• शिवसेना के गढ़ में सेंध लगाने जुटे विपक्षी दल ? वर्तमान सांसद से स्थानीय जनता है नाराज !

    Reporter: fast headline india
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    शिवसेना के गढ़ में सेंध लगाने जुटे विपक्षी दल ? 

    2019 लोकसभा चुनाव में कल्याण  सीट पर किसका फरायेगा झंडा ?

    वर्तमान सांसद शिंदे के साढ़े चार के कार्यकाल से स्थानीय जनता है खफा !

     कल्याण- कल्याण के ठाणे जिला का सबसे ज्यादा चर्चित कल्याण लोकसभा सीट पर शिवसेना वर्षो से अपना भगवा फहराया हैं मगर 2019 के चुनाव में चित्र कुछ बदलता नजर आएगा ऐसी चर्चा है । भले ही भाजपा सेना की युति हो जाए, मगर उन्हें टक्कर देने के लिए अब राष्ट्रवादी कांग्रेस और भाजपा अपने मजबूत उमीदवार के साथ कमर कसकर तैयार है । इसलिए लोकसभा आम चुनाव में शिवसेना के लिए यह मुश्किल भरा डगर हो सकता हैं । कांटे की टक्कर देखने को मिल सकता है । राष्ट्रवादी कांग्रेस अपना दमखम दिखा पाएगी ? शिवसेना का बालेकिला साबूत रहेगा या ढह जाएगा ? यह तो चुनाव के बाद पता चलेगा लेकिन उसके पहले राजकीय गलियारों के चर्चे मजबूत उम्मीदवार को लेकर मैदान में उतारने की तैयारी से पसीने जरुर छुटवाएंगे यह भी इस बार तय है ।
     कल्याण लोकसभा सीट पर वर्षो से शिवसेना का राज रहा है । इसलिए शिवसेना मे लोकसभा चुनाव को लेकर आत्मविश्वास छलक रहा है । लोकसभा चुनाव को लेकर हलचल शुरू हो चुका हैं, शिवसेना के सामने मजबूत उम्मीदवार उतारने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस ने बड़ी तैयारी की है जिसका खुलासा आने वाले समय में होगा । साथ ही राष्ट्रिय पार्टियों में भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रिय कांग्रेस , शिवसेना और राष्ट्रवादी मैदान में उतरने को तैयार है । शिवसेना के वर्तमान सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे कल्याण लोकसभा क्षेत्र में विकास काम करने का दावा करते हुए आत्मविश्वास से भरे है । मगर आज भी नागरिक पीने के पानी के दरदर भटक रहे है, सड़के खराब, अस्वच्छता, आरोग्य असुविधा और रेलवे समस्याए दूर नहीं होने से लोगो में नाराजगी दिखाई देती हैं । कुछ ऐसे कार्यक्रम जरुर किए जिससे वर्ष भर शिंदे चर्चित रहे । मगर यह चर्चाएँ वोटो में तब्दील होंगी क्या ? यह भी बड़ा प्रश्न है । शिवसेना के मित्र दल भाजपा ने कभी भी कल्याण लोकसभा क्षेत्र में ध्यान देने की जहमत नहीं उठाई , कई वर्षों से बाकी विपक्षी दल भी इस क्षेत्र से नदारद रहे । हालांकि शिवसेना और भाजपा की स्थानीय नेताओं के बीच एक अलग समझौता है। पालकमंत्री एकनाथ शिंदे पुत्र डॉ. श्रीकांत शिंदे को जिताने के लिए अब कौन सा रामबाण का उपयोग करेंगे यह तो आने वाला समय ही बताएगा, भाजपा इतनी आसानी से अब कल्याण लोकसभा सीट को छोड़ने के लिए अब शायद तैयार नही होगी । इसलिए शिवसेना का बालेकिला भेदने की तैयारी में भाजपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस लग गई हैं । मनसे नेता प्रमोद ( राजू ) पाटिल के लाखों समर्थक डोंबिवली, कल्याण ग्रामीण, उल्लासनगर, अंबरनाथ, कल्याण पूर्व-पश्चिम में है । पहले भी स्थानीय चुनावों में शिवसेना मनसे की अंदरूनी युति देखने को मिली है । इसलिए पलड़ा तो शिवसेना का ही भारी है । मगर राष्ट्रवादी कांग्रेस को कमजोर समझना शिवसेना को भारी पड़ सकता है । साथही विकास कामों के अभाव में जनता बदलाव लाना चाहेगी । क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में वाटर गटर की सुविधाएं नहीं मिलने से अनेक शिवसैनिकों में ही नाराजगी है ।
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     शिवसेना को छोड़ बाकी सभी पार्टियों द्वारा कल्याण लोकसभा सीट के लिए ताकतवर उमीदवार की तलाश शुरू हो चुकी हैं । राष्ट्रवादी कांग्रेस की तरफ से ठाणे जिला के पूर्व पालकमंत्री गणेश नाईक , कल्याण के पूर्व सांसद आनंद परांजपे का नाम चर्चित हैं । अगर भाजपा और शिवसेना की युति नही होती तो भाजपा की तरफ से मुरबाड के विधायक किसन कथोरे और राज्यमंत्री रविन्द्र चव्हाण, भिवंडी के भाजपा से वर्तमान सांसद कपिल पाटिल और पूर्व मंत्री जगन्नाथ पाटिल के नाम की चर्चा है | वहीं इन दोनों राष्ट्रीय दलों की सहयोगी मुख्य राजनीतिक दल शिवसेना और राष्ट्र्वादी कांग्रेस पार्टी में भी भरपूर उत्साह देखने को मिल रहा है । इन चार दलों के अलावा अन्य राजनीतिक दलों ने भी अपने संभावित उम्मीदवार तलासना शुरू कर दिए है । राष्ट्र्वादी कांग्रेस और राष्ट्रीय कांग्रेस का गठबंधन नही होता है तो सभी के उम्मीदवार चुनावी समर में उतरेंगे जिसकी तैयारी भी शुरू है । कांग्रेस की ओर से स्थानीय नेता संतोष केणे का नाम सामने आया है । 
