• महानगरपालिका प्रशासन ब्लैकमेलिंग और राजनीतिक दबाव पर कर रहा है काम - मनपा पीआरओ भदाने किया आरोप !

    Reporter: fast headline india
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    महानगरपालिका प्रशासन ब्लैकमेलिंग और राजनीतिक दबाव पर कर रहा है काम - मनपा पीआरओ भदाने किया आरोप ! 

    मनपा आयुक्त को पत्रदेकर 15 दिनों में बाकी गैरकानूनी तरीके से दी गई पदों पर की गई है कार्यवाई की मांग ! 

     कार्यवाई नही होने पर समाजसेवक के जैसे आत्मदहन का रास्ता अपनाने को प्रशासन न करे मजबूर ? 

    मनपा आयुक्त से सीधे दो दो हाथ करने के मुंड में मनपा पीआरओ ! 

     उल्हासनगर -उल्हासनगर महानगर पालिका के मनपा पीआरओ युवराज भदाने ने मनपा आयुक्त सुधाकर देशमुख के कामकाज की शैली पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए, आयुक्त को एक लिखित पत्र देकर कई सारे आरोप लगाया है, भदाने को उपायुक्त के पदभार से मुक्त कर दिया गया है। उन्होंने अभी हाल में ही उल्हासनगर मनपा के मालमत्ता विभाग में उल्लेखनीय कार्य किया है। भदाने ने आरोप लगाया है कि महानगरपालिका प्रशासन राजनीतिक और ब्लैकमेलिंग करने वालो के दबाव में काम करता है। आयुक्त को यह भी चेतावनी दी है कि अगर अगले 15 दिनों के भीतर उन्हें फिर से नियुक्त नहीं किया जाता है, तो उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। बता दे कि युवराज भदाने, जो पिछले 17 वर्षों से मनपा में काम कर रहे थे, शुरू में उन्हें जनसंपर्क अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था, जिसके बाद उन्हें अतिक्रमण निरोधक दस्ता, संपत्ति विभाग, LBT विभाग, सामान्य प्रशासन जैसे विभिन्न विभागों में कार्यभार दिया गया था। उन्हें कुछ महीने पहले संपत्ति विभाग में उपायुक्त का पदभार दिया गया था। दो हफ्ते पहले, एक यूनियन के नेता और एक सामाजिक कार्यकर्ता ने युवराज भदाने पर कई आरोप लगाए थे ,जिसके कारण उन्हें उनके पद से हटा दिया गया था। सामाजिक कार्यकर्ता ने पदभार वापस न लेने पर आत्मदाह की चेतावनी दी थी। इस चेतावनी के बाद, मनपा आयुक्त सुधाकर देशमुख ने भदाने के उपायुक्त का पदभार वापस ले लिया। उल्हासनगर शहर में, एक नौकरशाही अधिकारी को एक अवैध निर्माण ठेकेदार से रिश्वत लेने वाले जैसे अधिकारीयो उच्च पदों पर बैठाया गया है, वही नही कई जूनियर (ग्रेड) कर्मचारी उच्च रैंक में काम कर रहे हैं, इन्हें उनके वरिष्ठ कर्मचारियों के ऊपर का गैर-कानूनी रूप से अधिकारी का दर्जा दिया गया है। यदि हां, तो ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ आयुक्त कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे है ! भदाने ने मनपा आयुक्त पर आरोप लगाया है कि एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा उन्हें हटाने और आत्महत्या करने की धमकी देने के तुरंत बाद उन्हें पद से हटा दिया गया था। 15 दिनों के भीतर, वरिष्ठ स्तर के कर्मचारियों / अधिकारियों को तुरंत हटा दिया जाना चाहिए ,अन्यथा अदालत का रास्ता खुला है। साथ ही साथ जिस तरह से एक सामाजिक कार्यकर्ता ने अपनी मांग पूर्ण करने के लिए अपने हथियार का इस्तेमाल किया था (सामाजिक कार्यकर्ता ने आत्महत्या करने की चेतावनी दी थी)। भदाने ने निगम से आग्रह किया कि वह इसका इस्तेमाल करने के लिए मजबूर न करे ,ऐसी चेतावनी भी दी है । इस पर जब मनपा आयुक्त सुधाकर देशमुख से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मैं प्रशासन के विषय पर बहुत अधिक टिप्पणी नहीं करूंगा, और जो भी निर्णय मुझे सही लगता है मैं वह निर्णय करूंगा ! अब यह लड़ाई किस मोड़ पर जाती है उस पर सभी शहर वाशियों की नजरे टिंकी हुई है !
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