• उमपा के चर्चित रिस्क बेस प्लान घोटाले की परिवहन सभापति संतोष पांडेय ने किया मनपा आयुक्त से लिखित पत्र देकर जांच की मांग !

    Reporter: fast headline india
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    उमपा के चर्चित रिस्क बेस प्लान घोटाले की परिवहन सभापति संतोष पांडेय ने किया मनपा आयुक्त से लिखित पत्र देकर जांच की मांग ! 

    प्रशासन ने नही की ठोस कार्यवाई, तो घोटाले का पर्दाफाश करने के कोर्ट में डालेगे जनहित याचिका-पांडेय 

    मनपा के दो रिश्वतखोर अधिकारी व सुयोग एसोसियेट की मिलीभगत से हुआ यह रिस्क बेस प्लान घोटाला ! 

    मनपा आयुक्त ने दिए थे जांच के आदेश परंतु अभी नही हुई कोई कार्यवाई ! 

    करोड़ो रुपये के हुए इस घोटाले में प्रशासन के आला अधिकारियों को पैसों देकर जांच दबाने को कर रहे घोटाले बाज दावा ! 

    परिवहन सभापति की जांच की मांग पर घोटालेबाजो की नींद हुई हराम !  

    उल्हासनगर-उल्हासनगर महानगर पालिका के चर्चित रिक्स बेस प्लान में हुये घोटाले की जांच की मांग उमपा के परिवहन सभापति व टीओके के युवा अध्यक्ष संतोष पांडेय लिखित पत्र देकर मनपा आयुक्त यह मांग किया है उन्होंने कहा कि अगर जल्द हमारी मांग पर मनपा प्रशासन ने कोई ठोस कार्यवाई नही किया तो इस घोटाले का पर्दाफाश करने के कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करने की भी तैयारी है उन्होंने कहा कि यह अपने आप में उल्हासनगर में बड़ा घोटाला हुआ है ऐसा लगता है अभी तक चारो प्रभागों में कुल मिलाकर 184 रिस्क बेस प्लान पास किये गए है सभी कामो में बहुत सारी खामियां सामने आ रही है इस लिए इस पर प्रशासन को जल्द ही एक जांच समिति बनाकर सही जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्यवाई हो ! 
    बता दे कि इस रिस्क बेस प्लान घोटाले में एक रैकेट का चौकाने वाला सच सामने आया है इस रैकेट में चार अहम किरदार है इसमें दो मनपा के रिश्वतखोर है जो सलाखों के पीछे जा कर आ चुके है तीसरा एसोसिएट चौथा वो आर्किटेक्ट जिसके जरिये सबसे ज्यादा इस प्लान को पास करवाया गया है मनपा के नगररचनाकार विभाग के रजिस्टर में इंट्री की माने तो 32 रिक्स बेस प्लान पास हुए उसमें 20 प्लान एक ही आर्किटेक्ट स्वप्निल वाघ जरिये पास किया गया है ! इन सारे प्लान को पुराने डीपी प्लान के आधार पर पास किया है जबकि शासन के अध्यादेश के मुताबिक जितने भी प्लान पास किये जायेंगे वह नए डीपी प्लान के नियमो के अनुसार से करना अनिवार्य है सारे रिक्स बेस प्लान जो बन चुके है या बन रहे वह सारे रोड़ पर बन रहे है नए डीपी के अनुसार देखा जाए मतलब पूरा प्लान ही बोगस कहा जा सकता है अगर उमपा के नगररचनाकार सोनवणे की माने तो अब सवाल यह है इसकी जांच होकर कार्यवाई करेगा कौन ? गौरतलब हो कि महाराष्ट्र सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए यह रिक्स बेस प्लान को लाया था परंतु उल्हासनगर महानगर पालिका के रिश्वतखोर के आरोप में जेल की हवा खा चुके वर्तमान में वार्ड ऑफिसर शिंपी व जूनियर इंजीनियर खामितकर ने इससे पैसा कमाने का एक जुआड निकाला और उन्होंने नियोजित तरीके से एक टीम के जरिये इस घोटाले को अंजाम दिया गया है ऐसा सामने देखने में आ रहा है इसमें सुयोग