• कोरोनावायरस लॉकडाउन के बीच RBI ने आम जनता को दी बड़ी राहत !

    Reporter: first headlines india
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    कोरोनावायरस लॉकडाउन के बीच RBI ने आम जनता को दी बड़ी राहत ! 

    बैंक लोन की तीन महीने तक EMI में दिया गया राहत ! 

    क्रेडिट कार्ड धारकों को नही है दिया गया कोई राहत ?

    लोन की EMI आई नही भरने पर नही लगेगा कोई अतिरिक्त चार्ज !

     पूर्व वित्त मंत्री ने EMI की तारीख पर उठाया सवाल !

     EMI तिथियों को स्थगित करने की दिशा अस्पष्ट और आधी-अधूरी है ! 

    सभी EMI देय तिथियों को ऑटोमैटिक स्थगित कर दिया जाना चाहिए-पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम 


    मुंबई-मुंबई कोरोनावायरस और उसके आर्थिक प्रभावों से निपटने के लिए सरकार के बाद अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है. आरबीआई ने नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में 0.75 प्रतिशत की कटौती की है. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को कहा कि रेपो दर को मौजूदा समय में 5.15 प्रतिशत से घटाकर 4.4 प्रतिशत किया गया है. मौद्रिक नीति समिति (MPC) के 6 सदस्यों में से चार ने इस कदम के पक्ष में वोट किया है. इससे होम लोन समेत अन्य कर्जों की ईएमआई में कमी आने की उम्मीद है. आर्थिक नरमी को दूर करने के लिए आरबीआई इससे पहले भी कई बार नीतिगत ब्याज दर में कटौती कर चुका है. साथ ही बैंकों को दरों में पर्याप्त कटौती करने का भी निर्देश दिया था.   आरबीआई ने रेपो रेट में 0.75 प्रतिशत यानी 75 आधार अंक की कटौती की है. लॉकडाउन के बीच हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक में बाद रेपो दर को 5.15 प्रतिशत से घटाकर 4.4 प्रतिशत करने की घोषणा की गई. आरबीआई गवर्नर ने कहा कि रेपो दर में कमी से कोरोना वायरस महामारी के आर्थिक प्रभाव से निपटने में मदद मिलेगी. आरबीआई ने कहा कि कोरोनावायरस को देखते हुए मौद्रिक नीति समिति की बैठक निर्धारित समय से पहले करने का फैसला किया गया. पहले यह बैठक 31 मार्च, 1 अप्रैल और 3 अप्रैल को प्रस्तावित थी.  वहीं, रिवर्स रेपो रेट में 90 आधार अंक यानी 0.90 प्रतिशत की कटौती की घोषणा की गई है. अब रिवर्स रेपो रेट 4 प्रतिशत होगा. आरबीआई गवर्नर ने कहा कि सीआरआर में कटौती, रेपो दर समेत अन्य कदम से बैंकों के पास कर्ज देने के लिए 3.74 लाख करोड़ रुपये के बराबर अतिरिक्त  नकद धन उपलब्ध होगा.आरबीआई गवर्नर ने बताया कि नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 1 प्रतिशत की कटौती का फैसला लिया गया है. सीआरआर 3 प्रतिशत पर आ गया है. इस कदम से वित्तीय प्रणाली में पर्याप्त पूंजी सुनिश्चित होगी. CRR वह राशि है जो वाणिज्यिक बैंकों को रिजर्व बैंक के पास रखना अनिवार्य होता है. दास ने कहा कि इस कदम से बैंकों के पास 1,37,000 करोड़ रुपये की पूंजी आएगी.कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए सभी वाणिज्यिक बैंकों और ऋण देने वाले संस्थानों को सभी प्रकार के कर्ज की किस्तों की वसूली पर तीन महीने तक रोक की छूट दी गई है. दास ने कहा कि आरबीआई की स्थिति पर कड़ी नजर है, नकदी बढ़ाने के लिये हर कदम उठाये जाएंगे. आरबीआई गवर्नर ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति ने अनिश्चित आर्थिक माहौल को देखते हुए अगले साल के लिये आर्थिक वृद्धि, मुद्रास्फीति के बारे में अनुमान नहीं जताया. उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा और उन्होंने वैश्विक मंदी की आंशका जताई है. ********************************

     पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते किए गए लॉकडाउन के ऐलान के बीच RBI की ओर से रेपो रेट में कटौती और तीन महीने के लिए EMI को टालने के फैसले का स्वागत किया  है. लेकिन उन्होंने साथ में यह भी जोड़ा कि EMI तिथियों को स्थगित करने की दिशा अस्पष्ट और आधी-अधूरी है. मांग यह है कि सभी EMI देय तिथियों को ऑटोमैटिक स्थगित कर दिया जाना चाहिए. साथ में उन्होंने कहा, 'मैंने सुझाव दिया था कि 30 जून से पहले पड़ने वाली सभी नियत तारीखों को 30 जून तक के लिए टाला जा सकता है. उधारकर्ताओं को संबंधित बैंक पर निर्भर बना दिया गया है और निराश हो जाएगा'.  पूर्व वित्त मंत्री ने गुरुवार को सरकार की ओर से किए गए आर्थिक राहत के ऐलान पर भी खुशी जाहिर की थी. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से फाइनेंसियल ऐक्शन प्लान लाया गया है. वह उनकी ओर से सुझाए गए 10 बिंदुओं से मिलता जुलता है. लेकिन हालात को यह देखते हुए यह काफी नहीं है. सरकार को जल्द ही अहसास होगा कि इसमें और भी कुछ करने की जरूरत है. पी. चिदंबरम ने ट्वीटर पर कहा, 'आप देखेंगे कि किरायेदार किसानों और निराश्रितों को मदद, रोजगार और मजदूरी के मौजूदा स्तर को बनाए रखने, कर अवहेलना, ईएमआई स्थगन, जीएसटी दर में कटौती, आदि जैसे सुझावों पर ध्यान नहीं दिया गया है. आइए उम्मीद करते हैं कि शीघ्र ही एक प्लान-2 होगी. एक साथ किए गए कई अलग-अलग ट्वीट में उन्होंने कहा, योजना तीन महीने के लिए गरीबों को पर्याप्त अतिरिक्त खाद्यान्न देती है, और यह स्वागत योग्य है. योजना में गरीबों की जेब में पर्याप्त नकदी नहीं देता है। कुछ वर्गों को पूरी तरह से छोड़ दिया गया है'. हमारा अनुमान (अतिरिक्त धन जो हस्तांतरित किया जाएगा (अनाज और दालों के मूल्य सहित) 1 लाख करोड़ रुपये है. आवश्यक है लेकिन पर्याप्त नहीं है.  
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