• उल्हासनगर का अगला महापौर साई पार्टी का होगा- जीवन ईदनानी

    Reporter: fast headline india
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    उल्हासनगर का अगला महापौर साई पार्टी का होगा- जीवन ईदनानी

     ढाई-ढाई साल के फार्मूले पर भाजपा व साई पार्टी के बीच हुआ है करार नाम ! 

    उमपा 18 नवम्बर होगा नामांकन, महापौर चुनाव 22 नवम्बर को होगा !

     इस विषय पर क्या कहना है साई पार्टी प्रमुख जीवन ईदनानी सुनिये उनकी जुबानी,,,,,,, 

    भाजपा अध्यक्ष व विधायक कुमार आयलानी ने करार नामा पर कहा मुझे उसकी नही है जानकारी ! 

    भाजपा मनोनीत नगरसेवक रामचंदानी फोन क्या कहे सुनिये उन्ही जुबानी !

     उल्हासनगर-उल्हासनगर महानगर पालिका के महापौर पद चुनाव का आरक्षण साधारण ओपन केटेगरी में लॉटरी द्वारा हुआ, जिसके बाद से उमपा के नए महापौर को लेकर भाजपा साई पार्टी, व शिवसेना ने अपना महापौर बनाने का दावा कर रहे है जिसको लेकर शहर की राजनीति गर्म हो गई है !
    बता दे कि महापौर पद का यह चुनाव 22 नवम्बर को दोपहर 12 बजे उल्हासनगर मनपा की महासभा में होगा, इस पर महापौर पद के दावेदार नगरसेवको को 18 नवम्बर दोपहर 3 बजे से 5 बजे तक अपना नामांकन भर सकते है। मनपा के भावी महापौर के लिए सामान्य आरक्षण के बाद, दो बड़े नगरसेवकों - भाजपा नेताओं जमनादास पुरस्वानी और महेश सुखरामानी ने मार्च करना शुरू कर दिया है। लेकिन अगर इस महापौर चुनाव में कालानी समर्थकों ने भाजपा के नगरसेवकों को बंद कर दिया, तो भाजपा की उल्हासनगर मनपा सत्ता जा सकती है और महाशिवआघाड़ी का महापौर बन सकता है। शिवसेना प्रमुख राजेंद्र चौधरी इसमें रुचि रखते हैं। 2017 उल्हासनगर महानगरपालिका चुनाव से पहले, उल्हासनगर में शिवसेना और भाजपा सत्ता में थे। दोनों के पास अच्छा समय था। इस मामले में, यह तरीका उल्हासनगर में लिया गया क्योंकि शिवसेना और भाजपा मुंबई, ठाणे, नासिक नगरपालिका चुनावों में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे थे। राज्य मंत्री रविंद्र चव्हाण और श्वेता शालिनी, जिनके पास उल्हासनगर की जिम्मेदारी है, इन्होंने उल्हासनगर की जिम्मेदारी स्वीकार की है। शिवसेना को सत्ता में आने से रोकने के लिए और भाजपा के हाथों में, भाजपा द्वारा कालानी परिवार को सत्ता में लाकर एक साथ 32 नगरसेवकों को चुनकर लाया गया था। 25 शिवसेना नगरसेवक, 11 साईं पार्टी नगरसेवक, 3 आरपीआई नगरसेवक, 1 कांग्रेस नगरसेवक, 4 एनसीपी नगरसेवक, भारिप बहुजन महा संघ के 1 सदस्य और एक पीआरपी नगरसेवक थे। चूंकि महापौर के चुनाव के लिए 39 का जादुई आंकड़ा आवश्यक था, इसलिए भाजपा ने साईं पार्टी से हाथ मिला कर सत्ता हासिल की थी। सवा साल महापौर भाजपा की मीना आयलानी थी, और फिर कालानी की बहू पंचम कालानी महापौर हैं। उनका कार्यकाल सवा साल का है और 20 नवंबर को समाप्त हो रहा है। शिवसेना और भाजपा ने विधानसभा चुनावों में एकजुट होकर लड़ाई लड़ी। तो, भाजपा के कुमार आयलानी विधायक बने। नए महापौर के चुनाव के दौरान विपक्षी शिवसेना के सत्ता में आने की प्रबल संभावना थी। चार से छह कलानी समर्थक नगरसेवक भाजपा से बाहर हो सकते हैं क्योंकि भाजपा ने कालानी परिवार को उल्हासनगर विधानसभा का टिकट नहीं दिया था। ऐसे में बीजेपी 5 से 19 नगरसेवकों, शिवसेना और साईं पार्टी की सत्ता बनाएगी। वहीं, केंद्र से विधानसभा तक शिवसेना और भाजपा का गठबंधन टूट गया है। इसलिए, अब सभी को भाजपा का ध्यान आ रहा है, जिसके साथ वह हाथ मिला रहा है। वर्तमान में, भाजपा में 31 नगरसेवक हैं और साई पार्टी में 12 नगरसेवक हैं। लेकिन अगर कालानी समर्थकों ने विधानसभा का बदल के लिए अनुपस्थित रहने का फैसला किया, तो भाजपा के महापौर का बनना मुश्किल होगा । महाराष्ट्र में, ग्रामीण क्षेत्रों में महाशिवआघाड़ी के सरपंच चुने गए हैं। अगर ऐसा ही उल्हासनगर मनपा में हुआ तो शिवसेना 25, एनसीपी 4, कांग्रेस 1 और रिपाई अठावले ग्रुप 3 की संख्या 33 हो जाएगी। इस समय, यदि साईं पार्टी भाजपा छोड़ कर शिवसेना में शामिल हो जाती है, तो शिवसेना के महापौर बैठ सकते हैं। यदि शिवसेना को अगर साईं पार्टी समर्थन नहीं करती है, तो महाशिव आघाड़ी उन कालानी परिवार कितने नगरसेवकों को फोड़ते है ,यह उनकी संख्या पर निर्भर है जो एनसीपी से भाजपा में वापस आ गए हैं। गौरतलब है कि उल्हासनगर शिवसेना और भाजपा के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध था। परन्तु अभी राज्य की राजनीति में छिड़े संग्राम का असर को देखते यह कहना सही होगा सत्ता पलटने के लिए शिवसेना भी पूरी तैयारी में जुटी हुई है !
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