• उल्हासनगर मनपा का रिक्स बेस प्लान के नाम पर हुए घोटाले हुआ पर्दाफाश ! 20 प्लान पास करवाने आर्किटेक्ट लायसन्स नही हुआ है रिनीव !

    Reporter: fast headline india
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    उल्हासनगर मनपा का रिक्स बेस प्लान के नाम पर हुए घोटाले हुआ पर्दाफाश !

    20 प्लान पास कराने वाले आर्किटेक्ट लायसन्स नही हुआ है रिनीव !

    नियमो की धज्जियां उड़ाकर अपनी जेबें गरम कर भ्रष्ट अधिकारी ने किया यह कारनामा ! 

    करोड़ों रूपए के राजस्व का लगाया जा रहा चुना ! 

    उल्हासनगर- उल्हासनगर शहर के बारे में एक कहावत प्रसिद्ध है कि यहां कुछ भी हो सकता है। यह कहावत अब सच भी हो रहा है। क्योंकि भ्रष्टाचार के दलदल में डूबे मनपा प्रशासन के रोज नित नए कारनामे सामने आते रहते हैं। परंतु इस बार कोई छोटा-मोटा नहीं, बल्कि एक बड़ा घोटाला उजागर हुआ है जिससे साफ पता चलता है कि किस तरह मनपा के चंद अधिकारी नियमो को ताक पर रखकर प्लान पास कर रहे हैं और सरकार को भी करोड़ों रूपए के राजस्व का चूना लगाया रहे है। इसमें कुछ राजनेताओं, बिल्डरों, ठेकेदारों और मनपा अधिकारियों की मिलीभगत से इस घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है । 
    गौरतलब हो कि रिस्क बेस अप्रूवल यानी धोखादायक के अनुमोदन के तहत 200 स्क्वायर मीटर की जगह पर निर्माण को पास करने का अधिकार सरकार ने आर्किटेक्ट यानी वास्तु विषारदों को दिया है। जिसमें जी प्लस वन यानी पार्किंग और एक मंजिल, अथवा जी प्लस वन यानी ग्रांऊंड प्लस वन (तल मंजिल व एक मंजिल) बनाना है परन्तु इसका जमकर दुरूपयोग हो रहा है। अपने निजी फायदे के लिए 1-1 मंजिल अतिरिक्त पास कर रहे हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितना बड़ा ‘‘झोल’’ किया जा रहा है और किस तरह भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है। यह तो सबको पता ही है कि लंबे अरसे जो मनपा ने उल्हासनगर के कई आर्किटेक्ट के लायसेंस रिन्यू नहीं किए हैं। मतलब लासेंस का नवीनीकरण नहीं किया गया है। केवल कुछ आर्किटेक्ट के लायसेंस रिन्यू किए गए हैं। ऐसे में कल्याण, अंबरनाथ और उल्हासनगर के कुछ आर्किटेक्ट की सेवाएं ली जाती हैं। गौर करने वाली बात यह है कि 30 प्लान पास करने की सूचना विश्वस्त सूत्रों द्वारा मिली है, जिसमें से एक नहीं, दो नहीं, बल्कि पूरे 24 प्लान एक ही आर्किटेक्ट ने पास किए हैं। जिसका नाम है शरद जोगलेकर तो दूसरे आर्किटेक्ट हैं दीपक सिंह खालसा, जिन्होंने 3 प्लान पास किए हैं। स्वपन्लि वाघ ने 2 और निलेश भोजवानी ने एक प्लान। इस पूरे प्रकरण पर ध्यान दे तो बहुत बड़ा खुलासा सामने आ रहा है कि भ्रष्टाचार की किस तरह हदें पार कर दी गई हैं। सूत्रों द्वारा जो पुख्ता जानकारी मिली है, वह दिलचस्प भी है और दुखद भी महाराष्ट्र सरकार की एक अधिकृत वेबसाइट है - ब्लिडिंग प्लान मैनेजमेंट सिस्टम यानी (बीपीएमएस) जहां आर्किटेक्ट को पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) करना पड़ता है और निवेदन भी आॅनलाइन