• एक साल बाद ऑपरेशन किये गए जगह से सात मीटर बैंडेज पट्टी निकले से डॉक्टरों में मचा हड़कंप ! मरीज ने डॉक्टर ऊपर लगाया गंभीर आरोप !

    Reporter: fast headline india
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     मरीज ने डॉक्टर ऊपर लगाया गंभीर आरोप ! 

     एक साल बाद ऑपरेशन किये गए जगह से सात मीटर बैंडेज पट्टी निकले से डॉक्टरों में मचा हड़कंप ! 

     डॉक्टर कि गलती से ऑपरेशन करते समय छोड़ी गई पाव मे कॉटन की पट्टी परिवार के लोगों ने किया आरोप ! 

     डॉक्टर गवाले कहा झूठा है सभी आरोप, झूठे आरोप कर रहे मरीज के विरुद्ध करूंगा मानहानी का केश ! 

     उल्हासनगर-  उल्हासनगर के एक डॉक्टर पर आरोप लगा है कि मरीज का ऑपरेशन तो कर दिया,लेकिन कॉटन कि पट्टी पाव से निकलना भूल गए, वह भी पूरे मामले का खुलासा एक साल बाद हुआ है,डॉक्टर द्वारा कि गई इस भूल से मरीज का चलना मुश्किल हो गया था , जिससे मरीज को दुबारा ऑपरेशन गुजरात के अहमदाबाद मे जाकर करवाना पड़ा है । फिर से जब ऑपरेशन किया गया तो पाव के अंदर से सात मीटर कॉटन की पट्टी निकली है , मरीज ने यह पट्टी एक साल पहले हुए डॉक्टर ने छोड़ी है ऐसा आरोप किया है। वही इस मामले में फोनिक्स हॉस्पिटल के डॉक्टर गवाले से बात किया गया तो उन्होंने सारे आरोप को सिरे से इनकार किया और कहा है वह खुद पट्टी की लैब टेस्ट करने की मांग करते ताकि सच सबके सामने आ सके और उन्होंने मरीज के खिलाफ मानहानि केश दर्ज करने की बात कही है !
     बता दे कि उल्हासनगर कैम्प 1 पोस्ट आफिस के पास रहने वाले अरुण रूपचंद धनवार अपने परिवार के साथ रहते है । एक वर्ष पहले उनके पैर मे काफी दर्द हो रहा था । इसका उपचार कराने के लिए उल्हासनगर कैम्प 4 के फोनिक्स हॉस्पिटल गए , क्यो की उसी हॉस्पिटल के लैब में उनकी लड़की काम करती थी इस लिए उन्हें लगा कि यहाँ पर हमारा ईलाज अच्छे से हो जाएगा फिर वहाँ पर डॉक्टर गवाले  ने अरुण के पाव का ऑपरेशन करने के लिए कहा गवाले के कहने पर अरुण ने दिवाली के पहले पाव का ऑपरेशन करवा लिया । 15 दिन तक अरुण अस्पताल में अपना ईलाज के लिए भर्ती थे । अरुण ने बताया कि उस समय अरुण के पाव मे डॉक्टर द्वारा कॉटन कि पट्टी बाती बनाकर डाली गई , जिससे रोज अंदर में बनने वाली मवाज को खींचकर बाहर निकाल दिया जाए । जब अरुण का ऑपरेशन किया गया उस समय तीन डॉक्टर थे और गवाले के साथ मिलकर सभी ने ऑपरेशन किया था । फिर दीवाली के एक दिन पहले अरुण को घर भेज दिया गया और फोनिक्स हॉस्पिटल से लगातार चार महीने तक पट्टी बदलने के लिए आदमी आते रहते थे और बीच मे अरुण खुद जाकर डॉक्टर को दिखाकर दवा लेकर घर आ जाते थे ,लेकिन फिर भी दर्द कम नही हुआ और पाव बल्कि भारी हो गया, फिर जख्म भी भर गया,परंतु दर्द कम नही हुआ । और यह सब में धीरे धीरे एक साल बीत गया एक महीना पहले अरुण अहमदाबाद के नाडियाड शहर में पी डी पटेल हॉस्पिटल मे दिखाने गए ,यह एक आयुर्वेदिक हॉस्पिटल है डॉक्टर ने 15 दिन दवा और मलहम देकर वापस भेज दिया और जाओ यह ठीक हो जाएगा,एक बार वापस दिखाने के लिए आ जाना । जब वापस वहा पर अरुण