• रिश्वतखोर मनपा अधिकारी अपनी बदली रुकवाने के जुआड में अवैध निर्माणकर्ताओं से कर रहा है दुगुनी वसूली ?

    Reporter: fast headline india
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    रिश्वतखोर उमपा अधिकारी अपनी बदली रुकवाने के जुआड में अवैध निर्माणकर्ताओं से कर रहा है दुगुनी वसूली ?
    मंत्रालय के मुख्य सचिव के आदेश की उड़ाई जा रही है खिल्ली !

    नगरविकास सचिव के अधिकारी तक पहुचाई जा रही बदली रोकने के लिए रिश्वत ?

    नियमो की धज्जियां उडाकर दिए गए अजीत गवारी के प्रमोशन से मनपा प्रशासन उठ रही उंगलिया !

    उल्हासनगर-उल्हासनगर महानगर पालिका के अवैध बांधकाम निष्कासन विभाग प्रमुख पद पर बैठे अधिकारी की बदली की अटकलें तेज हो चुकी है, परंतु इसी बीच एक सनसनीखेज मामला सामने आ रहा है वह रिश्वतखोर अधिकारी अपनी इस पोस्ट को बचाने के लिए अवैध निर्माणकर्ताओं से दुगुनी वसूली करके अपने मनपा व मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारीयो को रिश्वत देकर अपनी बदली रुकवाने के जुआड में जुट गया है,उमपा आयुक्त अच्युत हांगे भी इस रिश्वतखोर पर कार्यवाई करने की बजाय उस पर मेहरबान हुए बैठे उसके पीछे की वजह भी यही बताई जा रही है !मंत्रालय के मुख्य सचिव (सेवा) सीताराम कुठे के द्वारा इस रिश्वतखोर पर कार्यवाई करने के विषय मे नगरविकास प्रधान सचिव मनीषा महैस्कर को लिखित आदेश दिया है उसके बायजूद अभी तक इस पर किसी विभाग के द्वारा कोई कार्यवाई किया नही गया है ! 
    बता दे दी कि उल्हानगर महानगरपालिका के मागासवर्गीय भरती घोटाला जैसे अनेक मामले का खुलासा हुआ था. कुछ दिनों पहले राजेंद्र अढांगले इस सफाई कर्मचारी ने अपने भाई के नाम 15 सालों से नोकरी करने का मामले का पर्दाफाश हुआ . इस मामले में अढांगले इनके विरुद्ध मामला दर्ज कराया गया और उसे जेल जाना पड़ा है. इस मामले में तत्कालीन मनपा के कुछ अधिकारियों की मिली भगत होने का भी मामला प्रकाश में आया है उन वरीष्ठ अधिकारी और कर्मचारियो जांच होना अभी बाकी है.ऐसे में मनपा के विवादित अधिकारी गणेश शिंपी को सहाय्यक आयुक्त और अनधिकृत बांधकाम निष्कासन प्रमुख की जबाबदारी देने से मनपा प्रशासन की कार्य प्रणाली पर भी सवालिया निशान लगने लगा .  शिंपी का मूल पद यह स्टेनोग्राफर आहे . ये 8 / 5 / 2013 में मनपा के तत्कालीन आयुक्त बालाजी खतगावकर के पीए (स्वीय सचिव) पद पर काम करते समय ठाणे एंटीकरप्शन विभाग ठाणे ने इन पर कार्यवाई करते हुए 25 हजार की रिश्वत लेते रंगेहात गिरफ्तार किया था इनके साथ बिट मुकादम इनको भी जाल बिछाकर 50 हजार की रिश्वत लेते पुलिस ने गिरफ्तार किया था. इस दरम्यान शिंपी को कुछ समय के लिए निलंबित किया गया था उसके कुछ समय बाद तत्कालिन मनपा आयुक्त मनोहर हिरे इनके कार्यकाल में गणेश शिंपी इनकी सहाय्यक आयुक्त पद पर बहाली किया गया इस दरम्यान इनके कार्यकाल के दरम्यान बड़े पैमाने इनके प्रभाग में हुए है ,अभी शिंपी के पास सहाय्यक आयुक्त और अवैध बांधकाम निष्कासन प्रमुख पद भी दिया गया है. इनको पद संभालने के बाद पूरे शहर में अवैध निर्माण बनाने में बड़े पैमाने पर तेजी आई है. यहा देखने वाली बात यह है कि महाराष्ट्र शासन निर्णय क्र निप्रआ -1111/प्र क्र 86 / 11 -अ  प्रमाण के अनुसार जिस भी शासकीय अधिकारी / कर्मचारी विरुद्ध बेहिसाब संपत्ती प्रॉपर्टी, नैतिक अधःपतन, रिश्वतखोरी ,हत्या,या हत्या का प्रयास , बलात्कार ऐसे गंभीर मामले किसी पर भी फौजदारी मामले दर्ज हुए है और उन्हों इसकी वजह से निलंबित किया गया है और खटला / अपील / विभागीय चौकशी प्रलंबित होने के दरम्यान उसको पुनस्थापित करने निर्णय हुआ है तो ऐसे में ऐसे मामले के अधिकारी कर्मचारी को ऐसा पद दिया जाय जहाँ पर अधिकारी का पब्लिक से जनसंपर्क या रिश्वत लेने की संभावना न बने ऐसे पदपर नियुक्ती दी जाय ऐसा महाराष्ट्र के जीआर में स्पष्ट लिखा है. ऐसे में मनपा के द्वारा ऐसे अधिकारी को मलाईदार पोस्ट देकर क्या साबित करना चाहती या इसके पीछे की मंशा भ्र्ष्टाचार को बढ़ावा देने का तो नही है क्यो       गणेश शिंपी जिनकी मनपा में स्टेनोग्राफर इस पदपर नियुक्ती किया गया था यह पद एकांकी था इस पद पर काम करने वाले ब्यक्ति को दूसरा कोई पद कानून के हिसाब से नही दिया जा सकता है, ऐसे में अपने पद का इस्तेमाल कर रिश्वत लेते हुए रंगेहात पकड़ा गया है उसे शासन के जीआर के नियमो को ताख पर रखकर ऐसा मलाईदार पद देने की पीछे के कारण क्या है ! इनके प्रभाग अधिकारी पद पर बैठने के बाद से अवैध निर्माण का बड़े पैमाने से इतना स्पष्ट है कि रिश्वत का खेल कैसे हुआ है क्यो किसी काम पर कार्यवाई हुई भी तो फिर दूसरे दिन बनकर खड़े हो गए है . शिंपी का मामला न्यायलय में चल रहा है फिर कर्मचारियों की प्रमोशन यादि में इसका उल्लेख ही नही किया गया यह दर्शाता है कही क्लीन चिट देने का षणयंत्र नही किया गया है . जब से इसको अवैध बांधकाम विभाग प्रमुख पद का प्रभारिचार्ज दिया गया तभी से पूरे शहर में अनगिन अवैध निर्माण बनाये जा रहे है अब उन्ही अवैध निर्माणकर्ताओ से अपनी पोस्ट बचाने के नाम पर दुगुनी वसूली शुरू किया है,विश्वसनीय सूत्रों से में मिली जानकारी के अनुसार अपने पद को बचाने के लिए यह मंत्रालय से लेकर मनपा के अधिकारीयो को मोटी रकम देकर अपनी बदली रुकवाने का जुआड निकाला है ऐसा सामने आ रहा है ! उमपा आयुक्त हांगे इस रिश्वतखोर पर आखिरकार कब कार्यवाई करते उस पर पूरे शहरवासियों की नजर टिकी हुई है !
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