• उल्हासनगर शहर के लिए आये अध्यादेश पर आयुक्त ने शहर वाशियों को दी विस्तृत जानकारी !

    Reporter: fast headline india
    Published:
    A- A+
    उल्हासनगर शहर के लिए आये अध्यादेश पर आयुक्त ने शहर वाशियों को दी विस्तृत जानकारी !

     17 तारीख से शुरू हुआ यह अवैध निर्माणों नियमित करने कानून ! 

    ऑनलाइ दे सकेगी शहर की जनता अपना सुझाव व आपजेक्शन ! 

    अवैध बिल्डिंगो को लीगल करने की पेनाल्टी में नही दी जाएगी छूट अफवाहों से रहे सावधान !

     कैसे करे अपनी प्रॉपर्टी को लीगल सब पर खुलकर दी जानकारी ! 

    यह मौका बार बार नही मिलेगा इस लिए इसका जरूर ले फायदा ! 

     उल्हासनगर-उल्हासनगर के अबैध निर्माणों को नियमित करने के राज्य सरकार और न्यायालय के 2006 के आदेश के बावजुद प्रशासन की उदासीनता के कारण नियमितीकरण और 855 इमारतों का मामला अधर में लटका था, 855 मामले में न्यायालय की लटकती तलवार कभी भी हमारे गर्दन पे आ सकती है ये जानकर उल्हासनगर के कुछ वरिष्ठ समाजसेवियों ने सच्ची भावना से उक्त मामले को राज्य सरकार के समक्ष रखा, 2015 से मामले को फॉलो करते हुए आज नतीजा ये निकला कि उल्हासनगर शहर के लिए राज्य सरकार और न्यायालय को संजीदा होकर 1 महीने में 4 अध्यादेश निकालने पड़े, उल्हासनगर के अवैध निर्माण नियमित करने के लिए आया अध्यादेश ठंडे बस्ते में पड़ता देख शहर के कैम्प 4 के रहिवासी और राज्य सरकार में सनदी अधिकारी एस एस ससाणे व आई एम मोरे की अध्यक्षता में उल्हासनगर संघर्ष समिती बनाई गई, समाजसेवी सुभाष भानुशाली और वास्तुकला रचनाकार आर्किटेक्ट अतुल देशमुख व अन्य मित्रों को समिती का हिस्सा बनाकर 2015 से तत्कालीन आयुक्त मनोहर हिरे को निवेदन दिया गया कि उल्हासनगर शहर को नियमितीकरण कानून का सहारा लेकर हजार करोड़ की कमाई करके दे सकते हैं, तत्कालीन उप सभापति माणिकराव ठाकरे के माध्यम से और प्रो. जोगेंद्र कवाडे को साथ लेकर समिती द्वारा राज्य सरकार के शहरी विकास विभाग सचीव नितीन करीर से पत्रव्यवहार शुरू हुआ, फॉलोअप शुरू हुआ, उक्त कार्य मे विधानपरिषद सदस्य रूपवन्त व रणपिसे ने समिती सदस्यों का निरन्तर साथ दिया, अंतः 4 साल की लंबी लड़ाई के बाद महाराष्ट्र विधानपरिषद उपसभापती व विनंती अर्ज़ समिती प्रमुख निलमताई गोरे जी के माध्यम से मुख्यमंत्री के मुख्य सचिव और शहरी विकास विभाग सचीव नितीन करीर जी से बैठकों का दौर फिर से शुरू किया गया, 28 अगस्त 2019 को नीलम ताई गोरे द्वारा उल्हासनगर संघर्ष समिती को पत्र भेजकर विधानभवन मंत्रालय में बैठक रखी गयी थी, उक्त बैठक में समिती द्वारा बताया गया कि, पिछले 13 वर्षों में शासन प्रशासन की उदासीनता के कारण जनहित में आये अध्यादेश का उपयोग उल्हासनगर वासी नहीं कर पा रहे, नियमितीकरण के लिए आये 5000 से अधिक निवेदनों पर उमपा प्रशासन या ठाणे जिलाधिकारी द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया, घाटे में चल रही उल्हासनगर मनपा को नियमितीकरण से हजार करोड़ का फायदा भी होगा और शहर भी नियमित हो जाएगा, तब 28 अगस्त 2019 की बैठक के अंत मे ये निर्णय हुआ कि, 10 दिन में उल्हासनगर महानगर पालिका के आयूक्त महोदय को नामित प्राधिकारी डेजिग्नेटेड ऑथोरिटी के रूप में नियुक्त किया जाए, और 9 सितम्बर को उल्हासनगर मनपा आयूक्त महोदय को राज्य सरकार द्वारा नामित प्राधिकारी डेजिग्नेटेड ऑथोरिटी के रूप में नियुक्त किया गया, पिछले दिनों में राज्य सरकार द्वारा प्राप्त अध्यादेश पर कैसे कामकाज किया जाए और कैसे उक्त अध्यादेशों को जनहित में लेकर उल्हासनगर वासियों को नियमितिकरण का अधिक से अधिक फायदा दिया जाए इसलिए उल्हासनगर महापौर कार्यालय में इस विषय पर विस्तृत चर्चा के लिये बैठक बुलाया गया था ! इस चर्चा के बाद मनपा आयुक्त सुधाकर देशमुख ने पत्रकारों के जरिये शहर वाशियों को इस अध्यादेश से होने वाले फायदे से अवगत कराया क्या बोलो सुनिए उन्ही की जुबानी,,,,,,,,,
  • No Comment to " उल्हासनगर शहर के लिए आये अध्यादेश पर आयुक्त ने शहर वाशियों को दी विस्तृत जानकारी ! "