• उमपा आयुक्त ने शहरवाशियो से रेग्युलराइजेशन के विषय पर किया आवाहन !

    Reporter: fast headline india
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    उमपा आयुक्त ने शहरवाशियो से रेग्युलराइजेशन के विषय पर किया आवाहन ! 

    अपने अवैध निर्माणों को रेग्युलराइजेशन करके ले अन्यथा अवधी समाप्त होने के बाद अबैध निर्माणों पर चलेगा मनपा का हथौड़ा ! 

    855 अवैध निर्माणों पर जो रेग्युलराइजेशन का नही लेगे लाभ पहले उन पर गिरेगी गांज ! 

    विशेष कानून पर मनपा आयुक्त सुधाकर देशमुख ने क्या दी जानकारी और क्या किया निवेदन सुनिये उनकी जुबानी,,,,,, 

    उल्हासनगर-उल्हासनगर शहर रेग्युलराइज़ेशन प्रक्रिया सुचारू रूप से कैसे चले, उक्त प्रक्रिया की जानकारी नगरसेवको को व उनके द्वारा रहिवासियो की अबैध निर्माणों को नियमितीकरण हो इसलिये उल्हासनगर मनपा आयुक्त सुधाकर देशमुख द्वारा 21 दिसम्बर 2019 के दिन मनपा महासभा कार्यालय में नगरसेवक, आर्किटेक्ट, पत्रकार बन्धुओं की उपस्थिति में कार्यशाला आयोजित की गई थी, उमपा महापौर लिलाताई आशान भी उपस्थित थी, उपस्थितो सभी को प्रोजेक्टर के माध्यम से आनलाइन प्रक्रिया की जानकारी दी गयी, उमपा आयुक्त के साथ जानकारी देने के लिए नगर रचनाकार मिलिंद सोनावणे भी उपस्थित रहे, नगरसेवको के लिये आयोजित कार्यशाला में अधिकतर नगरसेवक ही अनुपस्थित रहे, उपस्थित नगरसेवको, पत्रकारों द्वारा रेग्युलराइज़ेशन प्रक्रिया के लिये महत्वपूर्ण प्रश्न पुछे गये थे, 
    गौरतलब हो की सभी प्रश्नों का उत्तर देते आयुक्त ने बताया कि, राज्य सरकार के द्वारा जनहित याचिका उच्च न्यायालय 105/2003 और 144/2005 कोर्ट द्वारा नियमित करने के लिये जो अध्यादेश या नियमावली आई है उसके तहत शहरवासियों को अपनी 1 जनवरी 2005 के पहले बनी सम्पत्तियों को unrda.in इस वेबसाइट पे जाकर बी और सी फ़ॉर्म डाउनलोड करके ऑनलाइन ही रजिस्ट्रेशन करवाना है, 16 दिसम्बर 2019 से ही ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है जिसमे शहरवासियों की उदासीनता दिखाई दे रही है, ऐसा आयुक्त ने माना, ऑफ़लाइन करवाने की जो नगरसेवको की मांग थी वो आयुक्त ने उसे साफ मना किया, नगरसेवक प्रमोद टाले द्वारा उपस्थित प्रश्न ये कि, 2006 में 21,000 आवेदन दिए जानेपर समूर्ण प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी उन सभी 21,000 सम्पत्ति धारकों को आयुक्त द्वारा पुनः आवेदन करने की ज़बरदस्ती क्यु कर रहे है? इन 21,000 सम्पत्ती धारकों में से 14,000 धारकों को जिनको ठाणे जिलाधिकारी द्वारा कइयों को डी फार्म दिये गये उनको सिर्फ जुर्माना भरना था उनको फिर से ऑनलाइन प्रक्रिया से गुजरना है, जबकी ऐसा कहीं अध्यादेश में लिखा नहीं तब आयुक्त ने कहा कि, जिनको जो कागजाद 2006 से 2011 के बीच दिए गए है वो उन काग़ज़ादों को ऑनलाइन अपलोड करें उनपर तीनसदस्यीय समिती ध्यान देगी, टाले द्वारा एक खिड़की योजना लागु करते हुऐ गुजरात पैटर्न लागु करने की मांग दोहराई गयी उसमे आयुक्त ने ये कहा कि, जो भी नगरसेवको की मांगें है वो उन्हें लिखित में दें ताकि राज्य शासन को प्रस्तुत किया जा सके, 100 मीटर के अंदर जिनके निर्माण होंगे उनको 50 प्रतिशत पेनल्टी लगेगी, ऐसा नगरसेवक राजेश बधारिया का