• आठ पुलिस की हत्या के आरोपी गैंगस्टर विकास दुबे के किले जैसी अभेध सुरक्षा वाला मकान मिनटों किया गया जमींदोज !

    Reporter: first headlines india
    Published:
    A- A+
    आठ पुलिस की हत्या के आरोपी गैंगस्टर विकास दुबे के किले जैसी अभेध सुरक्षा वाला मकान मिनटों किया गया जमींदोज ! 

    एसओ तिवारी को पुलिस ने किया सस्पेंड, पुलिस की रेट की इनफार्मेशन लीक करने के है सक !

     देखिये इस गैंगस्टर की पूरी कुंडली और कैसे घर समेत लक्जरी गाड़ी को भी किया तहसनहस ,,,  

    कानपुर- कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों का हत्यारोपी विकास दुबे का बिकरू गांव में लगभग 2000 वर्ग मीटर में है घर है। सुरक्षा घेरा इतना हाई-फाई है जैसे किसी हाई सिक्योरिटी वाले किले जैसी हो। घर के बाहर का कोई ऐसा कोना नहीं जो हाई रिजोल्यूशन नाइट विजन सीसीटीवी कैमरे से लैस न हो। अभेध सुरक्षा वाला घर पुलिस ने धड़ाधड़ जेसीबी से मिनटों में जमीदोज कर डाला। 
    विकास ने पुराने घर को बंकर बना रखा था। नया घर बन जाने के कारण पुराना घर करीब एक फुट गड्डे में चला गया है। सुरक्षित करने के लिए पुराने घर में भी तीन ओर से दरवाजे लगे हैं। यदि कोई एक दरवाजे पर खटखटाए तो दूसरे दरवाजे से सुरक्षित निकला जा सकता है। इसी घर में गोला बारूद जमा था। छतों से हथियारबंद बदमाशों इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दिया।  विकास दुबे के पुराने घर में भी बाहर जाने और अंदर आने के लिए तीन दरवाजे हैं। उस घर के पीछे जब कोठी बनाई तो वहां भी उसने आने जाने के लिए तीन दरवाजे बनवाए। उसके जानने वालों के मुताबिक वह हर निर्माण तांत्रिक से पूछकर ही कराता है।   विकास ने आठ कैमरे तो सिर्फ घर के बाहर फ्रंट से लेकर बगल में लगा रखे थे।  दो कैमरे मेन गेट के भीतर दाखिल होने पर मेन बिल्डिंग के सामने परिसर के भीतर लगे हैं। हालांकि इसमें से एक टूटा हुआ मिला है। एक कैमरा मेन बिल्डिंग के ठीक पीछे लगा है। एक कैमरे परिसर के भीतर साइड में बने गेट के बाहर लगा है जो शिवली मार्ग की तरफ निकलता है। यानि किसी भी मार्ग से कोई आए उसके लिए बहुत आसान है इस बात का पता लगाना कि किधर क्या हलचल है।  मेन गेट ऐसा कि जेसीबी से भी जल्दी न टूटे  विकास दुबे ने मेन गेट ऐसा बनाया है कि जेसीबी से भी आसानी से न टूट पाए। अगर इसके भीतर पुलिस दाखिल हो भी जाए तो मेन बिल्डिंग में लोहे का ऐसा जाल लगा लगा है कि भीतर घुस पाना मुश्किल है। अगर किसी तरह से तोड़ भी दिया जाए तो कम से कम एक घंटे लग जाएंगे। बाहर से भीतर की बात करें तो बुलंद दरवाजे से लेकर भीतर तक पुलिस अगर दाखिल भी हो जाती तो दो घंटे लगते और इतने वक्त में विकास दुबे कहीं भी भाग सकता था। दरअसल जेल जैसी चारो तरफ की दीवारें हैं जिस पर कटीले तार लगे हैं। मेन गेट ऐसा है कि दो लोग जुटें तो खुले। मेन बिल्डिंग के बरामदे में लोहे का जाल लगा है। इसके बाद एक और लोहे का भारी भरकम गेट। इसका अंदाजा ऐसे लगा सकते हैं कि पुलिस से जब भीतर वाला गेट भी नहीं टूटा तो बरामदे में लगे जाल को ट्रैक्टर से तोड़ने की कोशिश की।यह दूसरी बात है कि विकास की नौकरानी ने ही बाद में गेट खोल दिया।
  • No Comment to " आठ पुलिस की हत्या के आरोपी गैंगस्टर विकास दुबे के किले जैसी अभेध सुरक्षा वाला मकान मिनटों किया गया जमींदोज ! "