• करोना महामारी लॉकडाउन में दिहाड़ी मजदूरों के लिए 'अन्नपूर्णा' बनीं 12 लड़कियां !

    Reporter: first headlines india
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     लॉकडाउन में काम बंद होने पर भुखमरी के दौर से गुजर रहे थे दिहाड़ी मजदूरों के परिवार ! 


     लड़कियों ने सोशल मीडिया के जरिए मांगी जनप्रतिनिधियों से मदद ! 

    अब सभी दिहाड़ी मजदूरों को मिल रहा दो टाइम का खाना ! 

    भिवंडी-भिवंडी कोरोना वायरस महामारी की वजह से देश भर में लागू लॉकडाउन की मार दिहाड़ी मजदूरों पर सबसे ज्यादा पड़ी है। काम बंद होने से कई मजदूरों के परिवार में भुखमरी का संकट मंडराने लगा है। ठाणे के भिवंडी इलाके की एक स्लम बस्ती में ऐसे ही कई मजदूरों का परिवार रहता है। कई दिनों से काम न मिलने की वजह से परिवार के लोग भूखे-प्यासे दिन काट रहे थे। इस बीच कॉलेज में पढ़ाई करने वाली 12 लड़कियों का एक ग्रुप इन मजदूर परिवारों के लिए किसी फरिश्ते की तरह सामने आया।
    छात्राओं ने मजदूरों की मदद के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया और स्लम बस्ती के लोगों की समस्याओ को वीडियो और तस्वीरों के जरिए जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाया। ठाणे के क्रीक एरिया के पास घनी आबादी वाला एक स्लम एरिया है। यहां रहने वाले ज्यादातर पुरुष मजदूर हैं और महिलाएं लोगों के घरों में काम करती हैं। कोरोना वायरस महामारी के कारण लागू लॉकडाउन की वजह से काम ठप हो जाने के बाद स्लम इलाके में रहने वाले लोगों के लिए भूखों मरने की नौबत आ गई। ऐसे में समीक्षा कांबले, पूजा चौरसिया और पल्लवी वाव्हल के नेतृत्व में 12 छात्राओं के समूह ने झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों की मदद करने का फैसला किया। संकट की इस स्थिति को लोगों के सामने लाने के लिए छात्राओं ने सोशल मीडिया का सहारा लिया। उन्होंने एक गैर सरकारी संगठन स्नेहा से मदद मांगी। एनजीओ के कार्यकर्ताओं ने छात्राओं को जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क साधने में मदद की। इसके बाद छात्राओं ने स्लम एरिया में साफ-सफाई के मुद्दे को भी अथॉरिटी क सामने रखा और नगर निगम के अधिकारियों के सामने बस्ती को सैनेटाइज करने की मांग रखी। छात्राओं की इस पहल के बाद एक स्थानीय कॉर्पोरटर मिलिंद साल्वी और उनकी पत्नी अपर्णा ने सबसे पहले मदद के लिए हाथ बढ़ाया। इसके बाद मंत्री जितेंद्र अव्हाड की मदद से बस्ती के लोगों को दोनों समय का भोजन मुहैया कराने का काम शुरू किया गया।
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