एसोसियेट और आर्किटेक्ट स्वप्निल वाघ को शामिल करके पूरे घोटाले को अंजाम दिया गया है ऐसा समझा जा सकता है क्योंकि उस समय वर्तमान में गणेश शिंपी वार्ड क्रमांक चार के वार्ड आफिसर थे और खामितकर जूनियर इंजीनियर तभी उस प्रभाग के जरिये सबसे ज्यादा रिक्स बेस प्लान पास किया गया है कुछ प्लान को तो एक ही दिन में पास किया गया है ऐसी भी इंट्री रजिस्टर में दिख रहा है महाराष्ट्र शाशन के जीआर के अनुसार रिस्क बेस अप्रूवल यानी धोखादायक के अनुमोदन के तहत 151,से 200 स्क्वायर मीटर की जगह पर आर सी सी निर्माण को पास करने का अधिकार सरकार ने आर्किटेक्ट यानी वास्तु विषारदों को दिया है। जिसमें जी प्लस वन यानी पार्किंग और एक मंजिल, अथवा जी प्लस वन यानी ग्रांऊंड प्लस वन (तल मंजिल व एक मंजिल) बनाना है परन्तु इसका जमकर दुरूपयोग हो रहा है। अपने निजी फायदे के लिए 1-1 मंजिल अतिरिक्त पास कर रहे हैं। यह तो सबको पता ही है कि लंबे अरसे जो मनपा ने उल्हासनगर के कई आर्किटेक्ट के लायसेंस रिन्यू नहीं किए हैं। मतलब लासेंस का नवीनीकरण नहीं किया गया है। केवल कुछ आर्किटेक्ट के लायसेंस रिन्यू किए गए हैं। ऐसे में कल्याण, अंबरनाथ और उल्हासनगर के कुछ आर्किटेक्ट की सेवाएं ली जाती हैं। गौर करने वाली बात यह है कि 32 प्लान पास करने की सूचना विश्वस्त सूत्रों द्वारा मिली है, जिसमें से एक नहीं, दो नहीं, बल्कि पूरे 20 प्लान एक ही आर्किटेक्ट ने पास किए हैं। जिसका नाम है स्वप्निल वाघ तो दूसरे आर्किटेक्ट हैं दीपक सिंह खालसा, जिन्होंने 3 प्लान पास किए हैं। और निलेश भोजवानी ने एक प्लान। इस पूरे प्रकरण पर ध्यान दे तो बहुत बड़ा खुलासा सामने आ रहा है कि भ्रष्टाचार की किस तरह हदें पार कर दी गई हैं। सूत्रों द्वारा जो पुख्ता जानकारी मिली है, वह दिलचस्प भी है और दुखद भी महाराष्ट्र सरकार की एक अधिकृत वेबसाइट है - ब्लिडिंग प्लान मैनेजमेंट सिस्टम यानी (बीपीएमएस) जहां आर्किटेक्ट को पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) करना पड़ता है और निवेदन भी आॅनलाइन करना पड़ता है। जिसकी अनुमति भी अधिकारिक रूप से दी जाती है। उसके बाद मालिक या पंजीकर्ता को वार्ड आॅफिस का जूनियर इंजीनिअर पैसे भरने का चलान देता है। इस वेबसाइट पर उल्हासनगर मनपा ने खुद को आज तक रजिस्टर्ड नहीं किया है। सारा काम मैन्यूअली और आॅफलाइन हुआ है। जबकि नियमानुसार रूल नंबर 13 (सी) के हिसाब से पूरा सिस्टम बीपीएमएस पर एकीकृत यानी इंटीग्रेट होना चाहिये। सबसे बड़ा आश्चर्य तो इस बात का है कि अंबरनाथ जैसी छोटी नगरपालिका ने इस वेबसाइट पर खुद को पंजीकृत किया है लेकिन उल्हासनगर मनपा ने अभी तक नहीं किया है इसके पीछे का कारण एक मात्र है ! वह है सबसे बड़ा घोटाला तो यह हुआ है कि 200 स्क्वाइर मीटर की अनुमति दी गई है। जबकि किसी का क्षेत्र 200 स्क्वाइर मीटर से ज्यादा है तो उसकी माप को कम दिखाकर उसका प्लान पास किया गया है। इतना ही नहीं, एक सनद पर, एक प्राॅपर्टी कार्ड पर दो हिस्से कर दो प्लान पास किए गए हैं। सनसनीखेज बात तो यह है कि जो 32 प्लान पास किए गए हैं, उनके स्ट्रक्चर इंजीनिअर की पोल बिल्कुल साफ तरीके से खुल रही है। इन 32 में से 20 प्लान में राजेंद्र सावंत स्ट्रक्चर इंजीनिअर हैं। इसके अलावा कविता लक्ष्मण कटारिया - 3 प्लान, डी.