• महक बिल्डिंग पहले झुकी, फिर 24 घन्टे में हुई जमीनदोज !

    Reporter: fast headline india
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    महक बिल्डिंग पहले झुकी, फिर 24 घन्टे में हुई जमीनदोज ! 

    मनपा प्रशासन व फायर ब्रिगेड की बदौलत 150 लोगो की बची जान ! 

    एक दिन पहले ही खाली कराई गई थी यह बिल्डिंग !

     महक बिल्डिंग गिरने के आसपास की पांच बिल्डिंगों को मनपा ने कराया खाली ! 

    महक बिल्डिंग के रहवासियों को थायरासिंह दरबार ने दिया आश्रय ! 

     उल्हासनगर -उल्हासनगर शहर में सुबह 10 बजे के करीब 5 मंजिला इमारत के झुकने के कारण इमारत के 31 फ्लैट धारकों को खाली करवा दिया गया था और फ्लैटों के दरवाजे खुद से जाम हो गए थे। महानगरपालिका व फायर ब्रिगेड ने तत्काल कार्यवाई करते हुए बिल्डिंग को खाली करवा दिए थे जिसके चलते लगभग 150 निवासियों के जीवन को बचाया गया है। 
    महक उल्हासनगर फर्नीचर मार्केट में लिंक रोड पर 5 मंजिला इमारत है और इसमें 31 फ्लैट हैं। नागरिकों ने शिकायत की कि इमारत को महानगरपालिका द्वारा घोषित खतरनाक और खतरनाक इमारतों की सूची में शामिल नहीं किया गया था। घबराए निवासियों ने कई बार कोशिश करने के बाद भी दरवाजे नहीं खुले,इसके बाद उन्होंने नरेंद्र कुमारी ठाकुर, नारायण पंजाबी को फोन किया। एक प्रसिद्ध आर्किटेक्ट ने आज इस इमारत को देखा, और निवासियों को आश्वासन दिया कि यदि इमारत को खंभे द्वारा सहारा किया गया है,अब सब कुछ ठीक हो जाएगा। आर्किटेक्ट के जाने के कुछ ही मिनट बाद, इमारत पत्ते के बंगले की तरह ढह गई। इसका बी विंग टूट गया। इस विंग के प्रवेश द्वार के ऊपर दो फ्लैटों का नुकसान हुआ। निवासियों के लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण समय था कि वे कई वर्षों से इमारत में रह रहे थे। दरवाजे जाम होनेके बाद पूर्व नगरसेवकनरेंद्र कुमारी ठाकुर, नारायण पंजाबी को रहिवासियों ने फोन किया।मनपा आयुक्त सुधाकर देशमुख के अड़े के बाद सहायक आयुक्त गणेश शिंपी , भगवान कुमावत और अग्निशमन अधिकारी भास्कर मिरपगार घटनास्थल पर पहुंच गए और लोगों को इमारत से बाहर निकाला। 26 जुलाई और 4 अगस्त को उल्हासनगर के साथ-साथ कम्बा-वरप-रायता गाँव में बाढ़ से भयंकर स्थिति निर्माण हुईथी, तब, थायरसिंह दरबार संतों की पहल से जसु सिंह और टिल्लू सिंह ने सभी एक लाख लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की थी। उल्हासनगर के 70 वें स्थापना दिवस पर टिल्लू सिंह को कमिश्नर सुधाकर देशमुख ने सम्मानित किया। आज,महक बिल्डिंग में रहने वाले बेघर लोगों को इमारत गिरने के कारण थायरासिंह दरबार में आश्रय दिया जा रहा है।
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