• स्वच्छता सर्वेक्षण में उमपा के आसपास की नगरपालिका, महानगरपालिका ने की प्रगती, लेकिन उमपा गई कई पायदान नीचे !

    Reporter: fast headline india
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    स्वच्छता सर्वेक्षण में उमपा के आसपास की नगरपालिका, महानगरपालिका ने की प्रगती, लेकिन उमपा गई कई पायदान नीचे !

     पिछले बार १०७ क्रमांक पर रही उमपा इस बार१२३वें क्रमांक पर जा गिरी है ! 

     उल्हासनगर-उल्हासनगर शहर लगभग १३ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में तो उल्हासनगर महानगरपालिका भी उसी क्षेत्रफल में फैली हुई है। शहर में आज भी शौचालयों की दुर्व्यवस्था बनी हुई है। असंख्य शौचालय तोड़े जा रहे हैं,इतना ही नहीं महापौर पंचम कलानी के पैनल में बिना दरवाजा के और भयंकर अस्वच्छ हुए शौचालय का फोटो सोशल मीडिया पर कुछ दिनों पहले वायरल हुआ था। अनेक शौचालयों को तोड़कर उस जगह को भूमाफियाओं ने हड़प लिया है। शौचालय उपलब्ध न होने के कारण अभी भी कुछ स्थानों पर लोग खुले में शौच के लिए जाते हैं, इसके कारण खुले शौचमुक्त शहर बनाने में प्रशासन असफल रहा है।खुले में शौच रोकने के लिए तत्कालीन आयुक्त निंबालकर ने गुड मॉर्निंग पथक की स्थापना की थी। यह पथक खुले में शौच करनेवाले को गुलाब का फूल देकर गांधीगिरी करता था,बाद में दंडात्मक कारवाई की जाती थी लेकिन इसका कोई लाभ नहीं मिला। डंपिंग ग्राउंड का व्यवस्थापन अब भी मनपा नहीं कर पा रही है। शहर का कचरा उठाने का ठेका के अंतर्गत कोणार्क कंपनी को प्रतिदिन सवा चार लाख रुपए दिए जाते हैं।इतना महंगा ठेका देने के बाद भी स्वच्छता रखने में कंपनी असफल रही है। स्वच्छता सर्वेक्षण में कुछ धार्मिक धर्मगुरू के हाथों “स्वच्छता दूत “की कमान सौंपी गई है। इन धर्मगुरूओं के शिष्यों की संख्या बहुत बड़ी है, धर्मगुरू और मनपा प्रशासन के कहने के बाद बड़े पैमाने पर स्वच्छता एप्प डाउनलोड किया गया। इसमें उल्हासनगर महानगरपालिका ५०वें क्रमांक पर आया था लेकिन प्रत्यक्ष रूप से इस बार के यंदा स्वच्छता सर्वेक्षण में उल्हासनगर मनपा १०७ से सर्वेक्षण क्रमांक में १२३ पर जा पहुंचा। इस संदर्भ में मनपा के स्वच्छता विभाग के अधिकारियों से पूछने का प्रयत्न किया गया लेकिन उन्होंने प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया।
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