• PWD विभाग के इंजीनियरों के नायाब कारनामो का हुआ पर्दाफाश !

    Reporter: fast headline india
    Published:
    A- A+
    PWD विभाग के इंजीनियरों के नायाब कारनामो का हुआ पर्दाफाश ! 

     ऑफिस में बैठकर बनाए गए डेवलपमेन्ट प्लान के कारण प्रशासकीय इमारत का कार्य अधर में लटका ! 

    सार्वजनिक बांधकाम विभाग का गैरजिम्मेदाराना कारनामा हुआ उजागर !

     प्लान के बीच से गुजरती बिजली के तार की वजह से कभी हो सकता है बड़ा हादसा ! 

    उल्हासनगर-उल्हासनगर में प्रशासकीय इमारत के निर्माण कार्य मे बिजली का खंभा और बिजली का तार आने से अड़चन आने के कारण यह बांधकाम कुछ महीनों से रुका हुआ है।सार्वजनिक बांधकाम विभाग ने जब यह प्लान तैयार किया तो उन्होंने बिजली के खंभे और विद्युत वाहिनी के बारे में विचार नहीं किया।बांधकाम जब आगे बढ़ने लगा तब यह बात उनके ध्यान में आया।इसका सीधा मतलब है कि PWD के विभाग के द्वारा प्लान ऑफिस में बैठकर बनाया गया है अब सवाल यह है कि जिनकी गलती की वजह से यह कार्य अधर में लड़का उनके ऊपर क्या कार्यवाही होती है कि नही यह देखने वाली बात है !


    उल्हासनगर में अनेक शासकीय कार्यालय है,पर वे सभी कार्यालय अनेक स्थानों पर बिखरे हुए हैं।अलग-अलग कार्यालयों में जाकर नागरिकों की फजीहत होती है।सभी कार्यालयों को एक स्थान पर लाया जाए, इसके लिए विधायक डॉ. बालाजी किणीकर ने महाराष्ट्र सरकार से पहल की थी।शासन ने प्रशासकिय इमारतों को बनाने के लिए मंजूरी दी और दो स्थानों पर प्रशासकीय इमारत बनाने के काम का सार्वजनिक बांधकाम विभाग को दिया।उल्हासनगर -४स्थित तहसील कार्यालय परिसर में सहायक दुय्यम निबंधक कार्यालय, बांध मापन कार्यालय, नागरी संरक्षण दल कार्यालय, दुय्यम निबंधक कार्यालय, राज्य उत्पादन शुल्क,शिधावाटप कार्यालय,और उल्हासनगर-३स्थित पवई परिसर में तहसील कार्यालय, तलाठी कार्यालय, सर्कल कार्यालय, सेतु कार्यालय,एसीपी कार्यालय, उपविभागीय कार्यालय, उप विभागीय कार्यालय, उप कोषागार कार्यालय जैसे अनेक कार्यालयों का समावेश रहेगा।इस कार्य के लिए १०करोड़ की निधि शासन ने मंजूर किया हैऔर साई समर्थ इंटरप्राइजेज नामक निजी कंपनी को यह काम दिया गया।लेकिन इस कार्य में आई अड़चन के लिए सार्वजनिक बांधकाम विभाग और निर्माण कार्य करने वाली कंपनी दोनो जवाबदार है।इस संदर्भ में उल्हासनगर के सार्वजनिक बांधकाम विभाग के उप कार्यकारी अभियंता श्रीकांत ढिलपे से पूछा गया तो उन्होने बताया कि यह प्लान पहले ही मंजूर हो गया था, और इसमें कुछ तकनीकी खामियाँ होने की बात उन्होंने मानी।बिजली के के खंभों और तारों को हटाने के लिए ३०से ४०लाख खर्च होंगे।यह निधि मंजूर होते ही कार्य शीघ्र ही शुरू की जाएगी।
  • No Comment to " PWD विभाग के इंजीनियरों के नायाब कारनामो का हुआ पर्दाफाश ! "