• उमपा द्वारा शुरू रेग्युलराइजेशन ऑनलाइन प्रक्रिया में हुआ नायब कारनामा !

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    उमपा द्वारा शुरू रेग्युलराइजेशन ऑनलाइन प्रक्रिया में हुआ नायब कारनामा ! 

    अधिकृत आर्किटेक्ट के नाम पर सी फ़ॉर्म पर किया गया नकली साइन ? 

    रेग्युलराइज़ेशन ऑनलाइन सबमिशन प्रक्रिया खटाई में पड़ने के आसार ! 

    क्या मनपा प्रशासन फाइल सबमिशन करने वाले फर्जी हस्ताक्षर के दस्तावेज देने वालो के खिलाफ दर्ज करेगी 420 मामला ? 

     उल्हासनगर-उल्हासनगर नियमित करने के राज्य सरकार और न्यायालय के आदेश के बाद ऑनलाइन नियमितीकरण प्रक्रिया शुरू है, बी और सी फ़ॉर्म सबमिशन के लिए शहर के आर्किटेक्ट इंजीनियर मनपा द्वारा नियुक्त है, 2006 जिलाधिकारी द्वारा विकास नेहते स्ट्रक्चरल इंजीनियर नियुक्त हुये थे, तब भी उन्होंने सैंकड़ो की तादाद में प्रापर्टी को नियमित करवाया था, अब उन्ही के नकली हस्ताक्षर से ही सी फार्म सबमिशन होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है और इसकी शिकायत खुद विकास नेहते स्ट्रक्चरल इंजीनियर उन्होंने मनपा आयुक्त से किया है !
     गौरतलब हो कि पिछले साल उमपा आयुक्त पद निर्देशित अधिकारी बने, तब फिर से विकास नेहते ने जनवरी 2020 से ऑनलाइन प्रॉपर्टी सबमिशन का काम शुरू किया, तीन महीने में अबतक 70-80 फाइल सबमिशन कर चुके हैं, उमपा आयुक्त द्वारा दो दिन पहले पब्लिसिटी लिस्ट भेजी गई जिनमे आजतक जितने लोगों ने ऑनलाइन सबमिशन करके बी और सी फ़ॉर्म भरे है उसकी जानकारी थी, तब विकास नेहते द्वारा सभी फाइलों को जांच करने पर उन्हें पता चला कि तीन सी फ़ॉर्म पर इनके दस्तखत स्केन करके क्रॉप करके फ़ोटो कॉपी करके चिपकाए गये, 1228 किशनचंद नैनी, 1248 मोहित अपार्टमेंट, 1291 प्रभु आस्था सेक्रेटरी इन तीन सी फ़ॉर्म के निचे जहां स्ट्रक्चरल इंजीनियर या आर्किटेक्ट के हस्ताक्षर होते है वहां पर उनके नाम के चिपकाये हस्ताक्षर देखकर दंग रह गए, तुरंत ही उमपा आयुक्त और रेग्युलराइज़ेशन प्रक्रिया के लिये राज्य सरकार द्वारा नियुक्त पद निर्देशित अधिकारी सुधाकर देशमुख से स्ट्रक्चरल इंजीनियर विकास नेहते द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई, आयुक्त महोदय ने तुरंत ही ध्यान इस मामले को गंभीरता से लिया है और पूरे मामले की जांच करने की बात भी कही है। वही लोगो का कहना है कि इस मामले के सामने आने के बाद तो आयुक्त को तुरंत ही सबमिशन रोक देना चाहिए, और अन्य आर्किटेक्ट व स्ट्रक्चरल इंजीनियर ने भी वेबसाइट पर जाकर जांच करनी चाहिए कि उनके नाम से भी कहीं किसी ने गलत तरीक़े से तो फॉर्म सी या फ़ॉर्म सबमिशन तो नहीं किये गये है ! जो भी इस मामले से इतना साफ है कि रेग्युलराइज़ेशन ऑनलाइन सबमिशन प्रक्रिया खटाई में पड़ने के आसार दिखाई दे रहा है !
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