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     कल्याण-डोंबिवली में अनेक कार्यक्रमो में बड़े नेताओ की उपस्थिति दर्शाती है कि चुनाव का आगाज हो चुका है । देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी , राज्य के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फ़डनवीस, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे, केन्द्रीय मंत्री रामदास आठवले , मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे और शालिनी ठाकरे कल्याण में आ चुके है तो पूर्व उपमुख्यमंत्री अजितदादा पवार, माथाडी कामगार नेता गुलाबराव जगताप और राष्ट्रवादी प्रदेशाध्यक्ष जयंत पाटिल के साथ जनवरी माह में राष्ट्रवादी प्रमुख शरदचन्द्र पवार भी कल्याण में दौरा पर आएंगे । साथ ही पार्टियों द्वारा कार्यकर्ता मिलन सम्मेलन एवं समीक्षा बैठक भी दिखाई देने लगा है । 
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     सेना-भाजपा नेताओं के परस्पर विरोधी बयानों के चलते 2019 के लोकसभा चुनाव में अगर भाजपा-शिवसेना की युति नही होती है तो कल्याण लोकसभा सीट पर कांटे की टक्कर देखने को मिलेगा । शिवसेना भाजपा एक दूसरे को हराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा देंगी । इसका फायदा सीधे तौर पर राष्ट्रवादी और कांग्रेस को मिल सकता है । ठाणे और पालघर लोकसभा सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस और कल्याण और भिवंडी लोकसभा सीट कांग्रेस के पाले में जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है । वहीं कांग्रेस और राष्ट्र्वादी के नेताओं में एक दूसरे से नरम व्यवहार के चलते गठबंधन तय माना जा रहा है ।
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    कल्याण लोकसभा सीट में कलवा-मुंब्रा, कल्याण ग्रामीण, डोंबिवली, कल्याण पूर्व, उल्हासनगर और अंबरनाथ छह विधासभा सीट शामिल है। कलवा - मुम्ब्रा से जितेंद्र आव्हाड औरउल्हासनगर से ज्योती पप्पू कालानी राष्ट्रवादी के विधायक हैं । हालांकि ज्योती कलानी के बहू भाजपा की नगरसेविका एवं उल्हासनगर की महापौर है ।डोंबिवली से भाजपा के रविन्द्र चव्हाण विधायक एवं मंत्री है, कल्याण पूर्व से निर्दलीय चुनाव जीतकर विधायक गणपत गायकवाड अब भाजपा के खेमे में शामिल हैं । कल्याण ग्रामीण से सुभाष भोईर और अंबरनाथ से डॉ.बालाजी किणिकर दोनों शिवसेना के विधायक है । 
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     लगभग 19 लाख मतदाताओं वाली कल्याण लोकसभा के अंतर्गत करीब 40 प्रतिशत हिंदी भाषी और लगभग 40 प्रतिशत ही मराठी मतदाताओं की संख्या है । 20 प्रतिशत में साउथ इंडियन एवं गुजराती अन्य मतदान का समावेश है । अन्य में करीब 15 प्रतिशत मुस्लिम मतदारो की संख्या है ।उत्तर भारतीय समाज फेसबुक और व्हाट्सअप सोशल मीडिया साइड पर उत्तर भारतीय उमीदवार देने की मांग कर रही हैं । 
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    2014 लोकसभा चुनाव में केंद्र सरकार द्वारा मतदाताओं से किए वादा पूर्ण नही करने से लोगो में नाराजगी है । नोट बंदी, जीएसटी लागू करने के चलते सरकार विरोधी लहर दिखाई दे रही है । भाजपा का हुकुम का एक्का मतलब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर अब समाप्त हो गई हैं । भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जादुई करिश्मा अब फेल होने लगा है । इसलिए मराठी - साउथ इंडियन, मुस्लिम और उत्तर भारतीय वोटो पर कांग्रेस की नजर है । साथही हालही में हुए 5 राज्यों के चुनाव में तीन राज्यो में कांग्रेस की सरकार बनी जिससे कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं ।
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