• एसडीओ गिरासे का नया कारनामा पुलिस कालोनी की जगह का सनद दिया प्राइवेट बिल्डर को !

    Reporter: fast headline india
    Published:
    A- A+
    एसडीओ गिरासे का नया कारनामा पुलिस कालोनी की जगह का सनद दिया प्राइवेट बिल्डर को !

     पुलिस कालोनी पर कब्जा करने में जुटा बिल्डर कालोनी को कर रहा था सपाट करने का काम !

     शिवसेना के नगरसेवक बोडारे, एसीपी,विठ्ठलवाड़ी के सीनियर इंस्पेक्टर ने बिल्डर के तोडू कार्यवाई को रुकवाया ! 

    पुलिस कालोनी की जगह का सनद निजी हाथों में देने के मामले में बड़े पैमाने पर हुआ भ्रष्टाचार ? 

     उल्हासनगर-   उल्हासनगर शहर के प्रान्त अधिकारी जगतसिंह गिरासे द्वारा एनसीटी स्कूल के सामने पुलिस वसाहत की जमीन को एक बिल्डर को देने का मामला सामने आया है । उक्त बिल्डर ने बिना किसी से पूछे और बिना किसी का अनुमति लिए पुलिस कॉलोनी के दरवाजे, खिड़कियों और पत्रों को हटाने के बाद पुलिस प्रशासन की नींद खुली है।  
    बता दे कि उल्हासनगर कैम्प ४ में, एनसीटी स्कूल के सामने विठ्ठलवाड़ी पुलिस स्टेशन के सामने दो पुरानी पुलिस कॉलोनियाँ हैं। NCT स्कूल के सामने, बैरक १२५७ में रहने वाले १४ पुलिस कांस्टेबल के १४ परिवार थे। हालांकि, महाराष्ट्र सरकार के लोक निर्माण विभाग ने खतरे के कारण दो साल पहले इस कॉलोनी को खाली करा दिया था। यहां कॉलोनी के फिर से निर्माण की अनुमति के लिए, परिमंडल ४ के पुलिस अधिकारियों ने वित्तीय स्वीकृति के लिए रिपोर्ट सरकार को भेज दी है। पंद्रह दिन पहले, विट्ठलवाड़ी पुलिस ने इन स्थान पर पुलिस प्रशासन का एक बोर्ड लगा दिया था। हालांकि, एक अधिकारी ने कहा कि बिल्डर द्वारा अदालत का आदेश दिखाने के बाद पुलिस ने बोर्ड ले निकाल लिया था। इस भूखंड पर १४ पुलिस कॉलोनी के कमरों में, कुछ निजी लोग पिछले सप्ताह इस क्षेत्र में प्रवेश कर गए। वे कमरों के दरवाजे, खिड़कियां, पत्रा निकालकर उन्हें बेच दिए। लोगों को लगा कि नई कॉलोनी का निर्माण शुरू हो गया है। जब विपक्षी नेता धनंजय बोडारे को यह बात समझ में आई, तो उन्होंने सहायक पुलिस आयुक्त धुला टेले, विठ्ठलवाड़ी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रमेश भामे के साथ पुलिस कॉलोनी में जाकर काम को रोक दिया। जब सहायक पुलिस आयुक्त धुला टेले से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि इस १२५७ नं. बैरक में हमारी पुलिस कालोनी हैं, लेकिन हमने खतरे के कारण उन कालोनियों को खाली कराया य है। जब हमने देखा कि इन कॉलोनियों में बाहरी लोगों का अतिक्रमण हो गया है, तो हमने तुरंत विपक्षी नेता धनंजय बोडारे के साथ जाकर श्रमिकों को पुलिस कॉलोनी से बाहर निकाल दिया। उसके बाद, लोक निर्माण विभाग द्वारा दिखाए गए व्यय रिकॉर्ड अब तक प्रत्यक्ष प्रांतीय कार्यालय तक पहुंच चुके हैं। निजी व्यक्ति को दिए गए चार्टर को रद्द करने के बारे में प्रांत के अधिकारियों के साथ पत्राचार भी किए गए है। किस आधार पर दिए जा रहे हैं सनद   शांति प्रकाश आश्रम के लिए पुलिस का एक बड़ा भूखंड आरक्षित है। इस भूमि पर फिलहाल भोईर परिवार का स्वामित्व है। इसलिए, भोईर परिवार, अन्य स्थानों पर,अदालत से आदेश से जमीन पर प्रान्त कार्यालय से सनद चढ़ा रहे हैं। पिछले हफ्ते, भोईर परिवारों ने सतनाम सखी के प्लॉट पर, शांति प्रकाश आश्रम के पास निर्माण व्यवसायी की मदद से एक परिसर बनाया। २००७ में, प्रांत कार्यालय ने इस भूखंड के अनधिकृत निर्माण के लिए राजपाल से 10 लाख रुपये का राजस्व वसूला था। इसके बाद भी भोईर परिवार को स्वामित्व देने के बाद यह मामला विवादास्पदहो गया है। इस बैरक १२५७ में पुलिस कॉलोनी थी,जिसमें पुलिस के परिवार रहते थे। पड़ोस के बैरक निवासी अजय कारभारी ने बताया कि इन पुलिस कॉलोनियों में कांस्टेबल, मुलिक, राणे और परदेशी रहते थे। खाली भूखंडों पर है भूमाफियाओं की नजर श्रीराम चौक से विठ्ठलवाड़ी पुलिस स्टेशन यातायात का मुख्य मार्ग है। यह इस सड़क पर पुलिस कॉलोनी की संपत्ति है। हालांकि, इस स्थान का सनद देने से पहले प्रान्त अधिकारी जगत सिंह गिरासे और उनके सहयोगियों ने यह जांच नहीं की कि इस जगह का मूल रूप से क्या उपयोग हो रहा है। हालांकि महाराष्ट्र की संपत्ति इस जगह की संपत्ति शीट पर लिखी गई है, यह स्थान गृह मंत्रालय के तहत राज्य सरकार के नियंत्रण में है,ऐसा होने पर भी इस जगह का सनद निजी हाथों में देने के मामले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार है, ऐसी चर्चा शहर में हो रही है।
  • No Comment to " एसडीओ गिरासे का नया कारनामा पुलिस कालोनी की जगह का सनद दिया प्राइवेट बिल्डर को ! "