जे,कोटवानी - 2 और मुकेश प्रथियानी - 1 प्लान के स्ट्रक्चर इंजीनिअर है। डीसी रूल के नियम के मुताबिक से रजिस्टड स्ट्रक्चर इंजीनिअर होना निहायत जरूरी है। परंतु राजेंद्र सावंत का लायसेंस रिन्यू नहीं हुआ है। कितना अजीब लगता है लेकिन सत्य यह है कि सावंत ने 20 प्लान पास किए हैं जबकि उनका लायसेंस रिन्यू ही नहीं हुआ है। साथ ही कोटवानी का लायसेंस भी रिन्यू नहीं हुआ है। और सबसे चौकाने वाली बात यह है कि मुकेश प्रथियानी नाम का कोई स्ट्रक्चर इंजीनिअर है ही नहीं ! तो मुकेश प्रथियानी आखिर है कौन ? रही बात कविता कटारिया की, तो उनके पास ऐसोसिएट मेंबरशिप का लायसेंस है। वह केवल चार्टर्ड इंजीनिअर की प्रेक्टिस का है, न कि स्ट्रक्चर इंजीनिअर के रूप में चल सकता है लेकिन उन्होंने स्ट्रक्चर इंजीनिअर के रूप में हस्ताक्षर किए हैं। इस पूरे प्रकरण में पारदर्शिता लाने के लिए और इनके जवाब हासिल करने के लिए उल्हासनगर के एक प्रसिद्ध इंजीनिअर ने गत 16 अक्टूबर 2018 को नए मनपा आयुक्त अच्युत हांगे को एक ई मेल भेजा, जिसमें उन्होंने सारे प्रकरण के बार में उल्लेख किया था। आयुक्त महोदय ने उस ई मेल को पढ़ा और एकनाॅलेज कर अपने मातहत अधिकारी को भेज दिया। परंतु इसके ठीक एक दिन बाद इस ई मेल की जो मूल प्रति (ओरीजिनल काॅपी) है, वह सोशल नेटवर्किंग पर वाॅयरल हो गई। इससे साफ पता चलता है कि उल्हासनगर मनपा में कितना बड़ा भ्रष्टाचार है और कोई गोपनीयता नहीं ! इसका सीधा अर्थ यह है कि मपना प्रशासन पूरे तरीके से एक भ्रष्ट तंत्र बन चुका है, जहां कभी भी, कुछ भी हो सकता है ! उसी कड़ी में अब कई और नए कारनामों भी सामने आया जिसमें पुराने डीपी के हिसाब से प्लान पास किया गया ऐसा मामला सामने आया है इस बारे में जब मनपा के नगरचनाकार मिलिंद सोनवणे से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि कोई प्लान को पास करना है तो वह नए डीपी प्लान के अनुसार ही पास करना है यदि पुराने डीपी के अनुसार प्लान पास किया गया तो वह गैरकानूनी है और वह प्लान मान्य नही किया जा सकता है,लेकिन शहर में कई रिक्स बेस प्लान पुराने डीपी पर पास करके बनाया जा रहा है इस बारे में मनपा मुख्यालय उपायुक्त संतोष देयर से बात किया तो उन्होंने कहा अभी तक ऐसी कोई शिकायत आई नही जब हमें शिकायत मिलेगी हम कार्यवाई जरूर करेगे ऐसे में यह बात समझने में आसानी हो गया कि मनपा प्रशासन का इस भ्र्ष्टाचार को मूक समर्थन दिख रहा है ! अब सवाल यह है कि इस घोटाले को अंजाम देने वाले रैकेट पर क्या कार्यवाही होती उसी पूरे शहर वाशियो की नजरें टिकी हुई है ! इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उमपा के परिवहन सभापति संतोष पांडेय ने मनपा आयुक्त को लिखित पत्र देकर पूरे मामले की जांच करके कार्यवाई की मांग किया है उन्होंने कहा कि जल्द ही मनपा ने कोई ठोस कार्यवाई नही किया तो हम इस घोटाले के विषय को लेकर जनहित याचिका कोर्ट में डाल कर पूरे घोटाले का पर्दाफाश और लिप्त कर्मचारियों पर कार्यवाई करवाने की बात कही है ! संतोष पांडेय के इस बयान के बाद इस घोटाले को अंजाम देने वाले लोगो की रातों की नींद हराम होना तय है !
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