करना पड़ता है। जिसकी अनुमति भी अधिकारिक रूप से दी जाती है। उसके बाद मालिक या पंजीकर्ता को वार्ड आॅफिस का जूनियर इंजीनिअर पैसे भरने का चलान देता है। इस वेबसाइट पर उल्हासनगर मनपा ने खुद को आज तक रजिस्टर्ड नहीं किया है। सारा काम मैन्यूअली और आॅफलाइन हुआ है। जबकि नियमानुसार रूल नंबर 13 (सी) के हिसाब से पूरा सिस्टम बीपीएमएस पर एकीकृत यानी इंटीग्रेट होना चाहिये। सबसे बड़ा आश्चर्य तो इस बात का है कि अंबरनाथ जैसी छोटी नगरपालिका ने इस वेबसाइट पर खुद को पंजीकृत किया है लेकिन उल्हासनगर मनपा ने अभी तक नहीं किया है इसके पीछे का कारण एक मात्र है ! वह है सबसे बड़ा घोटाला तो यह हुआ है कि 200 स्क्वाइर मीटर की अनुमति दी गई है। जबकि किसी का क्षेत्र 200 स्क्वाइर मीटर से ज्यादा है तो उसकी माप को कम दिखाकर उसका प्लान पास किया गया है। इतना ही नहीं, एक सनद पर, एक प्राॅपर्टी कार्ड पर दो हिस्से कर दो प्लान पास किए गए हैं। सनसनीखेज बात तो यह है कि जो 30 प्लान पास किए गए हैं, उनके स्ट्रक्चर इंजीनिअर की पोल बिल्कुल साफ तरीके से खुल रही है। इन 30 में से 20 प्लान में राजेंद्र सावंत स्ट्रक्चर इंजीनिअर हैं। इसके अलावा कविता लक्ष्मण कटारिया - 3 प्लान, डी.जे,कोटवानी - 2 और मुकेश प्रथियानी - 1 प्लान के स्ट्रक्चर इंजीनिअर है। डीसी रूल के नियम के मुताबिक से रजिस्टड स्ट्रक्चर इंजीनिअर होना निहायत जरूरी है। परंतु राजेंद्र सावंत का लायसेंस रिन्यू नहीं हुआ है। कितना अजीब लगता है लेकिन सत्य यह है कि सावंत ने 20 प्लान पास किए हैं जबकि उनका लायसेंस रिन्यू ही नहीं हुआ है। साथ ही कोटवानी का लायसेंस भी रिन्यू नहीं हुआ है। और सबसे चौकाने वाली बात यह है कि मुकेश प्रथियानी नाम का कोई स्ट्रक्चर इंजीनिअर है ही नहीं ! तो मुकेश प्रथियानी आखिर है कौन ? रही बात कविता कटारिया की, तो उनके पास ऐसोसिएट मेंबरशिप का लायसेंस है। वह केवल चार्टर्ड इंजीनिअर की प्रेक्टिस का है, न कि स्ट्रक्चर इंजीनिअर के रूप में चल सकता है लेकिन उन्होंने स्ट्रक्चर इंजीनिअर के रूप में हस्ताक्षर किए हैं। इस पूरे प्रकरण में पारदर्शिता लाने के लिए और इनके जवाब हासिल करने के लिए उल्हासनगर के एक प्रसिद्ध इंजीनिअर ने गत 16 अक्टूबर को नए मनपा आयुक्त अच्युत हांगे को एक ई मेल भेजा, जिसमें उन्होंने सारे प्रकरण के बार में उल्लेख किया था। आयुक्त महोदय ने उस ई मेल को पढ़ा और एकनाॅलेज कर अपने मातहत अधिकारी को भेज दिया। परंतु इसके ठीक एक दिन बाद इस ई मेल की जो मूल प्रति (ओरीजिनल काॅपी) है, वह सोशल नेटवर्किंग पर वाॅयरल हो गई। इससे साफ पता चलता है कि उल्हासनगर मनपा में कितना बड़ा भ्रष्टाचार है और कोई गोपनीयता नहीं ! यानी कोई भी व्यक्ति कहीं से भी आकर कोई भी महत्वपूर्ण कागज बिना अनुमति लिए मनपा कार्यालय से ले जा सकता है और वाॅयरल कर सकता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि मपना प्रशासन पूरे तरीके से एक भ्रष्ट तंत्र बन चुका है, जहां कभी भी, कुछ भी हो सकता है !
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