• उल्हासनगर विधानसभा से अगला विधायक होगा कौन वह तय करेगा उल्हासनगर का चाणक्य ?

    Reporter: fast headline india
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    उल्हासनगर विधानसभा से अगला विधायक होगा कौन वह तय करेगा उल्हासनगर का चाणक्य ? 

    आयलानी-कालानी के चुनावी मुकाबला क्या इस बार होगी बराबरी या कालानी लेगे तीन - एक से बढ़त ! 

    अभी तक हुए मुकाबलों रोटेश होते हुए तस्वीर आई है सामने ! 

    आरपीआई के बागी उम्मीदवार किसको पहुचाते है कितना नुकसान ! 

    सिंधी मतदाताओ पर टिकी हुई दोनो उम्मीदवारो की नजरें ! 

    2014 के चुनाव में हुई थी कांटे की टक्कर 1863 मतों से मिली थी विजय !

     उल्हासनगर-उल्हासनगर विधानसभा चुनाव का अब तक पिछले तीन पंचवर्षीय इतिहास को देखा जाय तो कालानी और आयलानी कि चुनावी लड़ाई में दो बार कालानी विजयी रहे तो एक बार आयलानी ने बाजी मारी हुई है, इस चुनाव को पकड़ कर देखे तो आयलानी व कालानी का चौथी बार सीधे आमना सामना होने जा रहा है दो बारा पप्पू कालानी से हुए आमने सामने में मुकाबला एक एक कि बराबरी रही ज्योति कालानी और कुमार आयलानी का यह दूसरी बार आमना सामना होने जा रहा है पहली बार जीत कालानी परिवार की झोली में थी अब दूसरी चुनावी जंग में कौन बाजी मारता है इस पर सबकी नजरें टिंकी हुई है !
    गौरतल हो कि पिछले तीन पंचवर्षीय के इतिहास को देखे तो चुनाव 2004 में हुए चुनाव में आरपीआई के उम्मीदवार बने पप्पू कालानी को कुल 77668 मत मिले थे भाजपा उम्मीदवार कुमार आयलानी को 55397 मत मिले इसमें कालानी का परचम लहराया वही 2009 के चुनाव भाजपा के कुमार आयलानी 45257 मत मिले तो पप्पू कालानी निर्दलीय प्रत्याशी होने के चलते उन्हें 37719 मत मिले इसमें आयलानी का परचम लहराया 2014 के चुनाव में रांकपा की उम्मीदवार ज्योति कालानी को 43760 मत मिला जबकि भाजपा के उम्मीदवार कुमार आयलानी 41897 मत मिले और मात्र 1863 मतों से आयलानी पराजित हुए इस चुनाव में शिवसेना के उम्मीदवार धनजंय बोडारे 22 हजार मत मिले थे यह हार का कारण बना था अभी होने वाले चुनाव में भाजपा शिवसेना आरपीआई की युति होने की वजह से इस बार का समीकरण भाजपा के उम्मीदवार कुमार आयलानी की तरफ परन्तु वही इस बार सिंधी मतदाता किसका कितना साथ देते है वह भी इस मकाबले की अहम कड़ी रहेगी, जबकी कालानी को सबसे ज्यादा नुकसान किसी से होगा तो वह भगवान भालेराव जो अपक्ष उम्मीदवार है उनसे हो सकता है क्योंकि कालानी के गढ़ से कुछ इलाकों पर भालेराव का भी असर है वह उसी इलाके से खुद व अपनी पत्नी को नगरसेवक चुनाव में जीत करके आये हुए है कुल मिलाकर इस लड़ाई का हार जीत में कौन बाजी मारेगा उसका फैसला चुनावी रिजल्ट आने पर सामने आएगा ! इन सारे समीकरण के रिजल्ट को किसके पक्ष करना और उसे जीताने का अहम रोल उल्हासनगर के चाणक्य का भी रहता है ! अगर इस चाणक्य ने काम किया तो हारी हुई बाजी को जीत में बदलने काम होगा और जीत उसी खेमे की होगी जिस खेमे को उल्हासनगर यह चाणक्य चाहेगा अगर यह न्यूटल रहेंगे तो फिर समीकरण अलग रहेगा !
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