• उपमहापौर व उनके गुंडों के सामने नतमस्तक हुई उल्हासनगर पुलिस !

    Reporter: fast headline india
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    उपमहापौर व उनके गुंडों के सामने नतमस्तक हुई उल्हासनगर पुलिस !

     पत्रकार चौहान के घर रिपेरिंग बांधकाम को अपने गुंडे भेजकर तुड़वाने किया भालेराव ने कारनामा ! 

    गुंडों ने साइड पर बांधकाम तोड़ा और साइड से लोहा व पतरे को लिया लूट ! 

    पुलिस ने पत्रकार को सात घण्टे पुलिस स्टेशन बैठाकर रखा नही दर्ज किया एफआईआर ! 

    50 हजार का हप्ता न मिलने पर उपमहापौर भेजे अपने गुंडों को दिया इस पूरी घटना को अंजाम -पत्रकार चौहान ने लगाए गभीर आरोप !

     गुरुवार को ठाणे सीपी से मिलकर सभी पत्रकार देगे इस घटना की शिकायत ? 


    उल्हासनगर-उल्हासनगर पुलिस स्टेशन की हद उल्हासनगर महानगरपालिका के उपमहापौर भगवान भालेराव के पाले हुए गुंडों के द्वारा कानून की धज्जियां उठाते हुए दिन दहाड़े दोपहर के एक बजे के दरम्यान दैनिक यशोभूमि के पत्रकार के द्वारा अपने घर के रिपेरिंग किये जा रहे बांधकाम पर हमला करते हुए बनाये जा रहे बांधकाम को तोड़ा और काम कर रहे मजदूरों को मारा और भगा दिया और वहा से लोहे के तीन लंबे टी और 10 से 12 पतरे लूटकर ले गए है ! इसकी घटना की सूचना पत्रकार चौहान ने उल्हासनगर पुलिस को दी पुलिस ने मौके पर जाकर पंचनामा करके आई और दोपहर तीन बजे से रात को दस बजे तक पुलिस ने पत्रकार चौहान को पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने के नाम पर सात घण्टे बैठाकर फिर भी पुलिस ने उपमहापौर के दबाव में एफआईआर दर्ज किए बिना पत्रकार को वापस भेज दिया है ! 
    सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार दैनिक यशोभूमी के पत्रकार सुरेश चौहान ने दुर्गानगर कॅम्प नम्बर एक में एक घर लिया है उसी की रिपेरिंग का बांधकाम रहे है इस बांधकाम को करते समय उल्हासनगर महापालिका उप महापौर भगवान भालेराव ने काम को बंद करवाकर पैसे की मांग कर रहे थे. और उनकी मांग जब पूरी नही हुआ तो भालेराव ने अपने गुंडों को बुधवार की दोपहर 1 बजे भेज कर बांधकाम को तुड़वाया साथ मे पत्रे और लोहे की तीन बड़ी टी गटर को लूटकर चलते बने.उस घटना के मामला उल्हासनगर पुलिस स्टेशन पहुचा पुलिस ने घटना स्थल पर पहुचकर पंचनामा किया उसके बाद से शुरू हुआ राजकीय गुंडे के सामने नतमस्त पुलिस का फिल्मी ड्रामा सात घण्टे पत्रकार चौहान पुलिस स्टेशन बैठने के बाद भी एफआईआर इस लिए दर्ज नही हुआ क्योंकि उल्हासनगर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सुशिल जावले पत्रकार को सीधा कहा कि तुम शिकायत में से भालेराव का नाम नही निकालते हो एफआईआर दर्ज नही होगा ज्यादा करोगो तो तुम्हार एनसी दर्ज कर लेंगे. इसमें सबसे चौकाने वाली बात यह है जब यह सब हो रहा था तब भालेराव पुलिस के साथ था. जो लाकप में बंद होना चाहिए वह पुलिस के साथ ऐसी में बैठकर शिकायत को बदली करवा रहा था. आखिरकार हप्तेखोर राजनेताओं कौन देगा उल्हासनगरवासीयो को सरंक्षण ? यहाँ पर मराठी का एक मुँहावरा फिट बैठता है जब "पोलीस तर ताटाखालचे मांजर "जब रक्षक ही आरोपियों का संरक्षण देने लगे तो आखिरकार न्याय की उम्मीद कैसे रखे,बहरहाल सात घण्टे बाद पत्रकार चौहान को बिना शिकायत लिए वापस कर दिया गया जब चौथे स्तंभ के साथ पुलिस ऐसा कर सकती आम आदमी के साथ कैसा सुलूक होता होगा वह तो सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा सकता है,,देखिए पत्रकार सुरेश चौहान ने क्या किया है भालेराव पर आरोप सुनिये उनकी जुबानी,,,,,, इस विषय पर उपमहापौर भगवान भालेराव की प्रतिक्रिया लेने के लिए उनके मोबाइल पर संपर्क किया गया उन्होंने फोन नही उठाया जिससे उनकी रॉय सामने नही आ पाई है !
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