• पहले बनाया ठगों ने बैंक,लोन देने के नाम की करोड़ो की ठगी !

    Reporter: fast headline india
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    पहले बनाया ठगों ने बैंक,लोन देने के नाम की करोड़ो की ठगी !

     क्राइम ब्रांच ने एक गिरोह का किया भंडाफोड़, 5 लोगों को गिरफ्तार ! 

     अलग-अलग बैंकों के कई-कई करोड़ के फर्जी चेक, ड्राफ्ट बनाकर लोगों को दे दिए लोन !

     बतौर मैनेजर इन पर खुद के सिग्नेचर भी कर दिए चेक ! 

    बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक, एक्सिस बैंक और स्टैंडर्ड चार्टेट बैंक के नाम दिए फर्जी चेक !

     मुंबई-मुंबई में लोन दिलाने के नाम पर ठगी के हजारों, लाखों मामले हर साल सामने आते हैं, लेकिन मुंबई में कांदिवली क्राइम ब्रांच ने ठगों के ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने अलग-अलग बैंकों के कई-कई करोड़ के फर्जी चेक, ड्राफ्ट बनाकर लोगों को दे दिए। बतौर मैनेजर इन पर खुद के सिग्नेचर भी कर दिए। डीसीपी अकबर पठान ने बताया कि इस केस में कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
    गौरतलब हो कि इनके पास से 50 से ज्यादा डिमांड ड्राफ्ट और चेक बरामद किए गए हैं। एक डिमांड ड्राफ्ट पर 9 करोड़ की राशि लिखी हुई थी, जबकि अन्य ड्राफ्ट चेकों पर एक करोड़ से लेकर पांच करोड़ लिखा हुआ पाया गया। यही नहीं, जिन बैंकों के नाम पर ठगी की गई, उनमें बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक, एक्सिस बैंक और स्टैंडर्ड चार्टेट बैंक के नाम प्रमुख हैं। सोशल मीडिया पर करवा रखा था प्रचार इन ठगों ने सोशल मीडिया व अन्य तरीकों से लोगों के बीच इस बात का प्रचार करवा रखा था कि ये लोग मुंबई की दो नामी फाइनैंस कंपनियों से जुड़े हुए हैं और किसी को भी बहुत आसानी से लोन दिलवा सकते हैं। कई कॉर्पोरेट हाउसेस के प्रबंधकों व बड़े व्यापारियों ने इनसे संपर्क किया। इन्होंने बिना किसी दिक्कत के उन्हें लोन दिलाने का वादा किया। जिन्हें लोन चाहिए, उनके नाम पर इन्होंने जरूरी फर्जी दस्तावेज बनाए। लोन लेने के लिए कोई न कोई प्रॉपर्टी या फिक्स्ड डिपॉजिट या इंश्योरेंस के कागजात गिरवी के लिए जरूरी होते हैं। आरोपियों ने लोन के इच्छुक लोगों से इन कागजातों की प्रतियां ले लीं और कहा कि जब रजिस्ट्रेशन के लिए जाएंगे, तब आपसे ओरिजिनल डॉक्युमेंट्स भी ले लेंगे।इसके बाद ठगों ने लोगों से कहा कि रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्ट्रेशन के लिए कैश लेकर आना। लोग वहां पहुंचते थे, तो वे ठगों को कैश दे देते थे। ठग रजिस्ट्रार ऑफिस जाते थे। ठगों को कैश देते थे। आरोपी उन्हें बाहर खड़ा रहने को कहते थे। इसके बाद आरोपी एक दरवाजे से घुसते थे और फिर किसी अन्य दरवाजे से कैश लेकर भाग जाते थे। बाद में सभी अपना मोबाइल भी बंद कर देते थे। कुछ दिनों पहले सीनियर इंस्पेक्टर चिमाजी आढाव को इस गिरोह के बारे में टिप मिली। उन्होंने फिर इंस्पेक्टर शरद झीने, दत्तात्रय मसवेकर, नितिन उतेकर की एक टीम बनाई। इसी में शोयब चांदीवाला, रवींद्र कामत, शफीक शेख, विजय ग्रोवर और हीरेन बोगायटा नामक आरोपी गिरफ्तार हुए। सभी आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि इन्होंने सिर्फ मुंबई नहीं, यूपी तक में कई लोगों को ठगा। मुंबई में साल 2010 में भी ये लोग गिरफ्तार हुए थे। एक जगह अपराध करने के बाद ये सब किसी दूसरे शहर में भाग जाते थे और फिर वहां भी लोगों को इसी तरीके से ठगते थे। लोन दिलाने के लिए वे लोगों को मुलाकात करने के लिए किसी फाइव स्टोर होटल में बुलाते थे। वहां वे सूट पहनकर आते थे, ताकि सामने वाले पर अच्छा इंप्रेशन पड़े। जो बाजार में लोन का रेट है, उससे आधा या एक प्रतिशत कम तक ही ये लोग बार्गेनिंग करते थे। ज्यादा सस्ता लोन देने पर इन्हें मालूम था कि लोग इन पर शक करेंगे। इन्होंने अलग-अलग नाम से पैन कार्ड और आधार कार्ड भी बनवा रखे थे। रजिस्ट्रार ऑफिस की फर्जी स्टैंप भी जालसाजों ने बनवा रखी थी। कई मामलों में इन्होंने लोगों को बोल रखा था कि वे खुद ही रजिस्ट्रार ऑफिस जाकर रजिस्ट्रेशन करवा लेते हैं, ताकि आप लोगों को वहां इंतजार न करना पड़े। इसके बाद रजिस्ट्रेशन के नाम पर वे रकम ले लेते थे और सामने वाले को लोन का चेक या डिमांड ड्राफ्ट दे देते थे, जो मूलत: सब फर्जी होते थे। बाद में सभी आरोपी फरार हो जाते थे।
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