• उल्हासनगर में मिला कोरोना पाजोटिव मरीज !

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    उल्हासनगर में मिला कोरोना पाजोटिव मरीज ! 

     उल्हासनगर वाशियों हो जाओ सावधान नही टाइटेनिक जहाज के जैसे डूब सकता है पूरा शहर ? 

     उल्हासनगर के कोविड अस्पताल में 5 मरीजों का हो रहा है ईलाज !

     उनमें से दो मरीज बदलापुर के है शामिल ! 

     28 से 30 अप्रैल तक सब्जी व फल की दुकानें पूरी रहेगी बंद ! 

     उल्हासनगर को रखना है सुरक्षित तो बाहर से आने वाले ब्यक्ति से रखे दूरी ! 

    देखिये इस पूरे मामले पर उमपा आयुक्त देशमुख ने क्या दी जानकारी और क्या किया आवाहन सुनिये,,,,,,    

    उल्हासनगर- उल्हासनगर शहर में एक और कोरोना का मरीज मिलने से जहां हड़कंप मच गया है वहीं उल्हासनगर महानगरपालिका के आयुक्त सुधाकर देशमुख की चिंता बढ़ गई है। उन्होंने मीडिया को दिए बयान में बताया कि कैम्प 4 में भीड़ वाले ईलाके से एक कोरोना का मरीज मिला है। मनपा के आरोग्य अधिकारी डाॅ. राजा रिजवानी ने बताया है कि कैम्प चार संभाजी चौक परिसर में एक 44 वर्षीय व्यक्ति कोरोना पाॅजिटीव पाया गया है।
    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उपरोक्त व्यक्ति पुलिस कर्मी है। पिछले करीब कुछ दिनों से उसका ईलाज कोविड अस्पताल में चल रहा था। सोमवार सुबह को उसकी रिपोर्ट पाॅजिटीव आयी है। डाॅ. रिजवानी ने बताया कि उल्हासनगर के कोविड अस्पताल में बदलापुर के भी दो मरीजों का ईलाज चल रहा है। उल्हासनगर के दो मरीज और एक नेहरू चौक परिसर की नेगेटिव पायी गई महिला को मिलाकर कुल 5 मरीजों का ईलाज कोविड अस्पताल में चल रहा है। वहीं मनपा आयुक्त ने सोमवार दोपहर 1 बजे यह आदेश निकाला है कि 28 से 30 अप्रैल तक सब्जी मंडी व फलों की विक्री को पूर्ण रूप से बंद रहेगी। वहीं मनपा आयुक्त सुधाकर देशमुख ने सोशल मीडिया पर दिए गए संदेश में कहा है कि उल्हासनगर -4 में एक भीड़ वाले इलाके जीजामाता कॉलोनी, संभाजी चौक से संक्रमित मरीज पाया गया है। उल्हासनगर में पाया गया कोरोना पॉजिटिव मरीज आज शहर के लिए बहुत चिंता का विषय है। पुलिस द्वारा दंडित किए जाने के बावजूद अनुशासन तोड़ने वालों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। जीजामाता कॉलोनी के पास का एक बड़ा हिस्सा झुग्गी या भीड़-भाड़ वाली झोपड़ी है। इसलिए कोई भी यहां कोरोना रोग के प्रसार को नियंत्रित नहीं कर सकेगा।  मुंबई शहर में यह बीमारी तेजी से फैल रही है और हर दिन मरीजों की संख्या दोगुनी हो रही है। ठाणे और मीरा भयंदर में इसका फैलना भी बहुत चिंताजनक है। कोरोना बीमारी ने राक्षसी रूप लेना शुरू कर दिया है। इसलिए शहर को बीमारी मुक्त रखना प्रशासन के हाथ में नहीं बल्कि अनुशासित नागरिकों के हाथों में है। मुंबई और उसके उपनगरों में कोरोना के बढ़ते प्रभाव के कारण, उल्हासनगर के निवासी या उल्हासनगर के निवासियों के रिश्तेदार शहर में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। बार-बार अपील के बावजूद, नागरिकों से कहा जाता है कि वे रिश्तेदारों के पास न जाएं और न ही रिश्तेदारों को बुलाएं। ये मामले पुलिस के नियंत्रण से बाहर हैं। गांवों में नागरिकों ने पूरा अनुशासन दिखाया है और राज्य के गांवों में यह बीमारी नहीं पहुंची है। लेकिन  शिक्षित लोगों के शहरों में दुर्भाग्य से इसका पालन कम हो रहा है। शहर में आवश्यक सेवाओं के दुकानदारों और सब्जी विक्रेताओं के लिए कई नियम निर्धारित किए गए हैं। प्रशासन उन पर नियमों का पालन करने का दबाव डाल रहा है। लेकिन न तो दुकानदार और न ही ग्राहक अनुशासन को लेकर गंभीर है। प्रशासन के लिए सब कुछ रोकना कभी भी संभव नहीं है। शिकायतें इसलिए की जाती हैं क्योंकि लोग अनुशासन का पालन नहीं करते हैं, लेकिन अनुशासन का पालन नहीं करने और देखने वालों की संख्या बढ़ रही है और अनुशासन का पालन करने वालों की संख्या कम हो रही है। नतीजतन, पुलिस और प्रशासनिक कर्मचारियों, जो मूल रूप से सीमित हैं, पर तनाव बढ़ रहा है और बीमारी नियंत्रण पर काम करने की तुलना में शिकायतों को हल करने में अधिक समय लगता है।    शहरवासियों के हाथ से समय अभी तक नहीं गुजरा है। हम अभी भी अपने क्षेत्र के लोगों को अनुशासित कर सकते हैं। शहर तभी बच सकता है जब हम कम से कम 20 मई तक इस बीमारी को नियंत्रण में रखें। अन्यथा यह कहना मुश्किल है कि इस शहर को कौन बचाएगा। राज्य में नगर निगमों में से एक में कोरोना संक्रमण के कारण निगम के चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी को छोड़ दिया गया है। कई शहरों में डॉक्टर और नर्स कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं। इसलिए, यह गारंटी देना बहुत मुश्किल है कि यह प्रणाली कितने दिनों तक चल सकती है।  देशमुख ने कहा कि मैं बहुत चिंतित हूं। प्रशासन अब सभी उपाय करके लोगों की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। हालांकि, जनता से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसलिए नियमों को पालन कर आपकी सुरक्षा आपके हाथ है।
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