकी पत्नी को ही मिलेगी।  प्रमुख घटनाएं  डोंबिवली का महाधमाका  27 मई, 2016 को डोंबिवली एमआईडीसी स्थित ‘प्रोबेस केमिकल कंपनी’ में बॉयलर का महाधमाका हुआ था। घटना में कंपनी पूरी तरह से तबाह हो कर मलबे में बदल गई थी। इस हादसे में 12 लोगों की मौत हुई थी और 183 जख्मी हुए थे। कंपनी में हुए विस्फोट की तीव्रता इतने जोर पर थी कि आसपास के करीब 5 किलोमीटर परिसर तक धमाके की आवाज सुनाई दी थी। एक तरह से ब्लास्ट की आवाज ने डोंबिवली वासियों को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया था। प्रोबेस कंपनी की धमकी का असर अगल-बगल की 5 से 6 कंपनियों में हुआ था और आसपास की कई इमारतों, घरों, शो रूम और दुकानों के शीशे चटक गए थे। कई इमारतों के ऊपर लगे पतरे उड़ गए थे और कुछ घरों के स्लैब गिर गए थे।  कंपनी के धमाके की तीव्रता इस कदर थी कि लोगों को पहले लगा था कि शायद भूकंप का झटका है। लोग घरों-दुकानों से निकलकर सड़क पर खुले में निकल आए थे। घटना के चलते कई वाहनों का भी नुकसान हुआ और सड़क से गुजर रहे लोग भी इमारत से गिरे शीशे, छप्पर, पतरे, लोहे के टुकड़ों की चपेट में आने से जख्मी हो गए थे। कई घरों के छप्पर उड़ गए, सामान और फर्नीचर पूरी तरह बिखर गया था और सामान टूट-फूट गया था। कंपनी में हुए ब्लास्ट के चलते लगी आग पर काबू पाने में 3 घंटे से अधिक का समय लगा था। आग से केमिकल युक्त धुआं आसपास के परिसर में लंबे समय तक काले बादलों की तरह छाया रहा था, जिससे तमाम लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा था।  19 नवंबर, 2017 की सुबह डोंबिवली एमआईडीसी स्थित ‘एलयूफिन’ नामक फैक्ट्री के भीतर गैस रिसाव की वजह से बॉयलर फट गया। इसके बाद फैक्ट्री में आग लग गई थी। सुबह का वक्त होने के कारण फैक्ट्री में ज्यादा लोग नहीं थे। इसलिए हादसे में सिर्फ एक व्यक्ति घायल हुआ था। ब्लास्ट के बाद फैक्ट्री के एक हिस्से में आग लग गई थी, जिस पर तकरीबन एक घंटे में दमकलकर्मियों ने काबू पाया था।  5 मार्च, 2016 को ‘अल्ट्रा प्योर केमिकल कंपनी’ में लग गई थी। आग की चपेट में आए कारखाने में कार्यरत 12 कामगार बाल-बाल बचे थे। 14 मई, 2014 को ‘केमस्टार कंपनी’ के डिस्टिलेशन यूनिट में आग लगी थी। घटना में एक की मौत हुई थी और 3 कामगार जख्मी हुए थे।  7 दिसंबर, 2013 को गायकर कंपाउंड स्थित एक केमिकल कंपनी के बॉइलर में विस्फोट हुआ था। घटना में 3 कामगारों की मौत हो गई थी और 2 जख्मी हुए थे। 31 अक्टूबर, 2012 को कलर बनाने वाली ‘नार्को केमिकल कंपनी’ में भीषण आग लगी थी। सौभाग्य से कोई भी जनहानि घटना में नहीं हुई थी। डोंबिवली स्थित कंपनियों में ‘घरडा केमिकल’, ‘विनायक टेक्सटाइल्स’, ‘अल्केमी लैबोरेटरीज’, ‘वर्स्टाइल केमिकल्स’, पायोनियर डाईंग, महेश टेक्सटाइल, तारकेम इंडस्ट्रीज, महावीर डाईंग, श्रीजी टेक्सटाइल्स, सनबीम मोनोकेम, आरती हेल्थकेयर इत्यादि कंपनियों में दुर्घटनाएं हुई हैं। 
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