• उल्हासनगर शहर बना गोल्ड स्मगलिंग अड्डा ?

    Reporter: fast headline india
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    उल्हासनगर शहर बना गोल्ड स्मगलिंग अड्डा ? 

     गोल्ड तस्करी में बड़े नाम दीपक सुहानी और जीतू माखीजा गैंग है सक्रिय ? 

     दो नम्बर ज्वेलरी बाजार के कुछ सोनार स्मगलिंग के गोल्ड के है बड़े खरीदार ! 

     कस्टम अधिकारियों की मिलीभगत मानव के प्राइवेट पार्ट के जरिये हो रही गोल्ड ! 

     गोल्ड की स्मगलिंग में उल्हासनगर शहर के 20 से 40 साल उम्र के महिला व पुरुष शामिल ! 

     सिंगापुर-बैंकॉक की हर टीप का उन्हें दिया जाता है 15 हजार रुपये !

     गोल्ड के बिस्किट पर कार्बन लगाकर मानव के प्राइवेट पार्टो के जरिए हो रहा यह तस्करी खेल !

     उल्हासनगर के पूरे नेटवर्क के मायाजाल से उठेगा एक एक स्मगलर व उनके चेहरों से नकाब ?

     तस्करी का गोल्ड खरीदारी करने वाले सोनार की भी खुलेगी पोल ? 


    उल्हासनगर-उल्हासनगर शहर इस समय गोल्ड स्मगलरों का अड्डा बन चुकी है इस गोल्ड तस्करी में मानव के पाइवेट पार्ट में गोल्ड का बिस्किट छुपाकर लाने का व्यवसाय उल्हासनगर में बड़े पैमाने पर चल रहा है।अब तक देश के विभिन्न एयरपोर्ट पर करोड़ो रूपये का गोल्ड को कस्टम अधिकारि पकड़ चुके है। इस मामले में आसानी से जमानत मिल जाने की वजह से इस धंधे में लिप्त लोगो ज्यादा तादात में शहर के युवा जिनकी उम्र 20 वर्ष से लेकर 40 वर्ष तक कि महिला व पुरुष का इस्तेमाल किया जा रहा है,एक ट्रिप की एवज में पर पर्सन को 15 हजार रुपये गोल्ड स्मगलर देते है।दुबई और बैंकाक से गोल्ड की इसमगलिंग करने वाली महिलाएं देश के अलग-अलग एयरपोर्ट पर मैनेज कस्टम अधिकारियों की देख रेख में इस गोरखधंधे को अंजाम दे रही है। 
    गौर तलब हो कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई ,कलकत्ता,इंदौर,पूना,नागपुर, कर्नाटक,चेन्नई एयरपोर्ट से गोल्ड स्मगलिंग का धंधा चालू है।गोल्ड स्मगलिंग करने वाले सूत्रों के मुताबिक इस धंधे में श्याम दाढ़ी,दीपू मदानी, जीतू माखीजा,दीपक सुहानी ,लारा,मीना, राजेश ,भाटिया,भारत,भावेश,योगेश ,कमलेश मुरपानी,देवी दास मुरपानी, वाशु टकला सक्रिय है।सबसे ज्यादा गोल्ड दीपक सुहानी और जीतू माखीजा गैंग के सदस्य दुबई और बैंकाक से ला रहे है।बताया जाता है कि इन गोल्ड स्मगलरों के कम से कम दस-दस महिलाये और युवक इनके टीम में गोल्ड लाने का काम करते है, सूत्रों के मुताबिक करंसी ले जाने और गोल्ड ले आने वालों को साइक्लिंग बोला जाता है,इन लोग पहले करंसी को कार्बन पेपर में लपेटते है और उसके बाद उस करंसी को अपने प्राइवेट पार्ट में उनके लोगो द्वारा डाला जाता है,और जहां का ट्रिप है वहा इन गोल्ड स्मगलरों के गुर्गे पहले ही एयरपोर्ट पर मौजूद होते है,साइक्लिंग वाले युवक -युवतियों को पहले होटल या तय कमरे में ले जाया जाता है,वहां करंसी निकाली जाती है उसके बाद उसी करंसी से गोल्ड के बिस्किट की खरीद दारी की जाती है।उसके बाद उस गोल्ड के बिस्किट को कार्बन में लपेटकर वापस उनके प्राइवेट पार्ट में डाल दिया  जाता है कस्टम अधिकारी को शक न हो इसलिए कोई भी साइकलिंग वाले युवक -युवतियों को 24 घंटे के बाद गोल्ड लेकर अलग-अलग एयरपोर्ट पर उतरने के लिए एरफ्लाइट का टिकट दिया जाता है। गोल्ड या करंसी को कार्बन में इसलिए लपेटा जाता है ताकि इंटर नेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षा के लिए लगाई गई स्कैन मशीन में स्कैन होने के बाद भी कस्टम अधिकारियों को करंसी या गोल्ड की भनक नही लग पाए, सूत्र बताते है कि कुछ एयरपोर्ट पर पहले कस्टम अधिकारियों से सेटिंग से सहूलियत मिलती थी,परन्तु पिछले दो वर्षों में कस्टम अधिकारियों की पैनी नजर के चलते करीब 50 करोड़ रुपये का गोल्ड विभिन्न एयरपोर्ट पर पकड़ा जा चुका है,हाल ही में इंदौर एयरपोर्ट पर तकरीबन ढाई करोड़ का जो गोल्ड मुखीबिरो के जरिये पकड़ा गया था वह भी दीपक सुहानी और जीतू माखीजा का था।दुबई और बैंकाक से लाये हुए गोल्ड के ख़रीद दार कतार में खड़े होने की वजह से गोल्ड स्मगलरों का यह गोरखधंधा जोर में चल रहा है। स्मगलिंग किया हुआ गोल्ड को उल्हासनगर दो नम्बर के सोनार बाजार के कुछ सोनारों के द्वारा खरीदा जाता है जल्द ही उनके चेहरे से उठेगा नकाब ?
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