• उल्हासनगर महापालिका के शिक्षण मंडल ने सरकार के आदेश की उड़ाई धज्जियां ! विद्यार्थियों के मिलने वाले सामानों की दलाली का है यह जुआड !

    Reporter: fast headline india
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    उल्हासनगर महापालिका के शिक्षण मंडल ने सरकार के आदेश की उड़ाई धज्जियां !  

     भाजपा सरकार के आदेश को भाजपा के सत्ताधारियों बनाया मजाक !  

     भाजपा सरकार की ठेकेदारी हुई दमदार ! 

     उल्हासनगर -  उल्हासनगर महापालिका के कामचोर शिक्षण मंडल ने फिर से एक बार सरकार कर नियोजन विभाग के अध्यादेश को ठेंगा दिखाते हुए नियमो के विरुद्ध जाकर ठेकेदारो के द्वारा शिक्षण मंडल के विद्यार्थीयो के मिलने वाला सामान को खरीदा जाएगा . इस विषय को स्थायी समिती ने मान्यता दे दिया है . दिसम्बर २०१६ में विविध कल्याणकारी योजनाओ में मिलने वाले सामान को बन्द करके वह पैसा सीधा विद्यार्थियों के खाते में जमा करने का सरकार ने अध्यादेश निकाला था.             
    दिसम्बर २०१६ में महाराष्ट्र सरकार के नियोजन विभागा ने एक शासन निर्णय लिया. इस शासन निर्णय से शासन के विविध विभाग, स्वायत्त संस्था इत्यादि को कोई भी सामान खरीदी न करके उसको मिलने वाले लाभ का पैसा सीधा लाभार्थी के खाते में जमा करने का आदेश दिया था. इसके चलते लाभार्थी को उत्तम दर्ज़े के सामान सस्ते दर पर खरीद लेते थे.इसी लिए २०१७-१८ में लाभार्थी को सीधा फायदा मीले इस लिए सभी के आधार कार्ड से जुड़े बैंक के खाते खोलने का आदेश निम्म सरकारी विभाग के द्वारा दिया गया था.              परन्तु भ्रष्टाचार कीचड़ से सराबोर उल्हासनगर महापालिका के शिक्षण मंडल ने दिसम्बर महीने के बाद होने पर भी चार महिनो में बँक में विद्यार्थीयो के एक भी खाते खोले नही गए और २०१७ में सभी सामान ठेकेदार के द्वारा ही खरीदा गया था.उसके बाद ही शिक्षण मंडल ने विद्यार्थीयो के खाते बैंक में खोल देना चाहिए था , परन्तु ऐसा हुआ नही और शिक्षण मंडल के कर्मचारी और अधिकारियों ने ठेकेदारो से मिलने वाली दलाली बंद न हो इस लिए २०१८ में भी विद्यार्थीयो के बैंक में खाते खोले नही गए है.               ऐसा मामला होने के बाद भी शिक्षण मंडल के निम्म दर्जा के शिक्षण लेने वाले गरीब बच्चों के हमी मसीहा है यह दिखाने के लिए सत्ताधारियों ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक साहित्य को ठेकेदारों के द्वारा ही बंटवाने प्रस्ताव स्थायी समिती में लाया है .इस प्रस्ताव को नियोजन विभाग के आदेश से अटकते देखकर प्रशासन ने इस प्रस्ताव को बचाने के लिए महासभा में ले गए जहाँ पर सत्ताधारी और विपक्ष ने इसे बहुमत से पास किया है . परंतु यह प्रस्ताव ही गलत है क्यो की शासन के निर्देश के हिसाब से यह पैसा लाभार्थी विद्यार्थियों के खाते में जमा होना चाहिए इस विषय में निवेदन महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेना के मनोज शेलार इन्होंने पालिका आयुक्त अच्युत हांगे इनको दिया है. इस विषय मे पालिका आयुक्त अच्युत हांगे और लेखाधिकारी विकास चव्हाण इनसे संपर्क साधने का प्रयत्न किया गया परंतु संपर्क नही हो सका.  विद्यार्थी संख्या पर भी पहले से ही है विवाद !           उल्हासनगर  महापालिका के शिक्षण मंडल में ५२०० विद्यार्थी शिक्षण ले रहे है ऐसी जानकारी मनपा के द्वारा बनाये गए प्रस्ताव में लिखा गया है. प्रत्यक्ष में कितने विद्यार्थी शिक्षण ले रहे है, जब इस विषय पर शिक्षण समिती सभापती रवी जग्यासी इनसे सवाल किया गया तो उनका कहना था कि प्रशासन सहित मुख्यध्यापक मिलकर भ्रष्टाचार कर रहे ऐसा उन्होंने आरोप किया है.
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