• कोर्ट में दफन हुआ 855 का जिन्न आया बाहर शहर वाशियो की नींद हुई हराम !

    Reporter: fast headline india
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    कोर्ट में दफन हुआ 855 का जिन्न आया बाहर शहर वाशियो की नींद हुई हराम !

    855 अवैध निर्माण मामले उमपा आयुक्त को हाई कोर्ट ने दिया हाजिर होने का आदेश ! 

     मनपा आयुक्त को  उल्हासनगर शहर की वर्तमान स्थिति को लेकर देना होगा हलफनामा ! 

    उल्हासनगर शहर के अवैध निर्माणों पर लटकी कार्यवाई की तलवार !   

    उल्हासनगर-उल्हासनगर सबसे चर्चित 855 अबैध निर्माण मामला जो कुछ समय से कोर्ट में दफन हो गया था वह जिन्न आखिरकार बाहर आ गया है जिसके चलते शहर वाशियो की नींद हराम हो गई है, वर्ष 2005 में मुंबई हाई कोर्ट ने उल्हासनगर शहर के 855 अवैध निर्माण मामले में शहर के निवासी हरि तनवानी की याचिका पर सुनवाई कर शहर में बने अवैध निर्माणों के खिलाफ तोड़ू कार्यवाही का आदेश जारी किया था, जिसके बाद मनपा के तत्कालीन आयुक्त रामनाथ सोनवने के नेतृत्व में उल्हासनगर में अवैध निर्माणों की तोडू कार्यवाही शुरू की गई थी, इस दौरान तत्कालीन महाराष्ट्र की आघाडी सरकार ने अध्यादेश लाया था, जिसके बाद हाईकोर्ट ने तोड़ू कार्यवाही पर रोक लगाने के साथ ही शहर के अवैध निर्माणों को दंड भरकर वैध करने का आदेश दिया था, साथ ही उल्हासनगर शहर में कोई भी अवैध निर्माण नया नहीं किया जायेगा, उक्त आदेश अदालत ने दिया था, परंतु मनपा प्रशासन के द्वारा अदालत के आदेश को नजरअंदाज कर दिया गया ,और शहर में वर्ष 2005 से अभी तक बड़े पैमाने पर मनपा प्रशासन की उदासीनता के चलते अवैध निर्माण किया गया है, 
    बता दे कि 18 अप्रैल 2019 को शहर के निवासी चंदर हरीराम तोलानी के द्वारा  अवैध निर्माण मामले में मनपा आयुक्त के द्वारा अदालत के आदेश का अवमानना करने की याचिका दायर की गई है ,जिस मामले में मुख्य न्यायाधीश एन एम  जामदार ने 24 जून को  सुनवाई की तारीख रखी है, 24 जून को मनपा आयुक्त को स्वयं हाई कोर्ट में उपस्थित रहकर उल्हासनगर के मौजूदा स्थिति को लेकर हलफनामा देने का आदेश अदालत ने दिया है,  बता दे कि 855 अवैध निर्माण मामले में मुंबई हाई कोर्ट के द्वारा मनपा आयुक्त को दिये गये इस आदेश के बाद उल्हासनगर शहर में अवैध निर्माण बिल्डिंग में रहने वाले नागरिको व अवैध निर्माण करने वालों में हड़कंप मच गया है, ज्ञात हो कि उल्हासनगर की 855 इमारतों का मामला मुंबई हाई कोर्ट में प्रलंबित है, अदालत के  द्वारा तोड़ू कार्यवाही  रोके जाने के बाद शहर के अवैध निर्माणों  का दंड भरकर वैध करने  का आदेश दिये जाने के बाद महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्य सरकार ने कुछ दंड भरकर उनकी अवैध बिल्डिंगों को बैध करने का आदेश दिया था, जानकारी अनुसार  शहर के  कुछ लोगों ने  शासन के आदेश के तहत  दंड भरकर  अवैध निर्माणों को वैध  किया ,परंतु मनपा प्रशासन की उदासीनता के चलते  शहर के ज्यादातर लोग इसका फायदा  नहीं ले सके है, बता दें की उल्हासनगर में नियमों की अनदेखी कर बड़े पैमाने पर घर, दुकान, गोदाम व बिल्डिंगे बनायी गई है, वर्ष 2003 में दौरान अवैध बिल्डिंगों पर की मांग  शहर के  हरी तनवानी ने की थी. तत्कालीन आघाडी सरकार ने एक अध्यादेश निकालकर शहर वासियों को  राज्य सरकार ने कुछ दंड भरकर अपनी अपनी बिल्डिंगों को नियमित करने की एक शर्त रखी थी.जिसकी मियाद 25 अप्रैल 2006 थीं. जिसका पालन कराने में मनपा प्रशासन पूरी तरह से विफल हो गई ,
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