वापस गए तो डॉक्टर ने कहाँ कि लाओ पैर अब देखता हूँ , लेकिन पूरी तरह से सूजन कम नही हुआ था इस डॉक्टर हैरान थे , उसी जगह पर तत्काल ऑपरेशन कर दिया ,यह ऑपरेशन लगभग ढाई घंटा चला और ऑपरेशन आन कैमरा किया गया चीरा मारने के बाद डॉक्टर हैरान हो गए उसके अंदर कॉटन की साथ मीटर पट्टी निकली और दूसरे दिन ही अरुण अपने घर वापस आ गए । अरुण कि लड़की हर्षा धनवार जब उल्हासनगर के डॉक्टर गवाले को जाकर यह बात बताई की आप से गलती हो गयी है और ऑपरेशन करते समय आप लोग कॉटन की साथ मीटर पट्टी भूल गए थे जिसके कारण आज तक मेरे पिताजी का पाव ठीक नही हुआ था इस डॉक्टर गवाले ने साफ कह दिया कि तुम्हरे पिता जी ने मेरे यहाँ से कोई ऑपरेशन नहीँ करवाया तुम झूठ बोल रही हो इस पर अरुण की लड़की अचंभित रह गई कि डॉक्टर के झूठ  बोल रहा है जबकि अरुण के पास फोनिक्स हॉस्पिटल के सारे कागजात इलाज के रखे हुए है और अरुण पर सारा मामला न्यायलय मे दाखिल करने वाले है । वही पूरे मामले स्थानीय पत्रकारों ने फोनिक्स हॉस्पिटल के डॉक्टर गवाले से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि हमने उनके पैर का ऑपरेश किया था एक साल पहले उसके बाद डिस्चार्ज लेने के बाद पेशेंट एक भी बार अस्पताल में आकर मुझसे नही मिले इस दरम्यान उन्होंने किससे बाहर इलाज करवाया होगा तो उसकी मुझे जानकारी नही है,रही बात की बैंडेज पट्टी की तो एक साल तक किसी के बाड़ी में पट्टी रहती है तो उसके इन्फेक्शन से अब तक मरीज की मौत हो सकती थी या उसका पैर काटने की नोबत आ जाती है वीडियो जिस तरह से पट्टी खिंची जा रही है वह पट्टी ज्यादा से ज्यादा सात आठ तीन पुरानी दिखती है क्यो यह कॉटन की पट्टी तीन महीनों बाड़ी में डिस्ट्रॉय होना स्वाभाविक है और उसका इंफेक्शन सामने आ जाना चाहिए, ऐसा गवाले कहा है उन्हें यह भी कहा कि पट्टी की सरकारी लैब में टेस्ट कराया जाना चाहिए ताकि सच बाहर आ सके जो भी दोशी हो उसपर कार्यवाई हो रही मेरे ऊपर किये झूठे आरोप का तो उसके किये हम मरीज के ऊपर मानहानी का केश करने वाले है ! वही इसमें एक कड़ी सामने और आया है हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के बाद आलम नामक ब्यक्ति घर पर आकर पट्टी करता था और अनिल करके डॉक्टर है इन्होंने भी घर पर अरुण का ईलाज किये जाने की जानकारी सामने आई है ऐसे में क्या वह पट्टी इनलोगो के इलाज के दौरान तो नही छोड़ी गई है ऐसा एक बड़ा सवाल है क्यो की अरुण जिस आलम से घर पर अपना पट्टी बदलवाते थे उसके पास इस काम को करने का कोई इस्पीरियन्स नही है न उसको इस काम की कोई कोर्स नही किया है ऐसा खुद पत्रकारों आलम ने ही बताया है, डॉक्टर अनिल जो अब कही दूसरी जगह काम कर रहे है इस लिए उनसे मुलाकात नही हो पाया है,ऐसे इस कड़ी का किरदार क्या था वह तो आने वाले समय पर सामने आएगा जब यह जांच कानूनी प्रक्रिया के द्वारा किया जाएगा !बहरहाल इस मामले का सच का पूरे शहरवासियों को इंतजार रहेगा क्यो की दोनो पक्ष एक दूसरे पर आरोप कर रहे है,मामले का सच क्या है यह एक बड़ा सवाल है ?
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