• उमपा प्रशासन के विरोध में दो अलग-अलग जनहित याचिका हाईकोर्ट में हुई दाखिल !

    Reporter: fast headline india
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    उमपा प्रशासन के विरोध में दो अलग-अलग जनहित याचिका हाईकोर्ट में हुई दाखिल !

     उल्हासनगर-उल्हासनगर महानगरपालिका में फिलहाल असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण गंभीर विषयों के बारे में भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है ऐसी शिकायतें बढ़ती जा रही है ।अभी प्रशासन के विरोध में दो जनहित याचिका दाखिल की गई है। जिसके कारण प्रशासन और मनपा आयुक्त अड़चन में आ गए हैं। उल्हासनगर में महानगरपालिका की हद में स्थित वालधुनी नदी पर बन रहे वडोल पुल का काम पिछले ढाई वर्षों से रुका हुआ है ,जिसके कारण हजारों नागरिकों को अपनी जान मुट्ठी में लेकर जाना पड़ता है ।पुल के दूसरी साइड में अंग्रेजी और हिंदी माध्यम के दो स्कूल हैं जिसके कारण विद्यार्थी पालक वर्ग में भी चिंता का वातावरण फैला हुआ है ।इस विषय में स्थानीय नगरसेविका सविता तोरणे और समाज सेवक शिवाजी रगड़े ने ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई करने की बार-बार मांग की, अनेक बार भूख हड़ताल भी किया ,मगर मनपा प्रशासन और आयुक्त गणेश पाटिल ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की ,ऐसा आरोप शिवाजी रगड़े ने किया है। उन्होंने वडोल पुलसंघर्ष समिति की तरफ से मनपा प्रशासन के विरोध में जनहित याचिका दाखिल की है दूसरी जनहित याचिका समाज सेवक दिलीप मालवणकर ने प्रशासन के विरुद्ध में दाखिल किया है महापालिका के वादग्रस्त जनसंपर्क अधिकारी युवराज भदाणे की केबिन में महत्वपूर्ण दस्तावेज ,ब्लेंक चेक राज्य शासन के उपायुक्त का पहचान पत्र आदि मिलने से उनके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई थी, फौजदारी मामला भी दर्ज किया जाए ऐसी मांग मालवणकर ने किया था । इस संदर्भ में मालवणकर द्वारा प्रशासन और आयुक्त गणेश पाटिल के पास बार-बार पहल करने पर भी आयुक्त ने इस संदर्भ में किसी प्रकार का निर्णय नहीं लिया। इसी प्रकरण पर उन्होंने जनहित याचिका दाखिल किया है लेकिन उसके बाद भी न्यायालय की कार्रवाई टालने के लिए मनपा कर्मचारी महत्वपूर्ण कागजात को छुपा लिए थे लेकिन मालवणकर की सतर्कता के कारण इस मामले का पर्दाफाश हुआ है ।कुछ दिनों पहले मनपा के विधि विभाग के अधिकारी छाया डांगले और लिपिक दीपक ममतानी ने एक ठेकेदार के पास से स्टे आर्डर के लिए रिश्वत मांगी थी ।इस प्रकरण में दोनों को रिश्वत लेते एंटी करप्शन विभाग ने कार्रवाई करते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया था । इससे पता चलता है कि मनपा की विधि विभाग तक भ्रष्टाचार के कीड़े पहुंच गए हैं ऐसा स्पष्ट हो रहा है । मनपा के कुछ कर्मचारी इस रैकेट में शामिल है और इसी रैकेट के कारण ऐसे अनेक मामले प्रलंबित होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
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