• २५ मार्च को होगा उल्हासनगर मनपा के ३०५ सफाई कामगारों के भविष्य का फैसला !

    Reporter: fast headline india
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    २५ मार्च को होगा उल्हासनगर मनपा के ३०५ सफाई कामगारों के भविष्य का फैसला  !

    १९९३ से न्यायालय में न्याय पाने के लिए लड़ रहे सफाई कामगार यह लड़ाई !


    मुंबई उच्चन्यायालय कामगारों को रखने का दिया था आदेश !

    उल्हासनगर-उल्हासनगर मनपा ने ३०५ सफाई कामगारों को १९९३ से अधर में लटकाकर रखा है। मुंबई उच्च न्यायालय ने इन कामगारों को काम पर रखने का आदेश देने के बाद भी अभी तक इन कामगारों को काम पर नहीं लिया है।इसके कारण इन कामगारों ने फिर से न्यायालय की दौड़ लगाई है। इस मामले में २५ मार्च को न्यायालय में सुनवाई होगी,उसके बाद ही इन कामगारों का भविष्य निर्धारित होगा। 
    उल्हासनगर मनपा में १९९३ से पहले ३०५ कामगार सफाई खाता में काम कर रहे थे, तब मनपा ने इन्हें कुछ कारण देते हुए काम पर से निकाल दिया था। ये सभी कामगार यूनियन की मदद से १९९३ में कामगार न्यायालय में गए थे, जहां न्यायालय ने इन कामगारों के पक्ष में निर्णय देते हुए इन्हें काम पर रखने का आदेश दिया था,लेकिन इस आदेश को चुनौती देते हुए मनपा ने औद्योगिक न्यायालय में अपील किया था।लेकिन औद्योगिक न्यायालय ने कामगार न्यायालय का आदेश कायम रखते हुए मनपा की अपील को खारिज कर दिया।तब मनपा ने मुंबई उच्च न्यायालय की शरण में गए, लेकिन इस न्यायालय ने भी मनपा को फटकार लगाते हुए इन ३०५ कामगारों को काम पर रखने का आदेश दिया। लेकिन मनपा ने इस आदेश को न मानते हुए इन कामगारों को अभी तक काम पर न रख कर उच्च न्यायालय के आदेश का कचरे के डिब्बे में डाल दिया है।इसी दरम्यान ये कामगार १९९३ से न्यायालयीनलड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन मनपा इन्हें काम पर रखने में टालमटोल कर रही है। इन ३०५ कामगारों में से कुछ कामगारों की काम पर लिए जाने की प्रतीक्षा करते करते उनकी मृत्यु भी हो गई है।इतना होने पर भी मनपा को इन कामगारों पर जरा भी दया नहीं आ रही है। न्यायालय की फटकार लगने के बाद उल्हासनगर मनपा प्रशासन ने २०१६ में न्यायालय में संमतीपत्र प्रस्तुत किया था, लेकिन इसके बाद भी इनकी भर्ती नहीं कि।इसलिए अब कामगारों के फिर से न्यायालय जाने पर न्यायाधीश गवई की खंडपीठ ने मनपा पर न्यायालय की अवमानना करने का आरोप लगाते हुए मनपा आयुक्त से पूछा कि ऐसा क्यों न करें ,लेकिन महाराष्ट्र शासन की अनुमति न होने के कारण भर्ती नहीं कर सकते,ऐसा जवाब दिया है।लेकिन न्यायालय ने यह तर्क नहीं माना, ऐसी जानकारी भारतीय कामगार कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष राधाकृष्ण साठे ने दी है।इसके कारण  न्यायालयीन प्रक्रिया में अटकी हुई मनपा ने स्वयं केे कामगार भर्ती का संमतीपत्र रद्द करने के लिए याचिका दाखिल की है। इस याचिका पर अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस, लेबर फ्रंट और भारतीय कामगार कर्मचारी महासंघ इन कामगार संघटनों के हस्तक्षेप करने के कारण मनपा प्रशासन की अड़चने बढ़ गई है। इस याचिका की सुनवाई १५ मार्च को होगी और भर्ती संबंधी मूल याचिका की सुनवाई २५ मार्च को होगी, ऐसा युनियन लीडर राधाकृष्ण साठे ने बताया है।
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