• मनपा के टैक्स विभाग मचा अफरातफरी !

    Reporter: fast headline india
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    मनपा के टैक्स विभाग मचा अफरातफरी ! 

    पद मुक्त किए गए भदाने ने किया था मनपा को साढ़े तीन करोड़ का फायदा ! 

    क्या ऐसे कर्तब्य निष्ठ अधिकारी को मनपा आयुक्त वापस देगे पदभार ? 

    उल्हासनगर-उल्हासनगर मनपा के अपने कामो के चलते विवादों में रहने वाले अधिकारी युवराज भदाने, स्थानीय निकाय कर विभाग के प्रभारी के रूप में, आठ व्यापारियों के कर का पुनर्निधारण किया है और मनपा की तिजोरी में 3 करोड़ रुपये जमा किए हैं। इसलिए, यह सवाल उठ रहा है कि क्या मनपा आयुक्त सुधाकर देशमुख भदाने को पुनः काम पर लेने का फैसला लेंगे या नहीं ।
    बता दे कि २०१२ में, महाराष्ट्र सरकार द्वारा महानगरपालिकाओं में स्थानीय कर लागू किया गया था। यह टैक्स २०१५ तक शुरू था। इस अवधि के दौरान,१५,००० व्यापारियों ने स्थानीय संगठन कर में रजिस्ट्रेशन दर्ज किया था। २०१५ में कर बंद करने के बाद, इन व्यापारियों को कर का अंतिम विवरण प्रस्तुत करना आवश्यक था। लेकिन उन्होंने नहीं किया। परिणामस्वरूप, मनपा ने सेवानिवृत्त बिक्री कर अधिकारियों को नियुक्त किया था। ५ कर अधिकारियों में से ३ अधिकारियों ने काम छोड़ दिया था। इन अधिकारियों ने पहले ही ९७० व्यापारियों के अंतिम कर का निर्धारण किया था। इसके कारण, अभी भी १४०५० व्यापारियों की कर निर्धारण बकाया है। अंतिम कर निर्धारण नहीं करने वाले छह व्यापारियों को नोटिस जारी करने के बाद, पिछले मार्च में, मनपा आयुक्त अच्युत हांगे ने स्थानीय आयकर विभाग के उपायुक्त पद पर युवराज भदाने को नियुक्त करने के बाद १४०५० व्यापारियों को कर निर्धारण के लिए नोटिस भेजा था। तत्कालीन उप आयुक्त जमीर लैंगरेकर, विनायक फासे और सेवानिवृत्त कर अधिकारी विसपुते ने १,००० व्यापारियों के कर का अंतिम मूल्यांकन किया था और महानगरपालिका के तिजोरी में २ करोड़ ७९ लाख रुपए भरे थे और पांच व्यापारियों को ९० लाख रुपए का रिफंड देने का आदेश दिया था। ब्याज के साथ रिफंड १० करोड़ १० लाख रुपए तक चला गया। इसलिए, महानगरपालिका में प्रत्यक्ष रूप से १ करोड़ ६९ लाख रुपए की राशि जमा की गई थी। भदाने को इसमें कुछ गोलमाल लगा, जिसके लिए उन्होंने कुछ व्यापारियों के अंतिम कर निर्धारण को फिर से शुरू किया। इस प्रक्रिया में, उन्होंने उन्हें भुगतान की जाने वाली ९० लाख रुपए की धनराशि को रद्द कर दिया, और गजानन मार्केट के दुबई दुपट्टा और शगुन इन दो खाताधारकों से ४७ लाख रुपए और एक व्यापारी, कुमार टेक्सटाइल से १५ लाख रुपए वसूल किए। परमानंद आहूजा, जो कि पीजी टेक्सटाइल के व्यापारी हैं, उनसे अभी तक १ करोड़ ३९ लाख रुपए मिलने हैं। चूंकि आहूजा नगरपालिका में इस राशि का भुगतान करने के लिए तैयार नहीं हैं, इसलिए भदाने ने आहूजा के बैंक खातों को सील कर दिया है। इस कार्रवाई के कारण नगरपालिका को ३ करोड़ रुपए का फायदा हुआ है। उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त सुधाकर देशमुख, जिन्हें मनपा के अधिकारियों ने ४० महीने में १करोड़ ६९लाख रुपए काम के दिया है वहीं जिस भदाने को पदमुक्त किया गया, उसी भदाने ने पिछले चार महीनों में ३ करोड़ 19 लाख रुपए का लाभ मनपा को दिया,ऐसा लगता है आयुक्त ने भदाने को इसका इनाम पदमुक्त करके दिया है। भदाने ने तत्कालीन कमिश्नर अच्युत हांगे से इस तथ्य की जांच करने की मांग की थी कि बाकी व्यापारियों के अंतिम निर्धारण में कुछ गोलमाल है और तत्कालीन अधिकारियों ने मामले में बहुत भ्रष्टाचार किया था। यह सब नए आयुक्त के संज्ञान में आने से पहले ही, यह प्रतीत होता है कि व्यापारियों के समर्थकों ने और भ्रष्टाचार में लिप्त व्यापारियों ने भदाने को पदमुक्त करने के लिए मनपा आयुक्त सुधाकर देशमुख पर दबाव डाला है। सभी का ध्यान इस पर लगा है कि क्या १६ करोड़ रुपए के विकास कार्यों को रद्द करने वाले मनपा आयुक्त देशमुख फिर से युवराज भदाने को पदभार दे रहे हैं क्या ?
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