कहा इस सारे सवाल के उत्तर देते आयुक्त ने कहा यह प्रक्रिया और इसके अधिनियम राज्य शासन द्वारा लागु किया गया है, मैं सिर्फ़ इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्राधिकृत अधिकारी के रूप में काम कर रहा हु, शहर के 90 प्रतिशत आर्किटेक्ट इंजीनियर के लाइसेंस रिन्यु नही है, ऑर्किटेक्ट अतुल देशमुख द्वारा ये जानकारी दी गयी कि, पुर्व आयुक्त निम्बालकर द्वारा 1 लाख रुपये फीस भरकर लाइसेंस रिन्यु करने बोला गया था मगर उसको भी 2 साल हो गये, तब आयुक्त सुधाकर देशमुख ने आर्किटेक्ट बन्धुओं को राहत देते हुये ये आश्वासन दिया कि, आप लोग मात्र 50,000 रुपये डिपॉज़िट और 25,000 रुपये फ़ीस भरकर अपने लाइसेंस रिन्यु करने का आवेदन कीजिये, आठ दिन में प्रशासन द्वारा उक्त विषय पर विचार करके सभी आवेदन कर्ताओं के लाइसेंस रिन्यु किये जायेंगे, शहर की हज़ारों धोकादायक इमारतें, जो तोड़ी गयी सील की और खाली करवाई गई उनको रेग्युलराइज़ेशन प्रक्रिया में लाने के लिये आयुक्त महोदय ने पहले की तरह कहा कि जो भी कहना है वो नगरसेवक लिखित में दें ताकि वह राज्य सरकार को भेजा जा सके, 2019 के प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान के दायरे में, रोड कटिंग में आनेवाली इमारतें, नाले पे बनी, नदी के बफ़र ज़ोन में बनी इमारतें l, हाई टेंशन वायर के निचे आनेवाली इमारतें रेग्युलराइज़ नहीं होगी, 1974 का डेवलपमेंट प्लान लागु करते है तो अधिकतर इमारतों के रहिवासियो, दुकानदारों को लाभ मिलेगा, अन्यथा 2019 का डेवलपमेंट प्लान लागु किया गया तो शहर की 70 प्रतिशत सम्पत्तियां नियमित नहीं होगी ऐसा नगरसेवक राजू जग्यासी का कहना था, उस आयुक्त के पास क्या व्यवस्था है? ये प्रश्न उपस्थित होने पर आयुक्त ने कहा कि, 2019 का ही डेवलपमेंट प्लान लागु होगा, उसी के तहत रेडी रेकनर रेट द्वारा जुर्माना लिया जायेगा ना कि पुराने 2006 के तहत जुर्माना होगा ना ही तबके डेवलपमेंट प्लान के तहत रेगुलराइज़ेशन होगा, एफएसआई, धोकादायक इमारतें और रिडेवलपमेंट के विषय मे आयुक्त द्वारा सरकार से कोई भी बातचीत लिखित में नही चल रही है जो भी प्रस्ताव नगरसेवक लिखित में देंगे वो राज्य सरकार को भेजा जायेगा, टाले द्वारा 2006 तक की झोपडपट्टीयों को अभय देने की मांग की गई, गुजरात पैटर्न के माध्यम से कम से कम जुर्माना लेकर नियमित करने की मांग दोहराई गयी, प्रक्रिया को ऑफलाइन करते हुऐ एक खिड़की योजना लागु करने की मांग भी की गई, कोटक महिंद्रा कम्पनी की विश्वसनीयता व गोपनीयता पर प्रश्न उठाते हुये नगरसेवको ने मांग की है कि, प्रक्रिया सीएफसी सेंटर में ऑफलाइन पद्धति से चलाई जाए परंतु हर प्रश्न के उत्तर में आयुक्त ने यहकहा कि, जो भी प्रस्ताव नगरसेवक लिखित में देंगे वो राज्य सरकार को भेजा जायेगा, जो संपत्तियां रेग्युलराइज़ेशन प्रक्रिया में नही आ पायेगी या जो रिजेक्ट हो जायेगी उन प्रापर्टी को अनधिकृत मानकर उनपर अदालत के आदेशानुसार तोड़ू कार्यवाही की जायेगी, इसलिये शहरवासियों ने जल्द से जल्द इस योजना का लाभ लेते हुये अपनी संपत्ति नियमित करवायें, अदालत की अगली सुनवाई 16 जनवरी 2020 को है। इस समय रहते इसका लाभ ले और मनपा की कार्यवाही से बचे,!
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