• साई पार्टी की बागी नगरसेविका को शिवसेना बनाया अपना महापौर पद का उम्मीदवार ! सत्ता धारियों की फुट का फायदा उठाने की जुगत में शिवसेना !

    Reporter: fast headline india
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    साई पार्टी की बागी नगरसेविका को शिवसेना बनाया अपना महापौर पद का उम्मीदवार ! 

     राज्य के दो मंत्रियों की प्रतिष्ठा लगी दांव पर ! 

     काटे की टक्कर होने की उम्मीद !

     उल्हासनगर-उल्हासनगर में महापौर पद चुनाव में शिवसेना ने साई पार्टी की ज्योति भटिजा को अपना उम्मीदवार बनाकर सत्ताधारी के गठबंधन में सेंध लगाकर सबको हैरान कर दिया है इसको देखते हुए यह महापौर चुनाव काफी हंगामेदार होना तय माना जा रहा है ! वही भाजपा की तरफ से ओमी कलानी व डिम्पल ठाकुर ने अपना नामांकन भरा है ! 
    गौरतलब हो कि यह कयास पहले से ही लगाया जा रहा था कि साई पार्टी के सात नगरसेवक इस महापौर चुनाव में पार्टी से बगावत करने वाले है,उसी का फायदा शिवसेना लेने के लिए जुटी है और साई पार्टी के बागी ज्योती भटिजा नगरसेविका को अपनी पार्टी की तरफ से महापौर पद के उम्मीदवार के रूप में उतारा है, शिवसेना की इस चाल से भाजपा साई पार्टी के गठबंधन को बड़ा झटका लगा है ,अब भाजपा से कोई फुटकर उधर न जाय इस लिए सभी नगरसेवकों एक साथ सबको पिकनिक के लिए बाहर भेज दिया गया है यह सब चुनाव के दिन यानी 28 सितम्बर को शहर में आएंगे तो वही शिवसेना ने भी अपने सभी नगरसेवकों व सहयोगियों को भी पिकनिक पर लेकर गई है ताकि उनमें से कोई खिसक न जाय इस लिए सभी पार्टियों अपने अपने नगरसेवकों पर नजर बनाए रखने का जुआड किया है, बहरहाल 28 सितम्बर का ताज किसके माथे पर सजता है यह देखने के लिए शहरवासियों को अभी इंतजार करना होगा और कौन बिकता है कौन खरीदता है यह सब भी उसी दिन सामने आएगा किस जुआड कामयाब हुआ और किसका जुआड हुआ फेल सब 28 को चुनाव के बाद साफ हो जाएगा ! राजनीती में "शह और मात" के इस खेल में कालानी को पटखनी देने के लिए राजनीतिक प्रयास किया जा रहा है बावजूद उनका तीर बार-बार फेल होता जा रहा है, साईपक्ष के 7 नगरसेवकों को जीवन सहित सत्तापक्ष के खिलाफ बगावत के मूड में आ गए है।आगामी 2019 में होने वाले लोकसभा व विधानसभा चुनाव में शिवसेना-भाजपा का यदि गठबंधन नही हुआ तो कल्याण लोकसभा सीट पर शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के सामने भाजपा के राज्य मंत्री रविन्द्र चौहान चुनावी अखाड़े में उतर सकते है,इसी बीच यदि उमपा में शिवसेना का महापौर बना तो इसका सीधा फायदा लोकसभा व विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा,देखा जाए तो वरिष्ठ नेताओं के लिए महापौर पद बहुत छोटा है परन्तु इसी महापौर पद पर दो बड़े चुनाव भी डिपेंड करते है इसलिए भाजपा-शिवसेना दोनो नेता उमपा के महापौर सीट पर परचम लहराने के लिए साम-दाम-दंड-भेद की नीतियां अपनाने में कोई-कोर कसर नही छोड़ना चाहते है।
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